मत्ती 22ः37-38 “उस ने उस से कहा, तू परमेश्वर अपने प्रभु से अपने सारे मन और अपने सारे प्राण और अपनी सारी बुद्धि के साथ प्रेम रख। बड़ी और मुख्य आज्ञा तो यही है”। प्रातः मनन का एक प्रमुख उद्देश्य यह होता है कि हम इस बात को समझें, हम इस बात को मानें कि हमें अपनी दिनचर्या में पहला स्थान परमेश्वर को देना है। आज के इस दिन को प्रारम्भ करने के पहले अपनी ज़िम्मेदारियों का निर्वाह करने के पहले, लोगों से मिलने से पहले, अपने आज के कार्यों को करने से पहले हम परमेश्वर की निकटता में आएं, उससे प्रार्थना करें, उसकी ओर ध्यान लगाएं। इस बात को जानें कि अपने जीवन में हमें प्रथम स्थान परमेश्वर को देना है। अक्सर अपने जीवनों में हम दुखी होते हैं, हम बहुत ज़ल्दी निराश हो जाते हैं। जीवन के उतार चढ़ाव में हम जूझते रहते हैं, संघर्ष करते रहते हैं। जिनसे हम प्रेम करते हैं उनसे चोट पहुंचती है, जिन पर हम विश्वास करते हैं उनसे विश्वासघात होता है और तब जीवन में निराशा आ जाती है। मैं समझता हूं कि अगर हम अपने जीवन में वास्तव में परमेश्वर को पहला स्थान देंगे तो बहुत सी समस्याओं और बहुत सी निराशाओं, बहुत से दुखों को हम पीछे छोड़ देंगे। हो सकता है कि हम आज निराश हों, हम आज दुखी हों। इसका कारण यह हो सकता है कि हमने अपने जीवन में परमेश्वर को पहला स्थान नहीं दिया और इसलिए हमने परमेश्वर को पहचाना नहीं। हमने प्रभु यीशु मसीह के बलिदान की क़ीमत को बहुत सस्ता समझ लिया। हम पढ़ते तो हैं परन्तु उसकी अनुभूति हमको होती नहीं, हम सुनते तो हैं परन्तु दिलों तक कुछ पहुंचता नहीं। क्यों? क्योंकि हम अपनी मान्यताओं में, अपनी परम्पराओं में, अपनी मानसिकताओं में उलझे हुए हैं। अपने द्वारा बनाए हुए दायरे को तोड़ना नहीं चाहते और सच्चाई को स्वीकार करना नहीं चाहते। परमेश्वर कहता है कि मैंने माता के गर्भ में तुझे रचा है और उससे पहले मैंने तेरे जीवन के लिए योजना बनाई। परमेश्वर कहता है कि जन्माई हुई माता तुझे भूल सकती है परन्तु मैं तुझे कभी नहीं भूल सकता। परमेश्वर मेरे और आपके लिए सब कुछ छोड़कर, स्वर्ग का सिंहासन छोड़कर धरती पर आ जाता है। प्रभु यीशु मसीह हमसे इतना प्रेम करता है कि हमारे पापों की क़ीमत चुकाने के लिए क्रूस पर अपने आप को बलिदान कर देता है। आज हमारे जीवनों में आवश्यकता इस बात की है कि हम वास्तव में अपने जीवन में परमेश्वर को पहला स्थान दें। प्रार्थना -पिता परमेश्वर, हमारे हृदय में इस भावना को लाने में हमारी मदद करें कि हम अपने जीवनों में आपको पहला स्थान देने वाले हो सकें। आमीन!