लूका 9ः62 “यीशु ने उस से कहा; जो कोई अपना हाथ हल पर रखकर पीछे देखता है, वह परमेश्वर के राज्य के योग्य नहीं”। बाइबिल में बहुत सी ऐसी बातें हैं, बहुत सी ऐसी शर्तें हैं जिनमें प्रभु यीशु मसीह ने बड़ा स्पष्ट संकेत दिया है कि यदि व्यक्ति ऐसा नहीं कर सकता तो वह मेरे राज्य के योग्य नहीं, वह मेरे पीछे चलने वाला नहीं हो सकता। हल पर हाथ रखने की बात है। हल पर हाथ रखने की बात का अर्थ होता है जीवन में ठोस निर्णय कर लेना। जीवन में बहुत सी समस्याएं दूर हो सकती हैं अगर हम ठोस निर्णय कर लें। जीवन में हर निर्णय की परिणति अक्सर सिद्ध नहीं होती। कहीं न कहीं कुछ कठिनाई होती है परन्तु जीवन में वह व्यक्ति आगे बढ़ जाता है जो ठोस निर्णय कर लेता है। प्रभु यीशु मसीह के कथन में जो बात है, वह यह कि जो कोई अपना हाथ हल पर रखकर पीछे देखता है वह परमेश्वर के राज्य के योग्य नहीं। पीछे मुड़कर देखेंगे तो हमने जीवन में बहुत सी ग़लतियां की हैं। बहुत सी हमारी कमज़ोरियां हैं लेकिन जब हमने प्रभु यीशु मसीह को स्वीकार कर लिया तो फिर हमें पीछे मुड़कर नहीं देखता है। जब हमने हल पर हाथ रखा है, जब हम परमेश्वर की सेवा के लिए बढ़े हैं तो परमेश्वर चाहता है कि हम अपने काम में, अपनी सेवा को फलवन्त बनाएं। परमेश्वर ने हमें समय दिया है, जीवन दिया है, योग्यताएं दी हैं, स्त्रोत दिए हैं, अच्छा वातावरण दिया है। जीवन में विषम परिस्थितियां तो आएंगी, मौसम भी बदलेंगे, उतार-चढ़ाव आएंगे, समस्याएं आएंगी। जब किसान हल चलाता है तो पत्थर भी आते हैं। उनको भी हटाना पड़ता है, कंटीली झाड़ियां आती हैं, उनको भी निकालना पड़ता है। प्रभु यीशु मसीह कहते हैं कि हल पर हाथ रखकर जो पीछे मुड़कर देखता है वह परमेश्वर के राज्य के योग्य नहीं। जब हमने हल पर हाथ रखा है तो हमें आगे बढ़ना है, हमें अपनी योग्यताओं के अनुसार अधिक से अधिक परमेश्वर की सेवा करना है, और हमें अपने जीवन में फलवन्त होना है तब हम प्रभु यीशु मसीह की दृष्टि में उसके योग्य होंगे। प्रार्थना -परमेश्वर पिता, धन्यवाद देते हैं आपके बेटे प्रभु यीशु मसीह के लिए जिसके द्वारा हमें पापों की क्षमा प्राप्त हुई है। हमें सामर्थ्य प्रदान कीजिए कि हम अपने जीवन में उचित निर्णय कर सकें। आमीन!