लूका 18ः10-13 “दो मनुष्य मन्दिर में प्रार्थना करने के लिये गए; एक फरीसी था और दूसरा चुंगी लेनेवाला। फरीसी खड़ा होकर अपने मन में यों प्रार्थना करने लगा, कि हे परमेश्वर, मैं तेरा धन्यवाद करता हूं, कि मैं और मनुष्यों की नाईं अन्धेर करनेवाला, अन्यायी और व्यभिचारी नहीं, और न इस चुंगी लेनेवाले के समान हूं”। प्रार्थना करने की आवश्यकता क्यों है? बाइबिल में लिखा है कि तुम्हारे मांगने के पहले ही वह जानता है कि तुम्हें किन बातों की आवश्यकता है। फिर प्रार्थना की आवश्यकता क्यों है? वास्तव में जब हम प्रार्थना करते हैं तो यह इस बात को दर्शाता है कि हमारी निर्भरता किस पर है। हम याचना उसी से करते हैं जिस पर हमारी निर्भरता होती है। जो कुछ देने की क्षमता रखता है। जब प्रभु यीशु मसीह ने अपने चेलों को प्रभु की प्रार्थना करना सिखाया तो उसने कहा कि जब प्रार्थना करो तो ऐसे करो, कि दिन भर की रोटी तू आज हमें दे। परमेश्वर हमसे अपेक्षा करता है कि हम उससे मांगें, हम उसके पास जाएं, हम उसकी निकटता में जाएं, यह परमेश्वर की अपेक्षा है, वह चाहता है कि हम उसके पास आएं। परमेश्वर का वचन कहता है कि मांगो तो तुम्हें दिया जाएगा, ढूंढोगे तो पाओगे। जो बात है वह यह कि मांगना है और ढूंढ़ना भी है, प्रयास भी करना है। प्रार्थना करके आलसी होकर पड़े नहीं रह जाना है। प्लेट में खाना रखा हो और हम कहें कि हमारा पेट भर जाए तो ऐसा नहीं होगा। बाइबिल में दृष्टान्त है कि एक व्यक्ति अपने पड़ोसी के पास आता है और पड़ोसी का दरवाज़ा खटखटाता है और वह जब बार-बार मांगता है और बार-बार याचना करता है तब पड़ोसी उसकी मदद करता है। हमें निरन्तर प्रार्थना करते रहना है और मैं समझता हूं कि सबसे बड़ी शक्ति जो हमारे पास है वह प्रार्थना की शक्ति ही है। जब अपने बच्चों के सामने हम प्रार्थना करते हैं तो ऐसा करके हम बच्चों को सिखाते हैं कि बेटा हम तो तुम्हारे माता-पिता हैं परन्तु हम हमेशा तुम्हारे साथ नहीं रहेंगे। तुम्हारा जो वास्तविक पिता है वह तो स्वर्ग में है, वह तो परमेश्वर है। उसी पर निर्भर होना है, उसी पर विश्वास रखना है, उसी से आशा रखना है। हम तो इस संसार में हैं, चले जाएंगे परन्तु महत्वपूर्ण बात जो बच्चों को सिखाना है कि हमारा पिता, हमारा मालिक, हमारा स्वामी और हमारा सब कुछ जो है; वह परमेश्वर है। उसी से मांगना है, उसी से प्रार्थना करना है। प्रार्थना -परमेश्वर पिता, आपका वचन कहता है कि मांगो तो तुम्हें दिया जाएगा। आप तो जानते हैं कि हमें किन चीज़ों की आवश्यकता है, हमारे जीवन की घटी को पूर्ण कीजिए जिससे हमारे द्वारा दूसरों के भी जीवन आशीषित हो सकें। आमीन!