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मनन

सबसे बड़ा रोग

रोमियों 6ः12

“इसलिये पाप तुम्हारे मरनहार शरीर में राज्य न करे, कि तुम उस की लालसाओं के आधीन रहो”।

संसार की मूलभूत समस्या, मानव जाति की सबसे प्रमुख समस्या कैंसर या एड्स नहीं वरन् पाप है। पाप इसलिए गम्भीर है क्योंकि यह हमारी आत्मा को कलंकित करता है। इससे हमारा शरीर तो प्रभावित होता ही है, साथ ही यह हमारी आत्मा को विनाश के रास्ते पर ले जाता है। बहुत से मतो में पाप की परिभाषा स्पष्ट नहीं है या फिर बिल्कुल ही नहीं है, परन्तु बाइबिल में पाप को परिभाषित किया गया है। प्रभु यीशु मसीह ने स्वयं अपनी शिक्षाओं में पाप की विवेचना की है। वह ऐसा करने में इसलिए सक्षम है क्योंकि स्वयं उसका जीवन निष्पाप है। एक पाप रहित प्रक्रिया से वह जन्मा और सम्पूर्ण जीवन पापरहित जिया।

वचन बताता है कि हम सब ने पाप किया है और परमेश्वर की महिमा से रहित हैं। पाप परमेश्वर की व्यवस्था को तोड़ना है। हम पाप तब करते हैं जब हम भलाई करना जानने के बावजूद भलाई नहीं करते। जब हम अपने जीवन में दुर्भावनाओं को हावी होने देते हैं तब हम पाप की ओर बढ़ते हैं। जब हम परमेश्वर की योजना पर विश्वास नहीं करते तब हम पाप करते हैं।

परन्तु हम सबके लिए सबसे आशीषित बात यह है कि प्रभु यीशु मसीह के लोहू के द्वारा परमेश्वर ने पाप की समस्या से निकलने का रास्ता हमें दिया है।

आज संसार में कैंसर की, एड्स की कोई दवा नहीं। न जाने और कौन-कौन सी जान लेवा बीमारियां हैं जिनका कोई इलाज नहीं परन्तु मानव की सबसे बड़ी समस्या सबसे बड़े रोग का इलाज परमेश्वर के पास है और उसका यह इलाज मेरे और आपके लिए मुफ्त उपलब्ध है।

आज विचार करें, क्या आप अभी तक इस रोग से ग्रसित हैं; यदि हां तो प्रभु के पास आएं, वह आपको इस रोग से मुक्त करने के लिए बांहें पसारे तैयार है।

प्रार्थना -परमेश्वर पिता, धन्यवाद देते हैं आपके बहुमूल्य उपहार प्रभु यीशु मसीह के लिए, जिसके द्वारा हमें हमारे पापों की क्षमा प्राप्त हुई है। आमीन!