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परमेश्वर का भवन और उसके निर्देश

परमेश्वर का भवन और उसके निर्देश

सन्दर्भ:- हाग्गै 1:7-11

परमेश्वर के भवन के निर्माण के सम्बन्ध में बाइबिल में बहुत से सन्दर्भ पाए जाते हैं । विभिन्न परिप्रेक्ष्य में परमेश्वर के भवन के सम्बन्ध में वचन अलग-अलग प्रकार से हमें प्रोत्साहित करता है । पुराना नियम में हाग्गै की पुस्तक के पहले दो अध्यायों में परमेश्वर का वचन कलीसिया भवन के निर्माण के विषय में हमें कुछ बातों को बताता है । इन्हीं अध्यायों को लेकर कुछ बातों पर हम विचार करेंगे ।
हाग्गै 1:2 में भविष्यवक्ता परमेश्वर के सन्देश को लेकर आता है , जहां परमेश्वर यह कहता है कि सेनाओं का यहोवा यों कहता है , ये लोग कहते हैं कि यहोवा का भवन बनाने का समय नहीं आया है ।
उसके आगे चौथे पद में लिखा हुआ है कि क्या तुम्हारे लिये अपने छत वाले घरों में रहने का समय है , जब कि यह भवन उजाड़ पड़ा है ?
अक्सर यह बात सामने आती है कि जब कभी भी कलीसिया भवन के सुधार , पुर्ननिर्माण या नवनिर्माण की बात की जाती है , लोग कहते हैं कि अभी भवन बनाने का समय नहीं आया है । परन्तु यहोवा की यह वाणी है कि जब मेरा भवन उजाड़ पड़ा है तब क्या यह उचित है कि तुम अपने छत वाले घरों में आराम से रहो ?
यदि आपकी कलीसिया में यह स्थिति है तो इस बात का अहसास करने का समय है कि इस कार्य में हम और ढील न डालें । परमेश्वर हमसे यही कहता है कि यह मत कहो कि मेरा भवन बनाने का समय अभी नहीं आया । साधनों , संसाधनों , स्रोतों या शासन के आदेशों का बहाना बनाकर ठहरे मत रहो । क्या यह उचित है कि मेरा भवन उजाड़ पड़ा और तुम अपने घरों में छतों के नीचे आराम से रहते हो ?
इसी सन्दर्भ में हम चार बातों पर ध्यान दें ।
1. हम अपनी कमज़ोरियों और ग़लतियों की ओर देखें:- हाग्गै 1:5 में लिखा है - इसलिये अब सेनाओं का यहोवा यों कहता है , अपनी अपनी चाल-चलन पर ध्यान करो । उसके आगे सातवें पद में परमेश्वर कहता है - सेनाओ का यहोवा तुम से यों कहता है , अपने अपने चाल-चलन पर सोचो ।
अब दूसरों की ग़लतियां निकालने का समय जाता रहा , दूसरों पर उंगलियां उठाने का समय जाता रहा । अब दूसरों की आलोचना करने की बात नहीं बल्कि हमें अपने आपको देखना है , अपने चाल-चलन पर ध्यान देना है ।
वर्तमान परिप्रेक्ष्य में यदि हम देखें तो हमारे परिवारों में , समाज में , नगर में बहुत सी कमज़ोरियां हो सकती हैं । परिवारों और समाज में उत्पन्न हुई कमियों के लिए शायद माता-पिता और कलीसिया के अगुवों के रूप में हम काफी हद तक ज़िम्मेदार हैं । परन्तु हम इस बात को स्वीकार नहीं करना चाहते । हम कहते हैं कि क्या करें मोहल्ले का वातावरण ख़राब हो गया है । बच्चों को कहीं बाहर पढ़ाने के लिए भेजना ज़रूरी हो गया है क्योंकि हमारे आसपास का वातावरण ठीक नहीं है । ऐसे लोग हमारे आस-पास आने लगे हैं जो बच्चों को ग़लत संगति में जाने के लिए प्रेरित करते हैं , उन्हें बहकाते हैं और सम्भावना है कि हमारे बच्चे बहककर विजातीय विवाह भी कर लें । परन्तु परमेश्वर हमसे कहता है कि तुम अपने चाल-चलन को देखो! क्या तुम्हारे माता-पिता ने तुम्हें इसलिए जीवन में आगे बढ़ाया था कि तुम शैतानी शक्तियों को घर में आने दो ? क्या तुम्हारे माता-पिता ने तुम्हें इसलिए आगे बढ़ाया कि तुम अपने बच्चों की ग़लतियों में उनका साथ दो और उनकी ग़लतियों को ढांपो ? ऐसे समयों में अक्सर पालकों के रूप में हम अपनी ज़िम्मेदारियों को स्वीकार नहीं करते । ऐसी परिस्थितियों में हमारे लिए आसान होता है कि हम कलीसिया को दोष दें । चर्च के अगुवों पर उंगलियां उठाना हमारे लिए बहुत आसान हो जाता है । परन्तु हमें यह बात समझनी है कि हम जो मसीही माता-पिता हैं , हमारे बच्चे हमारे साथ ज़्यादा समय बिताते हैं । कलीसिया की आराधना में तो वे सप्ताह भर में अधिक से अधिक दो या तीन घण्टे रहते हैं । बाकी समय , किसकी ज़िम्मेदारी है ? इस ज़िम्मेदारी को पूरा करने के लिए ही परमेश्वर ने हमें माता-पिता के रूप में ठहराया है । परिवार की सीमाएं किसने निर्धारित की हैं ? परमेश्वर ने! और परमेश्वर ने हमें इसलिए ठहराया है कि हम अपने परिवार का उचित मार्गदर्शन परमेश्वर की योजना के अनुसार करें । उससे भी पहले , माता-पिता , दादा-दादी , नाना-नानी के रूप में हमें अपने चाल-चलन को देखना है ।
हम अपने बच्चों से अपेक्षा तो बहुत कुछ करते हैं परन्तु जब हमारे बच्चे हमारे जीवनों में हमारी कथनी और करनी में अन्तर देखते हैं , जब वे देखते हैं कि हम कहते कुछ हैं और करते कुछ हैं तो हमारी बातों और हमारी शिक्षाओं का कोई प्रभाव बच्चों के जीवन पर नहीं पड़ता ।
कलीसिया के अगुवों के रूप में हम कितना भी अच्छा प्रचार करें परन्तु यदि हमारे जीवन में लोगों को कपट दिखाई दे तो हमारे प्रचार का कोई प्रभाव नहीं होगा । जवान बहक जाएंगे और कलीसिया टूट जाएगी ।
इसलिए परमेश्वर कहता है कि अपने-अपने चाल-चलन पर ध्यान करो , अपनी-अपनी ज़िम्मेदारियों को देखो , अपने-अपने घरों में झांककर देखो । यह चुनौती हमारे सामने है कि हम इन बातों को गम्भीरता से लें और अपने बच्चों को परमेश्वर की व्यवस्था की बातें सिखाएं । समय आ गया है कि हम कुछ सीमाएं निर्धारित करें जिनके बाहर हमारे बच्चे न जाने पाएं , हमारी कलीसिया न जाए । हमें ध्यान रखना है कि यदि हम परमेश्वर द्वारा निर्धारित सीमाओं का दायरा पार करते हैं तो परमेश्वर हमें दण्ड देता है । परमेश्वर का वचन स्पष्ट रूप से कहता है - क्या तुम नहीं जानते , कि तुम परमेश्वर का मन्दिर हो , और परमेश्वर का आत्मा तुम में वास करता है ? (1 कुरिन्थियों 3:16)
क्या तुम नहीं जानते , कि तुम्हारी देह पवित्रात्मा का मन्दिर है; जो तुम में बसा हुआ है और तुम्हें परमेश्वर की ओर से मिला है , और तुम अपने नहीं हो ? (1 कुरिन्थियों 6:19)
हमारे लिए दूसरों पर दोष लगाना बहुत आसान होता है । यह बात आदम और हव्वा के समय से चली आ रही है क्योंकि यही मानवीय स्वभाव है ।
न्यायियों 13:1 में लिखा है - और इस्राएलियों ने फिर यहोवा की दृष्टि में बुरा किया; इसलिये यहोवा ने उनको पलिश्तियों के वश में चालीस वर्ष के लिये रखा ।
गिनती 14:11-12 में लिखा है - तब यहोवा ने मूसा से कहा , वे लोग कब तक मेरा तिरस्कार करते रहेंगे ? और मेरे सब आश्चर्यकर्म देखने पर भी कब तक मुझ पर विश्वास न करेंगे ? मैं उन्हें मरी से मारूंगा , और उनके निज भाग से उन्हें निकाल दूंगा , और तुझ से एक जाति उपजाऊंगा जो उन से बड़ी और बलवन्त होगी ।
गिनती 21:6-7 में लिखा है - सो यहोवा ने उन लोगों में तेज विषवाले सांप भेजे , जो उनको डसने लगे , और बहुत से इस्त्राएली मर गए । तब लोग मूसा के पास जाकर कहने लगे , हम ने पाप किया है , कि हम ने यहोवा के और तेरे विरुद्ध बातें की हैं; यहोवा से प्रार्थना कर , कि वह सांपों को हम से दूर करे । तब मूसा ने उनके लिये प्रार्थना की ।
इस्राएलियों ने परमेश्वर की आज्ञाओं का उल्लंघन करके अपनी मन-मर्ज़ी से कार्य किया , जिससे परमेश्वर क्रोधित हुआ और उसने उनके बीच में सांप भेजे जो लोगों को डसने लगे और बहुत से इस्राएली मर गए ।
हमारे लिए यह बहुत ज़रूरी बात है कि हम पहले अपने-अपने चाल-चलन को देखें ।
2. हम अपनी प्राथमिकताओं को देखें:- परमेश्वर का वचन कहता है कि - फिर यहोवा का यह वचन हाग्गै भविष्यद्वक्ता के द्वारा पहुंचा । क्या तुम्हारे लिये अपने छतवाले घरों में रहने का समय है , जब कि यह भवन उजाड़ पड़ा है ? (हाग्गै 1:3-4)
यह बहुत अच्छी बात है कि हम अच्छी तरह से जीवन बिता रहे हैं , हमारी तनख़्वाह अच्छी है । अच्छी बात है कि हम तरक्की कर रहे हैं , साइकिल से मोटर-साइकिल और उसके आगे कार खरीदने तक का सफर हमने तय कर लिया है । यह अच्छी बात है कि हमने अपने रहने के लिए अच्छे भवन बना लिए हैं । परन्तु परमेश्वर हमसे कहता है कि तुमने मेरे लिए क्या किया ? मेरा यह भवन उजाड़ पड़ा है । तुम तो चैन से अपने घर में खाते-पीते , सोते , उठते-बैठते हो , पर मेरा भवन उजाड़ पड़ा है । मेरा आराधना भवन उस तरह सज्जित नहीं जैसा होना चाहिए और इसके लिए चर्च काउन्सिल पर , कलीसिया के अगुवों पर सारा दोष मढ़ना ठीक नहीं । परमेश्वर कहता है कि क्या तुमने कभी घुटनों पर जाकर प्रार्थना की ? जो लोग बहक रहे हैं , कलीसिया से अलग हो रहे हैं , कलीसिया को विभाजित करने का प्रयास कर रहे हैं; क्या कभी उन्हें समझाने का प्रयास किया ?
इस कलीसिया के लिए प्रभु यीशु ने अपना प्राण दिया है । इस कलीसिया की एकता के लिए हमें कुछ भी करना पड़े , हमें अपने अहम को तोड़ना पड़े , अपनी व्यक्तिगत मान्यताओं को बदलना पड़े , यदि हमारी कलीसिया के लिए हमें झुकना भी पड़े तो हम तैयार हैं! क्या यह भावना हम में है ?
3. परमेश्वर कहता है कि मेरी सामर्थ्य को स्मरण रखो:- अक्सर हम कलीसिया के विकास के कामों या कलीसिया के भवन के निर्माण में आगे बढ़ने से पहले बहाने बनाने लगते हैं । हम देखने लगते हैं कि किसका शासन है , कौन सी पार्टी हमें इस कार्य को करने से रोक सकती है! हम देखने लगते हैं शासकीय अधिकारियों की ओर कि कहीं वे कोई अड़ंगा न लगा दें परन्तु परमेश्वर कलीसिया भवन के निर्माण के विषय में हमसे प्रतिज्ञा करता है । इस प्रतिज्ञा को पूरी करने के लिए वह चाहता है कि हम आगे बढ़ें ।
हाग्गै 2:9,21 में परमेश्वर कहता है - इस भवन की पिछली महिमा इसकी पहिली महिमा से बड़ी होगी , सेनाओं के यहोवा का यही वचन है , और इस स्थान में मैं शान्ति दूंगा , सेनाओं के यहोवा की यही वाणी है। मैं आकाश और पृथ्वी दोनों को कम्पाऊंगा ।
परमेश्वर हमसे कहता है कि यह क्यों भूल जाते हो कि तुम्हारी सामर्थ्य से परे मैं हूं । मेरी सामर्थ्य और मुझ पर विश्वास करो । मेरे लिए आगे बढ़ो , मेरे लिए कुछ करने के लिए चलो; मैं तुम्हारे साथ हूं । तुम्हारी शक्ति , तुम्हारी क्षमता , तुम्हारी समझ और तुम्हारी सामर्थ्य से कहीं ज़्यादा मैं करने वाला हूं । मैं इन घोड़ों को तोड़ने वाला हूं , इन रथों को पलटने वाला हूं , इन राज्यों को पलटने वाला हूं । सरकारें मेरे नाम से कांपती हैं , मैं तो यहोवा हूं । सारी सृष्टि मेरी है । मेरे हाथ में नियंत्रण है । तुम आगे तो बढ़ो ।
हमें इसी विश्वास से आगे बढ़ना है कि कलीसिया प्रभु यीशु मसीह की देह है । हमारी अगुवाई के लिए पवित्र आत्मा हमारे साथ है । परमेश्वर और प्रभु यीशु मसीह का हाथ हमारे साथ है ।
4. परमेश्वर कहता है मेरे न्याय को स्मरण रखो:- हाग्गै 1:9 में परमेश्वर कहता है - तुम ने बहुत उपज की आशा रखी , परन्तु देखो थोड़ी ही है; और जब तुम उसे घर ले आए , तब मैं ने उसको उड़ा दिया । सेनाओं के यहोवा की यह वाणी है , ऐसा क्यों हुआ ? क्या इसलिये नहीं , कि मेरा भवन उजाड़ पड़ा है और तुम में से प्रत्येक अपने अपने घर को दौड़ा चला जाता है ?
ऐसा हुआ कि तुमने पिछले सालों में उपज की आशा रखी परन्तु फसल थोड़ी हुई । आशा ज़्यादा रखी और फसल कम । परिश्रम ज़्यादा किया परन्तु मिला बहुत कम । क्योंकि मंहगाई बढ़ गई , जो सामान कुछ सालों पहले सस्ता था आज वह महंगा होता जा रहा है ।
यह सब क्यों हुआ , ऐसा क्यों हुआ ? परमेश्वर कहता है कि क्या इसलिए नहीं कि मेरा भवन उजाड़ पड़ा है ? और तुम में से हर कोई अपने-अपने घर को दौड़ा चला जाता है । हम में से कितने हैं जिन्होंने यहां पर आकर प्रार्थना की । तुम तो अपने घर की ओर दौड़े चले जाते हो । अपने पेट की चिन्ता है , रोटी की चिन्ता है , रोजगार की चिन्ता है परन्तु परमेश्वर का भवन उजाड़ पड़ा है ।
हाग्गै 1:11 में लिखा है - और मेरी आज्ञा से पृथ्वी और पहाड़ों पर , और अन्न और नये दाखमधु पर और ताज़े तेल पर , और जो कुछ भूमि से उपजता है उस पर , और मनुष्यों और घरेलू पशुओं पर और उनके परिश्रम की सारी कमाई पर भी अकाल पड़ा है ।
परमेश्वर से हम बच नहीं सकते । अगर यह बात हमें समझ में आ गई तो बहुत सी बातें सही हो जाएंगी । प्राथमिकताएं भी सही हो जाएंगी और ग़लतियां भी सुधर जाएंगी ।
परमेश्वर का भवन हमें बनाना है और यह याद रखना है कि जब हमारा पृथ्वी पर डेरा सरीखा घर गिराया जाएगा तो हमें परमेश्वर की ओर से स्वर्ग में ऐसा भवन मिलेगा जो हाथों से बना हुआ नहीं परन्तु चिरस्थाई है।
क्या मुझे और आपको इस बात की निश्चितता है कि हम उस घर में प्रवेश कर सकते हैं ? यदि हमें इस बात की निश्चितता है तो परमेश्वर के भवन को बनाने के लिए , उसकी आराधना करने के लिए , उसे आदर और महिमा देने के लिए हम तैयार होंगे!
जैसा कि वचन में लिखा है कि ऐसा न हो कि आने वाली पीढ़ियों में हमारी नाम धराई हो । हमारे कलीसिया भवन खण्डहर बनकर रह जाएं! वह धरोहर जो हमारे पुरखों ने सौंपी हम उसको सम्हाल न पाएं । जब परमेश्वर ने हमें इतना कुछ दिया है तो आवश्यक है कि हम भी उसके कार्य को करें । क्योंकि अगर इस दिशा में आगे बढ़ने में असफल हो गए तो मृत्यु के उस पार जब हम परमेश्वर के सामने पहुचेंगे तो वह हमसे कहेगा कि तुमने मेरा भवन नहीं बनाया , अब स्वर्गीय भवन की भी अपेक्षा न करो ।

परमेश्वर आपको आशीष दे।