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मनन

असफलता बहुमूल्य है

2भजन संहिता 51ः17

“टूटा मन परमेश्वर के योग्य बलिदान है; हे परमेश्वर, तू टूटे और पिसे हुए मन को तुच्छ नहीं जानता”।

भजन संहिता का लिखने वाला लिखता है कि टूटा हुआ मन परमेश्वर के योग्य बलिदान है। परमेश्वर टूटे और पिसे हुए मन को अयोग्य नहीं समझता, तुच्छ नहीं समझता, उसे ठुकराता नहीं। सच्चाई वास्तव में यह है कि जब तक हम टूटते नहीं, हम परमेश्वर के पास आते भी नहीं। सफल तो हर कोई होना चाहता है पर असफलता भी जीवन के लिए बहुमूल्य होती है।

जब स्वप्न टूट जाते हैं, जब इच्छाएं पूरी नहीं होतीं, जब योजनाएं पूर्ण नहीं होती और जब इस बात का अहसास होता है कि हम जीवन में कुछ भी नहीं हैं, तभी हम परमेश्वर के पास आते हैं। यह बात नहीं है कि यदि हम असफल हो जाएं, तो यह बहुत अच्छी बात होगी। यदि हम पूरा परिश्रम, पूरा प्रयास करते हुए सच्चाई से अपने उद्देश्य तक पहुंचने का प्रयास करते हैं और उसके बाद भी असफल हो जाते हैं तब भी यह हमारे लिए बड़ी आशीष की बात है। जब असफलता हमारे जीवनों में आती है तो हमारे जीवन में कुछ घटित होता है।

अपने जीवन में जब हम सफल होते हैं तो हमारी असफलता हमारे घमण्ड को तोड़ती है। अपने जीवन में आगे बढ़ते हुए अक्सर हम सोचने लगते हैं कि हम बहुत कुछ हैं, हम तो अपने आप में सक्षम हैं, किसी पर निर्भर होने की आवश्यकता हमें नहीं है। परमेश्वर से प्रतिदिन की रोटी मांगना हमारी ज़रूरत नहीं। परन्तु जब असफलता से हमारा सामना होता है तो असफलता हमारे अहम् को, हमारे घमण्ड को, हमारे बड़बोले पन को तोड़ती है। जब हमारे घमण्ड का प्याला टूटता है तब परमेश्वर की आशीष और उसकी सामर्थ्य उसमें भरती है। क्योंकि टूटा हुआ मन परमेश्वर के योग्य बलिदान है।

प्रार्थना -परमेश्वर पिता, हमारे टूटे हुए मन को स्वीकार करने और अपनी सामर्थ्य से भरने के लिए हम आपको धन्यवाद देते हैं। आमीन!