1 कुरिन्थियों 3ः10-13 “क्योंकि उस नींव को छोड़ जो पड़ी है, और वह यीशु मसीह है, कोई दूसरी नींव नहीं डाल सकता”। किसी भी भवन की मज़बूती के लिए उसका आधार मज़बूत होना आवश्यक होता है। बिना सुदृढ़ नींव के मज़बूत इमारत खड़ी नहीं की जा सकती। इसी प्रकार यही बात किसी संस्था के लिए भी लागू होती है। सबसे बढ़कर यह बात लागू होती है व्यक्ति के स्वयं के जीवन के लिए। हमारे जीवन का आधार क्या है? इस सम्बन्ध में विचार के लिए कुछ बातें। पहली बात - मज़बूत आधार के लिए जीवन में परमेश्वर की प्राथमिकता होना चाहिए। जिसने माता के गर्भ में हमें रचा, जिसने समस्त सृष्टि को सृजा। जो हमें अपनी समानता में सृजने के बाद अपनी योजना को पूरा करने के लिए इस संसार में लाया। जब हम पाप में पड़ गए तो उसने हमारे लिए उद्धारकत्र्ता भेजा। प्रभु यीशु मसीह जो हमारे पापों से क्षमा देने के लिए, उद्धार देने के लिए, अपने लहू को बहाकर हमारे पापों की क़ीमत अदा करने के लिए, उद्धार की योजना पूरी करने के लिए इस संसार में आया। अतीत में परमेश्वर था, वर्तमान में है और आज भी उसकी सामर्थ्य हमारे लिए उपलब्ध है। यही परमेश्वर जो अनादिकाल से है, भविष्य पर भी उसका नियंत्रण है और उसी परमेश्वर को हमें लेखा देना है। उसके पास अधिकार है, वह न्याय करेगा। इसलिए हमारे जीवन के आधार में परमेश्वर की प्राथमिकता आवश्यक है। दूसरी बात - परमेश्वर की दृष्टि में प्रत्येक व्यक्ति विशिष्ट है। इसलिए हमें अपनी विशिष्टिता का अहसास करना है। हमें यह भी अहसास करना है कि उन लोगों की आवाज़ बनें, जिनकी आवाज़ कोई नहीं सुनता। निर्बल, अपंग, विक्षिप्त, नेत्रहीन, मूकबधिर और ऐसे बच्चे जो पैदा होते ही छोड़ दिए जाते हैं, जो किसी की ग़लती का परिणाम हैं। ऐसों के जीवन में परिवर्तन लाने के लिए प्रयास करना है क्योंकि ये परमेश्वर की विशिष्ट कृति हैं। हमें अपने जीवन का आधार दृढ़ करने के लिए स्वयं की विशिष्टता और इस संसार के प्रत्येक व्यक्ति की विशिष्टता का अनुभव करना है। तीसरी बात - जीवन का आधार मज़बूत बनाने के लिए हमें अहसास करना है कि समय सीमित है। यह एक कटु सत्य है। यह खुशी का सन्देश है और दुख का सन्देश भी कि समय बीत जाएगा। इसलिए बात यह है कि धन, पद, अधिकार और प्रतिष्ठा की अन्धी दौड़ दौड़ने से कुछ लाभ नहीं होगा, अन्त में हम ख़ाली हाथ ही रह जाएंगे। अतः हम अपने जीवन के आधार को जांचें। परमेश्वर की प्रधानता और प्राथमिकता हमारे जीवन में हो, स्वयं की विशिष्टता और परमेश्वर द्वारा सृजित हर एक मानव की विशिष्टता का अहसास हमें हो और अपने जीवन के समय की सीमितता के प्रति हम सजग रहें। प्रार्थना -पिता परमेश्वर, हमें समझ प्रदान करें कि हम अपने जीवन का आधार आपको बनाएं और आपकी सृष्टि के रूप में स्वयं की विशिष्टता के अनुभव के साथ अपने सीमित जीवन में कुछ प्रमुख करने वाले हो सकें। आमीन।