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क्या बच रहेगा ?

क्या बच रहेगा ?

सन्दर्भ:- 1 कुरिन्थियों 13:8-12

अक्सर बड़े वाहनों या ट्रक्स के पीछे कुछ कैप्शन्स लिखे रहते हैं । हो सकता है आपने कभी ध्यान दिया हो । ये कैप्शन्स कभी सामान्य होते हैं , कुछ व्यंग्यात्मक भी होते हैं । किसी ट्रक के पीछे लिखा होता है - बुरी नज़र वाले तेरा मुंह काला , किसी पर लिखा होता है - फिर मिलेंगे , चमचों से सावधान वगैरह । कभी-कभी कोई गम्भीर बात भी लिखी होती है , हालांकि उसे लिखने वाला लिखने वाला भी शायद उस मकसद से नहीं लिखता और पढ़ने वाले भी उसे गम्भीरता से नहीं लेते । अक्सर लिखा रहता है कि सोचो साथ क्या जाएगा ? वास्तव में हम इस पर विचार नहीं करते कि साथ क्या जाएगा ? क्या कभी वास्तव में हमने सोचा है कि साथ क्या जाएगा ? क्या कभी हमने यह सोचा है कि जीवन के बाद क्या बच रहेगा ? जब हमारी मृत्यु होगी तो हमारे साथ क्या बच रहेगा ? इस संसार से लेकर हम क्या जाएंगे ? आम धारणा यही है कि मनुष्य ख़ाली हाथ आता है और ख़ाली हाथ चला जाता है ।
इतिहास में सिकन्दर का नाम प्रमुखता से लिया जाता है । उसने 32 वर्ष की उम्र में आधे से ज़्यादा विश्व पर विजय प्राप्त कर ली थी । परन्तु एक बात और एलैक्ज़ेन्डर दि ग्रेट के विषय में याद रखी जाती है और वह यह कि जब सिकन्दर की मृत्यु 33 वर्ष की आयु में हो गई और उसका जनाज़ा निकला तो उसके दोनों हाथ अर्थी में से बाहर कर दिए गए थे । क्योंकि सिकन्दर की यह इच्छा थी कि ऐसा किया जाए ताकि लोग जान सकें कि सिकन्दर खाली हाथ इस संसार से जा रहा है । आधे से ज़्यादा विश्व पर विजय पताका फहराने के बाद सिकन्दर निश्चित रूप से खाली हाथ चला गया क्योंकि वह बिना प्रभु यीशु को जाने इस संसार से गया ।
बाइबिल में भी कुछ ऐसी आयतें हैं जिन्हें पढ़कर हम भी भ्रमित हो जाते हैं । 1 तीमुथियुस 6:7 में लिखा है क्योंकि न हम जगत में कुछ लाए हैं और न कुछ ले जा सकते हैं । यह बात इस सन्दर्भ में लिखी गई है कि सन्तोष सहित भक्ति बड़ी कमाई है । पौलुस लिखता है कि यदि हमारे पास खाने , पहनने के लिए वस्तुएं उपलब्ध हैं तो इसी में हमें सन्तोष करना चाहिए । इस आयत का अर्थ यह है कि भौतिक वस्तुओं को हम अपने साथ नहीं ले जा सकते ।
हम समझते हैं कि हम खाली हाथ चले जाएंगे क्योंकि अय्यूब 1:21 में लिखा है कि मैं अपनी मां के पेट से नंगा निकला और वहीं नंगा लौट जाऊंगा; यहोवा ने दिया और यहोवा ही ने लिया; यहोवा का नाम धन्य है ।
यह बात अय्यूब ने जब कही जब उसकी सारी सम्पत्ति , उसका सारा धन समाप्त हो गया । यह सन्दर्भ इंगित करता है कि भौतिक वस्तुएं लेकर हम इस संसार से नहीं जा सकेंगे ।
यदि हम बाइबिल का अध्ययन करें तो कुछ ऐसी बातें हैं जो हमारे साथ इस संसार से जाती हैं , जो मृत्यु के पार भी हमारे साथ जाती हैं । परन्तु उससे पहले कि हम इन बातों को देखें , हम यह भी देख लें कि क्या साथ नहीं जाता ।
1 कुरिन्थियों 13:8-12 में लिखा है - प्रेम कभी टलता नहीं; भविष्यद्वाणियां हों , तो समाप्त हो जाएंगी , भाषाएं हों तो जाती रहेंगी; ज्ञान हो , तो मिट जाएगा । क्योंकि हमारा ज्ञान अधूरा है , और हमारी भविष्यद्वाणी अधूरी । परन्तु जब सर्वसिद्ध आएगा , तो अधूरा मिट जाएगा । जब मैं बालक था , तो मैं बालकों की नाईं बोलता था , बालकों का सा मन था बालकों की सी समझ थी; परन्तु सियाना हो गया , तो बालकों की बातें छोड़ दी । अब हमें दर्पण में धुंधला सा दिखाई देता है; परन्तु उस समय आमने साम्हने देखेंगे , इस समय मेरा ज्ञान अधूरा है; परन्तु उस समय ऐसी पूरी रीति से पहिचानूंगा, जैसा मैं पहिचाना गया हूं ।
2 पतरस 3:10-12 में लिखा है -> परन्तु प्रभु का दिन चोर की नाईं आ जाएगा , उस दिन आकाश बड़ी हड़हड़ाहट के शब्द से जाता रहेगा , और तत्व बहुत ही तप्त होकर पिघल जाएंगे , और पृथ्वी और उस पर के काम जल जाऐंगे । तो जब कि ये सब वस्तुएं , इस रीति से पिघलनेवाली हैं , तो तुम्हें पवित्र चालचलन और भक्ति में कैसे मनुष्य होना चाहिए । और परमेश्वर के उस दिन की बाट किस रीति से जोहना चाहिए और उसके जल्द आने के लिये कैसा यत्न करना चाहिए; जिस के कारण आकाश आग से पिघल जाएंगे , और आकाश के गण बहुत ही तप्त होकर गल जाएंगे ।
जो बात यहां पर है वह यह कि जो तत्व है , जो भौतिक वस्तुएं हैं वे पिघल जाएंगी । पृथ्वी पर जो कुछ हमें दिखाई देता है , वह सब कुछ जल जाएगा जब प्रभु यीशु आएगा । यहां तक कि आकाश भी पिघल जाएगा और आकाश के तारागण तप्त होकर जल जाएंगे ।
प्रकाशित वाक्य 21:1 में लिखा है - फिर मैं ने नये आकाश और नयी पृथ्वी को देखा , क्योंकि पहिला आकाश और पहिली पृथ्वी जाती रही थी , और समुद्र भी न रहा । आकाश चला जाएगा , समुद्र चला जाएगा , पृथ्वी चली जाएगी । तत्व चला जाएगा , भाषाएं चली जाएंगी , ज्ञान मिट जाएगा , भविष्यवाणियां मिट जाएंगी ।
भजन संहिता 37:35-36 में लिखा है - मैं ने दुष्ट को बड़ा पराक्रमी और ऐसा फैलता हुए देखा , जैसा कोई हरा पेड़ अपनी निज भूमि में फैलता है । परन्तु जब कोई उधर से गया तो देखा कि वह वहां है ही नहीं; और मैं ने भी उसे ढूंढ़ा , परन्तु कहीं न पाया ।
दुष्ट नहीं बचेगा , उसका पराक्रम समाप्त हो जाएगा । उसका राजपाट चला जाएगा । ये सब बातें तो जाने वाली हैं , हमारा शरीर मिट्टी में मिल जाने वाला है तो बचेगा क्या ? हम ऐसी तीन बातों पर ग़ौर करें जो हमारे साथ जाएंगी , जो मृत्यु के बाद बच रहेंगी । बाइबिल के आधार पर हम इन बातों को देखें कि साथ क्या जाएगा ?
1. हमारे कार्य हमारे साथ जाएंगे:- प्रकाशित वाक्य 14:13 में लिखा है -
हमारे कार्य इस संसार के बाद हमारे साथ हो लेते हैं ।
याकूब 2:14-15, 26 में लिखा है - हे मेरे भाइयो , यदि कोई कहे कि मुझे विश्वास है पर वह कर्म न करता हो , तो उस से क्या लाभ ? क्या ऐसा विश्वास कभी उसका उद्धार कर सकता है ? यदि कोई भाई या बहिन नंगे उघाड़े हों , और उन्हें प्रति दिन भोजन की घटी हो । निदान , जैसे देह आत्मा बिना मरी हुई है वैसा ही विश्वास भी कर्म बिना मरा हुआ है ।
हमारे विश्वास की अभिव्यक्ति हमारे कार्य हैं । इसलिए ये कार्य हमारे लिए प्रमुख हैं ।
सो हे मेरे प्रिय भाइयो , दृढ़ और अटल रहो , और प्रभु के काम में सर्वदा बढ़ते जाओ , क्योंकि यह जानते हो , कि तुम्हारा परिश्रम प्रभु में व्यर्थ नहीं है । (1 कुरिन्थियों 15:58)
धोखा न खाओ , परमेश्वर ठट्ठों में नहीं उड़ाया जाता , क्योंकि मनुष्य जो कुछ बोता है , वही काटेगा । क्योंकि जो अपने शरीर के लिये बोता है , वह शरीर के द्वारा विनाश की कटनी काटेगा; और जो आत्मा के लिये बोता है , वह आत्मा के द्वारा अनन्त जीवन की कटनी काटेगा । (गलतियों 6:7-8)
हमारे कार्य जो हम करते हैं , वे बीज बोने के समान हैं । यदि हम अपने शरीर के लिए बोते हैं तो हम विनाश की कटनी काटेंगे और यदि हम आत्मा के लिए बोते हैं तो अनन्त जीवन की कटनी काटेंगे ।
मत्ती 25:35-36 में प्रभु यीशु कहते हैं - क्योंकि मैं भूखा था , और तुम ने मुझे खाने को दिया; मैं पियासा था , और तुम ने मुझे पानी पिलाया , मैं परदेशी था , तुम ने मुझे अपने घर में ठहराया । मैं नंगा था , तुम ने मुझे कपड़े पहिनाए; मैं बीमार था , तुम ने मेरी सुधि ली , मैं बन्दीगृह में था , तुम मुझ से मिलने आए ।
यहां प्रभु यीशु मसीह यह कह रहे हैं कि क्योंकि तुमने ये महान कार्य किए हैं , तुमने भोजन खिलाया है , पानी पिलाया है , घर में ठहराया है , वस्त्र पहनाए हैं , मेरी सुधि ली है , मुझसे मिलने आए हो , मुझे प्रोत्साहित किया है; इसलिए तुम धन्य लोग हो , तुम परमेश्वर के राज्य के अधिकारी होने के योग्य हो । लिखा है कि तब परमेश्वर ऐसे लोगों को एक तरफ कर देगा । भेड़ों और बकरियों को अलग-अलग किया जाएगा । भेड़ें बच जाएंगी और बकरियां नाश हो जाएंगी । हमारे कार्यों का हमारे उद्धार से कहीं न कहीं जुड़ाव है ।
लूका 17:10 में लिखा है कि इसी रीति से तुम भी , जब उन सब कामों को कर चुको जिस की आज्ञा तुम्हें दी गई थी , तो कहो , हम निकम्मे दास हैं; कि जो हमें करना चाहिए था वही किया है ।
प्रभु यीशु कहते हैं कि तुमसे जितना करने को कहा गया , यदि उतना ही किया तो तुम निकम्मे दास ठहरे । तुमने स्वर्ग में कुछ जमा नहीं किया । तुमने परमेश्वर के लिए कुछ नहीं किया । यदि तुमने उतना ही किया जितनी तुमसे अपेक्षा थी तो इसका अर्थ यह है कि तुम में समर्पण नहीं था , लगन और परिश्रम नहीं था और तुम निकम्मे दास ठहरे । इसलिए काम इस कारण मत करो कि अपने अधिकारीयों को प्रसन्न रखना है । तुम्हारे कार्य मृत्यु के बाद तुम्हारे साथ जाएंगे । इसलिए अपने कार्य को पैसों की दृष्टि से मत देखो , अपने अधिकारी को खुश रखने की दृष्टि से मत देखो । अपने वेतन से उसका आंकलन मत करो । कार्य इसलिए करो क्योंकि तुम्हारे कार्य तुम्हारे साथ जाएंगे ।
2. हमारे मुख के वचन हमारे साथ जाएंगे:- हमने जो कार्य किया केवल वही नहीं परन्तु जो कुछ हमने कहा वह भी हमारे साथ जाएगा । मत्ती 12:36-37 में प्रभु यीशु कहते हैं कि मै तुम से कहता हूं कि जो जो निकम्मी बातें मनुष्य कहेंगे , न्याय के दिन हर एक बात का लेखा देंगे । क्योंकि तू अपनी बातों के कारण निर्दोष और अपनी बातों ही के कारण दोषी ठहराया जाएगा ।
यहां प्रभु यीशु के इस कथन में यह बात बिल्कुल स्पष्ट है कि परमेश्वर जिस बात से क्रोधित होता है और जिस बात के कारण वह लोगों को नाश करता है , वह उनका बड़बड़ाना , चिड़चिड़ाना , कुड़कुड़ाना और नकारात्मक कथन है ।
फिर वे लोग बुड़बुड़ाने और यहोवा के सुनते बुरा कहने लगे; निदान यहोवा ने सुना , और उसका कोप भड़क उठा , और यहोवा की आग उनके मध्य जल उठी , और छावनी को एक किनारे से भस्म करने लगी । (गिनती 11:1)
यह बुरी मण्डली मुझ पर बुड़बुड़ाती रहती है , उसको मैं कब तक सहता रहूं ? इस्त्राएली जो मुझ पर बुड़बुड़ाते रहते हैं , उनका यह बुड़बुड़ाना मैं ने तो सुना है । सो उन से कह , कि यहोवा की यह वाणी है , कि मेरे जीवन की शपथ जो बातें तुम ने मेरे सुनते कही हैं , निःसन्देह मैं उसी के अनुसार तुम्हारे साथ व्यवहार करूंगा । तुम्हारी लोथें इसी जंगल में पड़ी रहेंगी; और तुम सब में से बीस वर्ष की वा उस से अधिक अवस्था के जितने गिने गए थे , और मुझ पर बुड़बुड़ाते थे , उस में से यपुन्ने के पुत्र कालिब और नून के पुत्र यहोशू को छोड़ कोई भी उस देश में न जाने पाएगा , जिसके विषय मैं ने शपथ खाई है कि तुम को उस में बसाऊंगा । (गिनती 14:27-30)
परमेश्वर मूसा से कहता है कि यह मण्डली हर समय बड़बड़ाती रहती है , कुड़कुड़ाती रहती है और इसलिए इनसे कह दे कि इन पर परमेश्वर का कोप भड़का है और वे प्रतिज्ञा किए हुए देश में जा नहीं पाएंगे ।
हमारा भी प्रतिज्ञा किया हुआ देश आने वाला है। हमसे भी परमेश्वर ने स्वर्गीय राज्य की प्रतिज्ञा की है । अभी तो इस संसार में हम लाल समुद्र से , यर्दन से , मरूस्थल और बियाबान से होकर गुज़र रहे हैं । कितने ऐसे लोग हैं जो बड़बड़ाने , कुड़कुड़ाने और बकबक करने के कारण उस प्रतिज्ञा किए हुए देश में नहीं पहुंच पाएंगे क्योंकि इन बातों के कारण परमेश्वर का क्रोध भड़कता है ।
गिनती 21:5-6 में लिखा है - सो वे परमेश्वर के विरुद्ध बात करने लगे , और मूसा से कहा , तुम लोग हम को मिस्र से जंगल में मरने के लिये क्यों ले आए हो ? यहां न तो रोटी है , और न पानी , और हमारे प्राण इस निकम्मी रोटी से दुखित हैं । सो यहोवा ने उन लोगों में तेज़ विषवाले सांप भेजे , जो उनको डसने लगे , और बहुत से इस्त्राएली मर गए ।
परमेश्वर के विरुद्ध जो भी बातें हम करते हैं उनसे परमेश्वर का क्रोध भड़कता है । मुख के वचनों के सम्बन्ध में एक बात और वचन में लिखी है । क्या तुम नहीं जानते , कि अन्यायी लोग परमेश्वर के राज्य के वारिस न होंगे ? धोखा न खाओ , न वेश्यागामी , न मूर्तिपूजक , न परस्त्रीगामी , न लुच्चे , न पुरुषगामी । न चोर , न लोभी , न पियक्कड़ , न गाली देनेवाले , न अन्धेर करनेवाले परमेश्वर के राज्य के वारिस होंगे । (1 कुरिन्थियों 6:9-10)
इस सन्दर्भ में दो बातें हैं जिनमें व्यक्तियों के शब्द जुड़े हैं । पहला , अन्यायी , वे जो पक्षपात करने वाले लोग हैं । दूसरा , गाली देने वाले लोग । परमेश्वर कहता है कि धोखा न खाओ , ऐसे लोग परमेश्वर के राज्य के वारिस नहीं हो सकते । इसलिए हमें समझना है कि हर एक निकम्मी बात का हमें लेखा देना है । हमारी हर एक बातचीत हमारे साथ जाएगी क्योंकि हम अपनी ही बातों के कारण धर्मी और अपनी ही बातों के कारण अधर्मी ठहराए जाते हैं ।
3. प्रभु यीशु के प्रति हमारा विश्वास हमारे साथ जाएगा:- हम कुछ लोगों को अविश्वासी कहते हैं , कुछ लोगों को अनीश्वरवादी कहते हैं । परन्तु वे लोग भी तो विश्वास करते हैं । यदि कोई यह कहता है कि मैं ईश्वर पर विश्वास नहीं करता तो इसका अर्थ यह है कि वह इस बात पर विश्वास करता है कि ईश्वर नहीं है । अगर कोई कहता है कि मैं यह नहीं मानता कि प्रभु यीशु जगत का उद्धारकर्ता है , केवल उसी के द्वारा उद्धार सम्भव है , तो इसका अर्थ यह है कि वह इस बात पर विश्वास करता है कि उद्धार पाने के लिए दूसरे रास्ते भी हैं ।
इस कारण जो बात है वह यह कि प्रभु यीशु मसीह पर हमारा विश्वास हमारे लिए निर्णायक होगा ।
यूहन्ना 3:15 में प्रभु यीशु कहते हैं - ताकि जो कोई विश्वास करे उस में अनन्त जीवन पाए ।
जो पुत्र पर विश्वास करता है , अनन्त जीवन उसका है; परन्तु जो पुत्र की नहीं मानता , वह जीवन को नहीं देखेगा , परन्तु परमेश्वर का क्रोध उस पर रहता है । (यूहन्ना 3:36)
मैं तुम से सच सच कहता हूं , जो मेरा वचन सुनकर मेरे भेजनेवाले की प्रतीति करता है , अनन्त जीवन उसका है , और उस पर दण्ड की आज्ञा नहीं होती परन्तु वह मृत्यु से पार होकर जीवन में प्रवेश कर चुका है । (यूहन्ना 5:24)
यीशु ने उस से कहा , पुनरुत्थान और जीवन मैं ही हूं , जो कोई मुझ पर विश्वास करता है वह यदि मर भी जाए , तौभी जीएगा । (यूहन्ना 11:25)
प्रभु यीशु कहते हैं कि जो मुझ पर विश्वास करता है वह मृत्यु के पार होकर जीवन में प्रवेश कर चुका । अभी मृत्यु का जो पुल है , उस पर से होकर हम निकल जाएंगे क्योंकि जो प्रभु यीशु को अपना उद्धारकर्ता मानते हैं , वे अनन्त जीवन में प्रवेश कर चुके ।
केवल प्रभु यीशु है जो हमें बचाने के लिए आया । केवल उसके निर्दोष लोहू के द्वारा परमेश्वर के साथ हमारा मेल-मिलाप हुआ । केवल प्रभु यीशु का वह निर्दोष लोहू है जिससे हम ख़रीदे गए हैं । केवल प्रभु यीशु है , जिसके निर्दोष लोहू से हमारी आत्मा पर अनन्त जीवन की मोहर लगा दी गई है । यह प्रभु यीशु मुझे और आपको बचाने के लिए आया है ।
इंग्लैण्ड की एक सच्ची घटना है । दो वर्ष का एक अनाथ बालक था जो अपनी दादी के साथ रहता था । एक रात जब वह अपनी दादी के साथ घर में दूसरी मंज़िल पर सो रहा था , घर में आग लग गई । आग की लपटें बढ़ती गईं । दादी आग में जल गई और वह बच्चा रोता रहा , चिल्लाता रहा , तड़पता रहा । तब एक आदमी वहां से गुज़रा जो उस घर के पास रहता था । यह व्यक्ति उस बच्चे से बहुत प्रेम करता था । जब उसने बच्चे की पुकार को सुना तो उसे बचाने के लिए वह लोहे की एक रेलिंग को पकड़कर उसके सहारे दूसरी मंज़िल तक पहुंच गया । वह लोहे की रेलिंग इतनी गर्म हो गई थी कि उस व्यक्ति की दोनों हथेलियां जल गईं। इस व्यक्ति ने उस बच्चे को अपनी बांहों में दबाया और उस तपती हुई रेलिंग को पकड़कर जली हुई हथेलियों के साथ उस बच्चे को बचाकर वहां से बाहर आ गया ।
दूसरे दिन इंग्लैण्ड के उस कस्बे के कोर्ट में उस बच्चे को लेकर जज खड़ा होता है । वह पूछता है कि कौन इस अनाथ बच्चे को गोद लेना चाहेगा ? क्योंकि इसकी दादी की मृत्यु हो गई है और अब इसका कोई नहीं है । एक धनवान व्यक्ति वहां आता है और कहता है - मेरे पास बहुत धन है । मैं इस बच्चे को बहुत कुछ दे सकता हूं । मैं इसकी बहुत अच्छी परवरिश कर सकता हूं । यह बच्चा मुझे दे दिया जाए । एक शिक्षक आता है , जो कहता है कि मैं इस बच्चे को बहुत ऊंची शिक्षा दिलाना चाहता हूं , यह बच्चा मुझे दे दिया जाए । एक किसान आता है और कहता है कि मेरे पास कोई सन्तान नहीं है , मैं इस बच्चे को गोद लेना चाहता हूं । मैं इसे एक कुशल किसान बनाऊंगा; फिर वहां एक चिकित्सक आता है , वह कहता है कि मैं इस बच्चे को चिकित्सा सिखाऊंगा । यह दूसरों का उपचार करेगा । इसका जीवन दूसरों के लिए आशीष का कारण होगा । इसलिए इस बच्चे को गोद लेने का हकदार मैं हूं । अन्त में , एक अजनबी वहां आता है जिसके कपड़े फटे और जले हुए हैं , वह कहता है कि मैं इस बच्चे को ले जाने का हकदार हूं क्योंकि मैंने ही इसे बचाया है । मेरे पास न तो बड़ी डिग्री हैं , न ही किसी बैंक की पासबुक का प्रमाण है परन्तु मेरे जले हुए हाथ इस बात का प्रमाण हैं कि मैंने इस बच्चे को बचाया है । इसलिए यह मेरा है । तब उन जले हुए हाथों को देखकर , इस व्यक्ति के उस बच्चे के प्रति प्रेम को देखकर , जज उस बच्चे को उस व्यक्ति के हाथों में सौंप देता है ।
यह संसार हमें धन , पद , ऊंची शिक्षा और अच्छे व्यवसाय का आकर्षक प्रलोभन देता है परन्तु इस आकाश के नीचे और पृथ्वी के ऊपर प्रभु यीशु के अलावा दूसरा और कोई नहीं है जो हमें बचाने आया हो , जिसने हमारे लिए अपना प्राण दिया हो ।
मेरे एक मित्र जो अमेरिका से आए हुए थे । मुझसे कहने लगे कि मेरी इच्छा है कि मेरे मरने के बाद मेरी क़ब्र पर यह आयत लिखी जाए - इसलिये हम ढाढ़स बान्धे रहते हैं , और देह से अलग होकर प्रभु के साथ रहना और भी उत्तम समझते हैं । (2 कुरिन्थियों 5:8)
प्रभु यीशु पर हमारा विश्वास ही है जो हमारे कार्यों , हमारे मुख के वचनों के प्रभाव को बदल देता है । हमारी मृत्यु के स्वरूप को बदल देता है ।
एक पासबान अपने परिवार के साथ गल्फ ऑफ मैक्सिको घूमने गए । यह समुद्र की खाड़ी है और यहां पर एक खास बात यह है कि जब सूर्य उदय होता है तो बहुत खू़बसूरत दृश्य दिखाई देता है । यही नहीं सूर्यास्त का दृश्य भी बहुत ख़ूबसूरत होता है । यह पासबान इस स्थान पर सूर्योदय और सूर्यास्त देखने के लिए नौका में अपने परिवार के साथ पहुंचे । उन्होंने उस दिन सूर्योदय देखा और बहुत सारी तस्वीरें कैमरे में उतारीं । उसी दिन शाम को उन्होंने सूर्यास्त देखा और बहुत सारी खूबसूरत तस्वीरें फिर से अपने कैमरे में उतारीं । चार दिन बाद जब वह अपने घर लौटकर आए और उन तस्वीरों को डेव्लप कराया तो चकित रह गए । उन्होंने अपनी पत्नी को बुलाया और उससे कहा - ये तस्वीरें तो बहुत खूबसूरत हैं परन्तु यह समझ में नहीं आ रहा कि इनमें कौन सा चित्र सूर्योदय का है और कौन सा चित्र सूर्यास्त का ।
किसी विश्वासी के लिए मृत्यु भी ऐसी ही है । संसार की दृष्टि में तो मृत्यु अन्त है , जीवन का समापन है , सम्बन्धों का अन्त है , दुखद है , निराशापूर्ण है; सूर्यास्त है । परन्तु एक विश्वासी के लिए मृत्यु मिलन की बात है , सूर्योदय है , नया प्रारम्भ है , नया देश है , नया संसार है , नए सम्बन्ध हैं , नई पृथ्वी , नया आकाश है । मृत्यु सूर्यास्त नहीं बल्कि सूर्योदय है क्योंकि प्रभु यीशु पर हमारा विश्वासी मृत्यु के चित्र को भी बदल देता है ।
अन्त की बात यह है कि तीन बातें हमारे साथ मृत्यु के उस पार जाएंगी; हमारे कार्य , हमारी बातचीत और हमारा विश्वासी ।
इसलिए हमारे कार्य ऐसे हों जिनसे प्रभु प्रसन्न हो । हमारे कार्य ऐसे हों जिनमें समर्पण हो, ईमानदारी, सच्चाई , लगन और परिश्रम हो । हमारे कार्य ऐसे हों जिन्हें हम अपने स्वार्थ से ऊपर उठकर दूसरों के लाभ के लिए कर रहे हों क्योंकि ये कार्य हमारे साथ जाएंगे ।
हमारी बातचीत ऐसी हो जिसमें अशब्द , कुड़कुड़ाना , बड़बड़ाना और नकारात्मक बातें न हों । वचन में लिखा है कि ऐसे बोलो जैसे परमेश्वर का वचन बोल रहा हो । ऐसी बातें जिनसे दूसरों का लाभ हो , जिससे लोग प्रोत्साहित हों , जिनसे लोगों के जीवन आशीषित हों ।
हमारा विश्वास कार्य सहित होना चाहिए , जिसमें प्रभु यीशु की शोभा दिखाई दे ।
अन्त में , जब हम इस संसार से जाएं , पृथ्वी पर हमारी जीवन यात्रा का समापन हो तो उस पार हम प्रभु यीशु की आवाज़ को सुन सकें कि हे मेरे विश्वास योग्य दास आ और अपने स्वामी के इस संसार में अधिकारी हो जा।

परमेश्वर आपको आशीष दे।