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मनन

परमेश्वर के निकट आने के लिए

याकूब 4ः8

“परमेश्वर के निकट आओ, तो वह भी तुम्हारे निकट आएगा: हे पापियों, अपने हाथ शुद्ध करो; और हे दुचित्ते लोगो अपने हृदय को पवित्र करो”।

अपने जीवन में असफलता का सामना करते समय अक्सर हम अपने आपको टूटा हुआ एवं निराश महसूस करते हैं। परन्तु परमेश्वर का वचन हमको बताता है कि जब हम अपने जीवन में असफल होते हैं, तब परमेश्वर हमारे भीतर के घमण्ड को तोड़ता है और अपनी सामर्थ्य से हमें भरता है, क्योंकि टूटा हुआ मन उसे ग्रहण योग्य बलिदान है।

इसी सन्दर्भ में आज मनन के लिए बात यह है कि जब हमारे जीवन में असफलता आती है, तो असफलता हमें परमेश्वर की निकटता में ले जाती है। हमें परमेश्वर पर निर्भर होना सिखाती है। इस बात का हमें अहसास होता है कि हम जीवन में सब कुछ अपने आप नहीं कर सकते। अपनी योग्यताओं से हम सब कुछ अर्जित नहीं कर सकते। हमको परमेश्वर पर निर्भर होना है।

ज़रा ध्यान से सोचिए कि जब आप और हम असफल होते हैं, हम और आप जब टूटते हैं तब वास्तव में हमारे हृदय से प्रार्थना निकलती है और परमेश्वर की निकटता में हम जाते हैं। यदि मैं आपसे पूछूं कि पिछली बार कौन सा ऐसा समय था, जब आपने वास्तव में परमेश्वर से बड़े समर्पण के साथ, और बड़े तल्लीन होकर प्रार्थना की, जब आपकी आंखों में आंसू थे। आप विचार करें कि यह वह समय था जब आप अपने आप को असफल महसूस कर रहे थे, जब भीतर से टूटा हुआ अनुभव कर रहे थे, जब आपको कोई गहरी चोट हृदय में लगी थी।

हम वह गीत भी गाते हैं कि “घोंसले को बार बार तोड़कर उसने चाहा कि सीखें हम उड़ना उससे”। जब हमारे घोंसले टूटते हैं, तब हमारे घुटने भी टिकते हैं।

प्रार्थना -परमेश्वर पिता, वचन के दर्पण में इस बात को समझाने के लिए कि हमारे जीवन की असफलता हमें आपके निकट लाती है, हम आपको धन्यवाद देते हैं। आमीन!