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मनन

हम क्या ले जाएंगे?

याकूब 2ः14-26

“हे मेरे भाइयो, यदि कोई कहे कि मुझे विश्वास है पर वह कर्म न करता हो, तो उस से क्या लाभ? क्या ऐसा विश्वास कभी उसका उद्धार कर सकता है?”

किसी ने कहा है कि मनुष्य इस संसार में खाली हाथ आता है और खाली हाथ ही इस संसार से चला जाता है। इस संसार में न हम कुछ लेकर आते हैं और न कुछ लेकर जाते हैं। महान योद्धा सिकन्दर जिसने विश्वविजय का सपना देखा था, मरने से पहले उसकी इच्छा थी कि उसकी अर्थी से उसके दोनों हाथ बाहर निकाल दिये जाएं ताकि जो बात उसकी अर्थी से दिखाई दे वह यह कि सिकन्दर खाली हाथ इस संसार में आया था और खाली हाथ इस संसार से चला गया।

यदि हम वास्तव में देखें तो जब व्यक्ति की मृत्यु होती है तो वह अपने साथ कुछ ले जाता है। भले ही उसके हाथों में कुछ न हो परन्तु उसकी आत्मा खाली हाथ नहीं जाती। इस सन्दर्भ के द्वारा परमेश्वर के वचन से दो बातें हमारे सामने आती हैं।

पहली बात यह कि व्यक्ति का विश्वास कभी ख़त्म नहीं होता। प्रभु यीशु मसीह ने कहा, कि “जो कोई मुझ पर विश्वास करे वह यदि मर भी जाए तौभी जीता रहेगा”। व्यक्ति का प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास ही परमेश्वर से उसका मिलन करवाता है और अनन्त जीवन तक उसे पहुंचाता है।

इसी के साथ जुड़ी हुई दूसरी बात है कि मनुष्य के कार्य उसके साथ हो लेते हैं। जैसा लिखा हुआ है “विश्वास भी यदि कर्म सहित न हो तो अपने स्वभाव में मरा हुआ है”। यदि कोई कहे, मैं विश्वास करता हूं, परन्तु वह कोई ऐसा कार्य न करे जिससे उसके इस विश्वास की गवाही हो, तो ऐसा विश्वास मरा हुआ है। वह उस बीज के समान है जो बीज के समान दिखता तो है, जिसे बोया तो गया है, परन्तु उसमें अंकुरण की क्षमता नहीं है।

वचन में लिखा हुआ है कि “कर्म बिना विश्वास व्यर्थ है”। जो कर्म है वह विश्वास की गवाही है। व्यक्ति के विश्वास की अभिव्यक्ति उसके कर्म होना चाहिए।

हम अपने जीवनों में देखें कि हम कैसे कार्य करते हैं, क्या उन कार्यों का आधार हमारा विश्वास है? या फिर हमारा विश्वास तो है परन्तु हम उनके अनुरूप कार्य नहीं करते? यदि हमारे विश्वास की अभिव्यक्ति कार्यों से नहीं होती, तो ऐसा विश्वास सार्थक नहीं। हमें यह समझना है कि इस संसार के पार हमारा विश्वास और उसके अनुरूप कार्य ही हमारी अनन्त नियति का निर्धारण करते हैं।

प्रार्थना -परमेश्वर पिता, हमें ऐसी समझ दे कि हम अपने विश्वास को अपने कार्यों से प्रकट कर सकें जिसके द्वारा तेरी गवाही हमारे जीवनों से लोगों तक पहुंच सके। आमीन!