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मनन

ख़ामोशी से परमेश्वर के साथ

मत्ती 4ः1-2

“तब उस समय आत्मा यीशु को जंगल में ले गया ताकि इबलीस से उस की परीक्षा हो। वह चालीस दिन, और चालीस रात, निराहार रहा, अन्त में उसे भूख लगी”।

प्रभु यीशु मसीह के जीवन को हम देखें तो एक बात बार-बार सामने आती है और जैसा कि सुसमाचारों में लिखा भी है कि एकान्त में प्रभु यीशु मसीह प्रार्थना करने चला गया। एक समय का वर्णन है जब चालीस दिन और चालीस रात प्रभु यीशु मसीह एकान्त में रहा जहां निरन्तर वह परमेश्वर से प्रार्थना करता रहा। बड़ी अजीब सी बात लगती है कि प्रभु यीशु मसीह एकान्त में क्यों जा रहा है। प्रभु यीशु मसीह को ऐसे समय की आवश्यकता क्यों पड़ती थी कि वह एकान्त में चला जाए, ख़ामोशी से कुछ समय अलग बिताए।

प्रभु यीशु मसीह के पास सेवकाई के लिए मात्र 3 वर्ष का समय था। यह बात उसे मालूम थी। थोड़ा समय था बहुत सारा काम था। बहुत से गांव जाना था, बहुत से शहरों में जाना था, बहुत से लोगों को स्पर्श करना था तो फिर ख़ामोशी से अकेले में चले जाने की बात क्यों आई? पहाड़ पर अकेले चले जाने की बात क्यों आती है?

हम भी कमज़ोर हैं, हमारे साथ भी समस्याएं आती हैं। हम भी परेशानियों का सामना करते हैं, हम भी परीक्षाओं में गिरते हैं, जो हमें नहीं करना चाहिए उसे करते हैं और जो करना चाहिए उसे हम नहीं करते। इस कारण हमें परमेश्वर की निकटता की आवश्यकता है। हम बहुत कमज़ोर और साधारण हैं और हमारे लिए बहुत ज़रूरी है कि हम कुछ समय परमेश्वर के साथ एकान्त में बिताएं।

दस मिनिट हम किसी से कोई बात नहीं करें। हम ख़ामोशी में परमेश्वर की निकटता में समय बिताएं। स्वयं का मूल्यांकन करें, अपने जीवन की कमज़ोरियों के बारे में सोचें। कहां पर हमें मज़बूती की आवश्यकता है, जीवन का वह कौन सा पहलू है जो बहुत कमज़ोर है, जिसको हमें बहुत सुधारने की ज़रूरत है, कौन सी परीक्षाएं हैं जो हमको विचलित कर देती हैं। हम परमेश्वर से बातचीत कर सकते हैं ख़ामोशी में, अपना स्वयं का मूल्यांकन कर सकते हैं।

अभी भी देर नहीं हुई है, अभी भी समय है। परमेश्वर की निकटता में अपने जीवन को बिताएं, परमेश्वर से हमको मानसिक शान्ति मिलेगी, आन्तरिक आनन्द मिलेगा, परमेश्वर की उपस्थिति से हमारे जीवन और चिन्तन प्रभावित होंगे और दूसरों के लिए हमारा जीवन आशीष का कारण ठहरेगा।

प्रार्थना -परमेश्वर पिता, हमें अपनी सामर्थ्य से परिपूर्ण कीजिए जिससे हम अपने जीवन की कमज़ोरियों से छुटकारा पा सकें और जीवन में आपकी उपस्थिति को महसूस कर सकें। आमीन!