नीतिवचन 1ः7 “यहोवा का भय मानना बुद्धि का मूल है; बुद्धि और शिक्षा को मूढ़ ही लोग तुच्छ जानते हैं”। हमारे जीवन में समस्याएं क्यों आती हैं? वास्तव में इसकी गहराई में जो बात है वह यह कि लोगों के हृदय में परमेश्वर का भय नहीं है। जिस व्यक्ति के हृदय में परमेश्वर का भय होगा वही अपने जीवन में सही निर्णय करेगा। बाइबिल में लिखा है कि परमेश्वर का भय मानना बुद्धि का आरम्भ है। बुद्धिमान हम तब होंगे जब हम जीवन में सही निर्णय कर सकेंगे, अपने कदमों को सही दिशा में बढ़ा सकेंगे, अपने जीवन में सही कार्य कर सकेंगे। सही निर्णय करना तभी सम्भव है जब हम परमेश्वर के भय के प्रकाश में अपने जीवन के सही निर्णयों को कर सकें। माता-पिता का भय हम इसलिए मानते हैं क्योंकि वे हमसे बड़े हैं, हमसे कहीं ज़्यादा ज्ञानवान हैं, उनके पास अधिकार है। परन्तु वे हमसे प्रेम करते हैं, और यही बात परमेश्वर के विषय में हैं। हमारे हृदय में परमेश्वर का भय हो कि परमेश्वर सर्वज्ञानी, सर्वव्यापक, सर्वसामर्थी परमेश्वर है। हमें यह अहसास हो कि उसने हमें सृजा है, एक दिन हमें उसी की निकटता में जाना है और अगर हम परमेश्वर की इच्छा को पूरा करेंगे तो हमें अनन्त जीवन प्राप्त होगा। अगर हम परमेश्वर की इच्छा को पूरा नहीं करेंगे तो हमारी आत्मा का विनाश होगा। जिससे हम प्रेम रखते हैं, हम प्रयास करते हैं कि उसे हम नाराज़ न करें, हम प्रयास करते हैं कि ऐसे कार्य करें कि जिससे वह प्रसन्न हो। हमारा परमेश्वर हर समय हमें देखता है, यहां तक कि हमारे हृदयों के विचारों को भी जानता है, हमारे मनों को पढ़ सकता है। उसके भय में अपने जीवन के निर्णय करें, उसके भय के कारण अपने जीवन को अनुशासित करें, उसके भय में होकर अपनी ज़िम्मेदारियों का वहन करें, उसके भय में होकर हम एक दूसरे से व्यवहार करें। उसके भय में होकर अपने जीवन में हम कार्य करें तो हमारे जीवन सफल होंगे, आशीषित होंगे, और एक दिन हम उसके साथ उसके निवास में अनन्तकाल तक रह सकेंगे। आज हम स्वयं अपने हृदय को देखें, अपनी आत्मा में झांकें और इस बात को देखने का प्रयास करें कि क्या वास्तव में हमारे जीवन में परमेश्वर का भय है या नहीं! प्रार्थना -परमेश्वर पिता, हमें आशीष दीजिए कि हमारे जीवन में आपको छोड़कर अन्य किसी भी बात का भय न हो और जीवन में सही निर्णय करते हुए आपके बताए हुए रास्ते पर चलने वाले बन सकें। आमीन!