Background

मनन

योग्यताओं का विस्तार

मत्ती 25ः15-26

“उस ने एक को पांच तोड़े, दूसरे को दो, और तीसरे को एक; अर्थात् हर एक को उस की सामर्थ्य के अनुसार दिया, और तब परदेश चला गया। तब जिस को पांच तोड़े मिले थे, उस ने तुरन्त जाकर उन से लेन देन किया, और पांच तोड़े और कमाए”।

आज का सन्दर्भ हमारे लिए एक जानी पहचानी घटना है। हमने सण्डे स्कूल में इस घटना के बारे में पढ़ा है। कलीसिया में इस विषय से सम्बन्धित सन्देश सुने हैं। परन्तु आज हम एक नए नज़रिये से इस घटना पर मनन करेंगे। इस घटना में जिस दास ने एक तोड़ा लौटाया उसने चोरी नहीं की थी, धोखा नहीं दिया था, कहीं भाग नहीं गया था मगर उसकी ग़लती यह थी कि उसने आलस्य किया था। उसने उस तोड़े को बढ़ाने का कोई प्रयास नहीं किया और फिर अपने बचाव के लिए बहाने बनाए।

एक आलसी व्यक्ति वह है जो अपने काम को परिश्रम से नहीं करता, जो दूसरों के कार्यों में हस्तक्षेप करता है परन्तु अपना काम पूरा नहीं करता। इस दास ने वही किया।

हमें विचार करना है कि हमें परमेश्वर ने योग्यताएं दी हैं, सामर्थ्य दी है, समय दिया है और स्त्रोत दिए हैं। यदि हम अपनी ज़िम्मेदारियों को वफादारी से निभाएंगे तो हमारे पास समय नहीं होगा कि हम दूसरों के लिए भला बुरा कहें, किसी की निन्दा करें, किसी की आलोचना करें।

वचन में लिखा हुआ है कि जिसको जो-जो कार्य सौंपा गया है वह उस कार्य में लगा रहे। दान देने वाला उदारता से दान दे, पहुनाई करने वाला उत्साह से पहुनाई करे, अगुवाई करने वाला अगुवाई करने में लगा रहे।

विचार करें कि हमें इस संसार में रहते हुए परमेश्वर ने जो ज़िम्मेदारियां दी हैं, जो वरदान दिए हैं क्या हम उन्हें परमेश्वर के सामने ले जाकर यह कह सकेंगे कि जो कार्य तूने मुझे दिया था उसे मैंने पूरा ही नहीं किया बल्कि और बेहतर ढंग से किया है। तूने जो योग्यता दी उससे अपने जीवन में गुणात्मक सुधार किया। स्मरण रखिए यदि हम ऐसा करेंगे तो हम परमेश्वर की दृष्टि में ग्रहणयोग्य ठहरेंगे और उसकी योजना में उसके विश्वासयोग्य दास ठहरेंगे।

प्रार्थना -परमेश्वर पिता, ऐसा मार्गदर्शन प्रदान करें कि हम आपके द्वारा दी गई योग्यताओं को विस्तार देते हुए उन्हें बढ़ा सकें और उनसे आपकी महिमा करने वाले हो सकें। आमीन!