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मनन

नया जीवन

लूका 6ः8-11

“परन्तु वह उनके विचार जानता था; इसलिये उसने सूखे हाथवाले मनुष्य से कहा; उठ, बीच में खड़ा हो: वह उठ खड़ा हुआ”।

परमेश्वर हमें अवसर देता है, कि हम अपने पुराने मनुष्यत्व को छोड़कर परमेश्वर की इच्छा के अनुसार उसकी बताई हुई राह पर नये जीवन की सी चाल चलें। परमेश्वर ने हमें यह मौका दिया है कि हम एक बार फिर से अपने जीवनों का पुर्नमूल्यांकन करें।

नया क्या होता है? नया मनुष्यत्व, नया जीवन क्या होता है? परमेश्वर के वचन के अनुसार यदि हम देखें तो जो नये जीवन और नये मनुष्यत्व की बात है वह बाहरी तौर पर नये हो जाने की बात नहीं है। नये वस्त्र पहन लेने की बात नहीं परन्तु अपनी आत्मा से, अपने हृदय से, अपने प्राण से नये हो जाने की बात है। यदि हम धर्मविज्ञान के दृष्टिकोण से देखें तो हम पाते हैं कि मनुष्य में तीन बातें होती हैं। मनुष्य में शरीर होता है, उस में आत्मा होती है, उस में प्राण होता है।

मानव जीवन के तीन आयाम होते हैं और इसलिए जब नयेपन की बात होती है तो हमें यह देखना है कि क्या वास्तव में हमारा नया जीवन है? क्या हम परमेश्वर के अनुसार एक नये जीवन की सी चाल चल रहे हैं? आज परमेश्वर ने अवसर दिया है कि हम सबसे पहले अपने हृदय को देखें। जब हम नये होने की बात करते हैं तो हमारा हृदय कहां है हमारा उद्देश्य क्या है? हमारे हृदय में क्या वास्तव में समर्पण है? हमारे हृदय में क्या वास्तव में सेवा की भावना है? हमारे हृदय में क्या वास्तव में आदर देने की प्राथमिकता है?

हमें अपने हृदय का मूल्यांकन करना है, हमें अपने हृदय को देखना है। परमेश्वर का वचन हमको बताता है कि सब प्रकार की बुराइयां भी हृदय से पैदा होती हैं और सब प्रकार की अच्छाइयां भी हृदय से पैदा होती हैं। इसलिए बाइबिल में बार-बार हृदय के परिवर्तन की बात है। हृदय को नया बनाने की बात है। अपने हृदय से घृणा, द्वेष, आलोचना और नकारात्मक बातों को हमें अलग करना है और परमेश्वर की सकारात्मक बातों को लेकर आगे बढ़ना है। हमारा उद्देश्य हमारे सामने बहुत स्पष्ट होना चाहिए कि हम अपने जीवन से लोगों की सेवा कर सकें। हमारे जीवनों से दूसरों का हित हो सके।

प्रार्थना -पिता परमेश्वर, हमें बुद्धि और ज्ञान से परिपूर्ण कीजिए जिससे कि हम अपने हृदय का मूल्यांकन कर सकें, और सांसारिक बुराइयों से अपने आपको को बचा कर रख सकें। आमीन!