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मनन

आप किसके हाथ में हैं?

निर्गमन 4ः2

“यहोवा ने उस से कहा, तेरे हाथ में वह क्या है? वह बोला, लाठी”।

आप का भरोसा किस पर है, आप अपने जीवन में किस पर निर्भर हैं, आप का शरण स्थान कौन है, समस्या और कठिनाई के समय किसके सहारे की बात आप सोचते हैं; यह बात दर्शाती है कि आप किसके हाथों में हैं? क्योंकि जिस पर हम निर्भर होते हैं, हम उन्हीें के हाथों में होते हैं। आज मेरे और आपके मनन के लिए मैं यही प्रश्न रखना चाहता हूं कि आप किसके हाथों में हैं?

क्रिकेट का एक बैट जो कि मेरे हाथों में होगा तो उसकी क़ीमत 6 हज़ार रुपये होती है जब यही बैट सचिन तेन्दुलकर के हाथों में चला जाता है तो उसकी क़ीमत 7 लाख रुपये हो जाती है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि कौन किसके हाथों में है। एक बास्केट बाॅल की गेंद है जो मेरे हाथों में है उसकी कीमत 200 रुपये होती है और यही बास्केट बाॅल की गेंद अगर मशहूर बास्केट बाॅल खिलाड़ी मार्ग मैक्वायर के हाथ में चली जाए तो उसकी क़ीमत 2 करोड़ डाॅलर्स की हो जाती है।

मेरे हाथों में छैनी और हथौड़ी है तो शायद कुछ गिट्टियां ज़रूर बन जाएंगी परन्तु जब यही माइकल एंजलो के हाथ में होती है, तो दुनिया की विश्व प्रसिद्ध दाऊद की प्रतिमा बन जाती है, जो अमूल्य है। मेरे हाथों में कोई लाठी हो तो शायद जानवरों को डरा सकूं, भगा सकूं, परन्तु यदि यही लाठी मूसा के हाथों में होती है तो लाल समुद्र दो भागों में बंट जाता है। यह सब निर्भर करता है कि कौन किसके हाथों में है। गोफन मेरे हाथों में खिलौने के समान होता है, पर यही गोफन जब दाऊद के हाथों में पहुंचता है तो शक्तिशाली और आक्रामक हथियार बन जाता है। यह सब निर्भर करता है कि कौन किसके हाथों में है?

5 रोटियां और 2 मछलियां हमारे हाथों में दे दी जाएं तो शायद एक समय का भोजन तैयार हो जाए, परन्तु यही जब प्रभु यीशु मसीह के हाथों में होती हैं तो 20 हज़ार लोगों की भूख तृप्त होती है। एक कील मेरे हाथों में घुस जाए तो चोट लग जाएगी, खून बहेगा, पट्टी बंध जाएगी। यही कील जब प्रभु यीशु मसीह के हाथों में ठोंकी जाती है तो सारे संसार के लोगों के लिए उद्धार का रास्ता खोल देती है।

वास्तव में यह सब निर्भर करता है कि कौन किसके हाथों में है! मेरा प्रश्न यह है कि आपकी चिन्ताएं किसके हाथों में हैं, आपके हाथों में या परमेश्वर के हाथों में? हमारे सम्बन्ध यदि परमेश्वर के हाथों में होंगे तो महान कार्य होगा जिसकी हम और आप कल्पना भी नहीं कर सकते। वास्तव में आप किस पर निर्भर हैं? किस के हाथों में हैं, क्योंकि जिस पर आप निर्भर हैं, उसी के हाथों में आप हैं।

प्रार्थना -पिता परमेश्वर, हमें अपनी समीपता में बनाए रखिए जिससे हम आपके वचन में रहकर आपके बताए हुए रास्ते पर चल सकें। आमीन!