फिलिप्पियों 2ः5 “जैसा मसीह यीशु का स्वभाव था वैसा ही तुम्हारा भी स्वभाव हो”। हमारे जीवन में दो स्वभाव कार्य करते हैं। एक ऐसा स्वभाव जो हमको पसन्द आता है, जो अच्छा स्वभाव है। दूसरा स्वभाव जो नकारात्मक व्यवहार है और जो हमें नापसन्द है। हम में से हर एक ने इन व्यवहारों को अनुभव किया है और हम में से प्रत्येक इन परिस्थितियों से गुज़रता है। संसार में भी दो प्रकार की शक्तियां कार्य करती हैं। एक ईश्वरीय शक्ति होती है जो सकारात्मक कार्य करती है। जो हमारे जीवन में सकारात्मक सोच लाती है। जो हमारी वाणी को सकारात्मक सत्य दे जाती है। दूसरी जो शक्ति होती है वह शैतान की शक्ति होती है। जो हमारे जीवन में नकारात्मकता लाती है। नकारात्मक व्यवहार, नकारात्मक विचार, नकारात्मक प्रतिक्रियाएं पैदा करती है और इन परिस्थितियों से हम जूझते रहते हैं। बाइबिल में हम पाते हैं कि प्रारम्भ से शैतान ने परीक्षा ली। प्रारम्भ में हम पाते हैं कि आदम और हव्वा की परीक्षा हुई और उसके बाद हम पाते हैं कि किस प्रकार से मनुष्य का पतन हुआ। मनुष्य परीक्षा में गिर गया। यहां तक कि जब प्रभु यीशु मसीह ने अपनी सेवकाई प्रारम्भ की तो प्रभु यीशु मसीह जो स्वयं परमेश्वर था, जो स्वयं परमेश्वर का सह-अस्तित्व था, जब वह इस संसार में अपनी सेवकाई प्रारम्भ करता है तो शैतान उसकी परीक्षा लेता है। हम पाते हैं कि शैतान कभी-कभी अप्रत्यक्ष रूप से आक्रमण करता है। सीधा आक्रमण न करके हमारे जीवन में घमण्ड पैदा कर देता है। दुर्भावना पैदा कर देता है, जलन पैदा कर देता है। बदले की भावना पैदा कर देता है, क्रोध पैदा कर देता है। इस प्रकार से अप्रत्यक्ष रूप से शैतान हमारे ऊपर प्रहार करता है, हमें परीक्षा में गिराता है। परमेश्वर की प्रेरणा उसकी सामर्थ्य है, उसके आनन्द, शान्ति और परमेश्वर के रास्ते की दिशा में हम बढ़ें और हमारे जीवन में जो नकारात्मक स्वभाव है उसको हम ज़्यादा बलवान न बनाएं, और परमेश्वर की योजना को अपने जीवन में पूरा करें। सकारात्मक सोच को लेकर चलें। सकारात्मक चिन्तन को लेकर चलें। सकारात्मक विचारों को लेकर चलें। सकारात्मक बातों को बोलने वाले हों। क्योंकि इन बातों से हमारे जीवन पर, हमारे परिवार पर, हमारे समाज पर प्रभाव पड़ेगा, और सबसे बढ़कर ईश्वर की इच्छा को हम अपने जीवन में पूरा कर सकेंगे। प्रार्थना -पिता परमेश्वर, हमें ऐसी समझ दे कि हम शैतान की परीक्षाओं में न पड़ें वरन् आपकी योजनाओं को पूरा करने वाले हो सकें। आमीन!