2 कुरिन्थियों 4ः18 “और हम तो देखी हुई वस्तुओं को नहीं परन्तु अनदेखी वस्तुओं को देखते रहते हैं, क्योंकि देखी हुई वस्तुएं थोड़े ही दिन की हैं, परन्तु अनदेखी वस्तुएं सदा बनी रहती हैं”। एक ऐसा मार्ग होता है जो मनुष्य को ठीक दिखाई देता है, परन्तु उसके अन्त में विनाश ही होता है, उसके अन्त में मृत्यु होती है। उसके अन्त में असफलता होती है। जो बात यहां पर है वह यह कि एक मार्ग है, जो सही दिखाई देता है। अक्सर जीवन में जो कुछ दिखता है वही सही नहीं होता। जीवन में जो कुछ दिखाई देता है वही सत्य नहीं होता। एक सत्य ऐसा होता है जो दिखाई देता है, एक सत्य ऐसा होता है जो दिखाई नहीं देता। एक सत्य है माता का जो दिखाई देता है, एक सत्य है मां की ममता का जो दिखाई नहीं देता। एक सत्य है सुबह के प्रकाश का जो दिखाई देता है, एक सत्य है हवा के बहने का जो दिखाई नहीं देता। एक सत्य है किसी फूल का जो दिखाई देता है, एक सत्य है उसकी सुगन्ध का जो दिखाई नहीं देती। समस्या यह हो जाती है कि जो कुछ दिखाई देता है हम वहीं तक सीमित हो जाते हैं, और उसी को सब कुछ मान लेते हैं। उसी तरफ बढ़ने लगते हैं। कोई व्यक्ति यदि जीवन में सफल होना चाहता है, तो उस व्यक्ति के लिये बहुत प्रमुख बात है कि जो दिखाई देने वाला सत्य है उसके परे देखने और उसके परे सोचने की शक्ति उस व्यक्ति में हो। किसी ने कहा है कि चाहे अब्राहम लिंकन हों, चाहे मदर टेरेसा हों, चाहे महात्मा गांधी हों, जो समय उनके पास था, वह समय हमारे पास भी है। जो वर्ष उन्हें मिले थे वे ही वर्ष हमारे पास भी हैं। परन्तु वे अब्राहम लिंकन और मदर टेरेसा क्यों हो गए और हम क्यों आज भी साधारण मनुष्य ही हैं? ऐसा इसलिये क्योंकि उन्होंने मनुष्य के उस सत्य को समझा जो अदृश्य सत्य है। उन्होंने अपने जीवन में मानव को दिशा देने के लिये जो कुछ किया वह अर्थपूर्ण हो गया। आवश्यकता इस बात की है कि हम उस सत्य को देखें जो दिखाई नहीं देता। सफल वह व्यक्ति होता है जो परमेश्वर की योजना को समझता है, और परमेश्वर की योजना को पूरा करता है। जो अपने आस-पास के लोगों के जीवनों को दिशा दे पाता है, वही व्यक्ति परमेश्वर की दृष्टि में सफल होता है। प्रार्थना -पिता परमेश्वर, हमें ऐसी बुद्धि दीजिये कि हम आपके अनदेखे सत्य को समझ सकें और आपके वचन के मार्ग पर आगे बढ़ने वाले हो सकें। आमीन!