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सितारा और ज्योतिषियों का दर्शन

सितारा और ज्योतिषियों का दर्शन

संदर्भ: मत्ती 2ः1-12

बड़े दिन का पर्व उत्सव का पर्व है। यह इतिहास की सबसे अद्भुत घटना है। ऐसा पर्व है, जबकि जो अनन्त है, असीम है, अल्फा-ओमेगा है, सृष्टिकत्र्ता है;

वह बैतलहम के गौशाले में सीमित हो जाता है।
वह ईश्वर पुत्र मानव पुत्र बन जाता है।
वह स्वर्ग का महिमामय सिंहासन छोड़कर पृथ्वी पर एक चरनी में आ जाता है।
हम मनुष्यों का उद्धार करने के लिए।
हम मनुष्यों के पापों की क़ीमत चुकाने के लिए।
बैतलहम की चरनी से गुलगुता तक की यात्रा करने के लिए।

उस महान का जन्म जो कि आदि से है, जिसके जन्म का कोई प्रारम्भ नहीं है। जिसका जन्म सृष्टि के जन्म से पूर्व हुआ। ऐसे महान जन्म रहित, असीमित का आगमन होता है, बैतलहम के गौशाले में। बड़े दिन की महानतम घटना, जिसे हमने अनेकों बार सुन लिया है। जितनी बार सुना है, कुछ नया पाया है, नये पन का अनुभव किया है; बड़े दिन की यह घटना भी असीमित है। यह मरियम और यूसुफ के दर्शन तक, स्वर्गदूतों के सन्देश, गड़ेरियों को दर्शन, ज्योतिषियों के आगमन तक ही सीमित नहीं है।

आज, विशेषकर इस क्रिसमस के पर्व पर मैं आपका ध्यान इस तस्वीर, इस दृश्य के एक भाग पर आकर्षित करना चाहता हूं और तस्वीर का यह पहलू है वे ज्योतिषी जो कि पूरब दिशा से प्रभु यीशु को दण्डवत करने आए थे। इतिहास बताता है कि 4-5 हज़ार मील की दूरी तय करके, अपने ऊंटों पर आये वे ज्योतिषी प्रभु का दर्शन करना चाहते थे।

कभी इन ज्योतिषियों के बारे में सोचा है आपने?

ये विद्वान लोग थे, नक्षत्र ज्ञानी थे, तारों की स्थिति देखकर घटनाओं की जानकारी लगा लेते थे। इन्हें तारा दिखाई दिया और वे जान गए कि यहूदियों के राजा का जन्म हुआ है, और निकल पड़े उसके दर्शनों हेतु।

कैसा उत्साह होगा? कैसी लालसा होगी? कितनी बेताबी होगी?
कैसा समर्पण रहा होगा उन ज्योतिषियों का?
4-5 हज़ार मील की कठिन यात्रा ऊंटों पर की।
कई मरूस्थल आए होंगे, रास्ते में।
कितनी मश्कें फटी होंगी।
कितनी बार गले से पानी और फेफड़ों से खून सूखता-सा लगा होगा।
कितने रेतीले तूफ़ानों का सामना किया होगा।
कितनी निराशाओं, हताशाओं से गुज़रे होंगे।
सिर्फ उस प्रभु के दर्शन की आस में, जिसके विषय में उन्हें दर्शन था।

और फिर उदय होता है एक अजीब-सा तारा जो धीरे-धीरे एक दिशा की ओर बढ़ता जाता है। जो मार्गदर्शन करता है उन ज्योतिषियों का। ऐसा अद्भुत तारा और कभी नहीं हुआ। ऐसा चमकदार तारा रहा होगा जो कि दिन में चमकता होगा, जिसकी रोशनी को सूर्य की किरणें भी धूमिल न कर पाती होंगी। वह तारा जिसने हज़ारों मीलों तक ज्योतिषियों का मार्ग दर्शन किया। ज्योतिषी उसके पीछे-पीछे बढ़ते गए और एक दिन वह तारा उस घर, उस गौशाले पर ठहर गया जहां पर बालक प्रभु यीशु था।

वह तारा ज्योतिषियों के जीवन का मार्ग दर्शक बन गया और उस तारे का अनुसरण करते हुए उन्होंने प्रभु यीशु के दर्शन किये। और लिखा है “और उस घर में पहुंचकर उस बालक को उस की माता मरियम के साथ देखा, और मुंह के बल गिरकर उसे प्रणाम किया; और लोहबान और गन्धरस की भेंट चढ़ाई” (मत्ती 2ः11)।

आइये, आज हम अपने जीवनों की तुलना उन ज्योतिषियों से और उस सितारे की प्रमुखता से करें।

1. उनके जीवनों में राजा के दर्शनोें और मिलन की प्रमुखता थी:- हमारे जीवन में हमें प्रभु की नज़दीकी में रहने की कितनी लालसा रहती है? उन्होंने सब कुछ पीछे छोड़ दिया प्रभु के दर्शनों के लिए, परन्तु हमने अपने जीवनों में क्या त्याग किया है? या फिर हम इतने कमज़ोर हैं कि ज़रा-सी कोई बात हो गई तो हमारा कलीसिया से सम्बन्ध ही टूट जाता है।

यह एक महत्वपूर्ण बात है। चर्च से हमारा सम्बन्ध जो कि हमारे जीवनों से दर्शाता है, कहीं मात्र एक औपचारिकता निभाना भर तो नहीं रह जाता? क्या हम मसीही संगति, प्रेम, आराधना, प्रार्थना, बाइबिल अध्ययन में प्रभु यीशु को प्राथमिकता देते हुए कलीसिया से सम्बन्ध बनाए रखते हैं?

ज्योतिषियों के जीवन में उस राजा के दर्शनों और मिलन की प्रमुखता, प्राथमिकता थी जिसके लिए उन्होंने सम्पूर्ण प्रयास किये और राजा यानि प्रभु यीशु के दर्शन करने में सफल हुए। हमारे जीवनों में प्राथमिक, प्रमुख क्या है?

2. ज्योतिषी असफलताओं में भी दृढ़ रहे:- 4-5 हज़ार मील की यात्रा आसान नहीं होती। ज्योतिषियों ने लम्बे समय तक, ऊंटों पर यह कष्टदायक यात्रा पूरी की। आज जबकि यातायात के साधन सुगम हैं, हम एक हज़ार, दो हज़ार मील की यात्राओं में ही स्वयं को काफी थका-सा अनुभव करने लगते हैं। परन्तु ये ज्योतिषी मार्ग की समस्याओं, परेशानियों, कष्टों और असफलताओं में भी प्रभु के दर्शनों के प्रति अपने विश्वास में दृढ़ रहे, उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। परन्तु ज़रा-सी परेशानियों, मानवीय असफलताओं में हमारा मसीही विश्वास कितना दृढ़, कितना अडिग रहता है? यह ज्योतिषी हमारे लिए अद्भुत विश्वास का एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। अय्यूब ने भी असफलताओं में परमेश्वर के प्रति विश्वास को बनाये रखा। बैतसेदा के कुण्ड के पास पड़ा वह अपंग व्यक्ति 36 वर्ष तक पानी हिलाये जाने के वक्त किसी की सहायता से उस पानी को छूकर चंगाई प्राप्त करने की धैर्यपूर्वक प्रतीक्षा करता रहा। और अंततः ज्योतिषी प्रभु के दर्शनों में सफल हुए, अय्यूब की विश्वासयोग्यता पर उसे परमेश्वर के द्वारा और भी अधिक आशीषित किया गया, वह अपंग प्रभु यीशु के स्पर्श से चंगा हो गया। क्या हम भी ऐसी मानवीय, असफलताओं में अपने मसीही विश्वास में बने नहीं रह सकते?

3. ज्योतिषियों के जीवन में उद्देश्य था:- इन तीनों ज्योतिषियों के सामने एक लक्ष्य था, वह सितारा जिसके पीछे-पीछे चलकर वे प्रभु यीशु के दर्शन करने में सफल हुए।

आज हमारे जीवनों में क्या लक्ष्य है? हम किधर को जा रहे हैं? हमारे सफ़र की मंजिल क्या है? हमारे जीवन का आदर्श क्या है?

इसी बात पर आकर मेरी चर्चा केन्द्रित हो जाती है? इसी बात में बड़े दिन का सार है कि आज वह बैतलहम की चरनी का प्रभु यीशु मसीह हमारा लक्ष्य होना चाहिए क्योंकि केवल उसी सितारे के निर्देशन में हमें अनन्त जीवन की उपलब्धि होगी। हम परमेश्वर के राज्य के वारिस हो जाएंगे।

परन्तु जीवनों में त्रासदी यही है कि हमने अपना लक्ष्य उसे नहीं बनाया है, और यही कारण है कि;

हम दौड़ते तो बहुत हैं, पर कहीं नहीं पहुंचते।
श्रम तो बहुत करते हैं पर परिणाम ही नहीं निकलते।
पहाड़ तोड़ डालते हैं पर पानी के झरने उपलब्ध नहीं होते।
हम जीवन में दूसरी बातों को प्राथमिकता देने लगते हैं, हमारी निगाह बैतलहम के सितारे से अलग होकर अन्य सांसारिक सितारों पर लग जाती है।
परन्तु केवल एक ही सितारा है जो आपका मार्गदर्शन अनन्त जीवन की दिशा में कर सकता है और वह है बैतलहम का सितारा, प्रभु यीशु मसीह।

यदि, हम अन्य चीज़ों की ओर आंखें लगाए हैं तो ये हमारा मार्गदर्शन नहीं कर सकतीं। किसी अन्य सितारे के पीछे चलने से अनन्त जीवन प्राप्त हो नहीं सकता। यदि, हम पैसों में धर्म ढूंढ रहे हैं? तो आपकी खोज व्यर्थ है। केवल एक ही रास्ता है, प्रभु यीशु ने स्वयं ही कहा कि मार्ग, सत्य, जीवन, अनन्त जीवन मैं ही हूं।

यदि आपकी आंखें कहीं और लगी हैं तो आज मैं आपको फिर याद दिलाता हूं कि जो सितारा बैतलहम की चरनी से उदय हुआ है, वह केवल यीशु मसीह ही है।

आज संसार में भ्रष्टता, वैज्ञानिक अणुशक्ति, समलैंगिकता, राजनीति में तानाशाही बढ़ती जा रही है। धर्म में भी बुराइयों का समावेश होता रहा है, टेलीफोन पर बपतिस्मे होते हैं, स्वर्ग के टिकटों की नीलामी होती है। बस यही फिलाॅस्फ़ी बढ़ रही है कि बुराई से मुक्त होना है तो उसमें लिप्त हो जाओ। हर तरफ उथल-पुथल है, हर शख्स बहका हुआ है।

आप कहां हैं? आपका मसीही जीवन कितना दृढ़ है? आपकी राहें कितनी सीधी हैं? आपके लक्ष्य कितने ठोस हैं?

यदि हमारी निगाहें, हमारे लक्ष्य प्रभु यीशु मसीह की ओर उसी प्रकार लगी रहेंगी जैसे ज्योतिषियों की उस तारे की ओर थीं, तब हम निश्चित ही अनन्त जीवन प्राप्त करेंगे।

4. ज्योतिषियों ने अपनी भेंटें अर्पित कीं:- पवित्र शास्त्र में वर्णित है कि, उन ज्योतिषियों ने गौशाले में पहुंचकर बालक (प्रभु यीशु मसीह) के दर्शन किये, उसे मुंह के बल गिरकर प्रणाम किया और सोना, गंधरस, लोबान की बहुमूल्य भेटें चढ़ाईं, शायद उनके जीवन की कमाई रही हो, शायद यही कुछ उनके पास था।

हम क्या देते हैं, अपने जीवनों से प्रभु यीशु मसीह को? हमारा स्वयं का अपना क्या है? सब उसी का तो दिया हुआ है? परन्तु हमें चाहिए कि हम अपने जीवन का सर्वश्रेष्ठ भाग, सर्वश्रेष्ठ प्रयास उसके लिए लगाएं। हम अपनी योग्यताएं उसके लिये समर्पित करें, जहां ज़रूरत है। यदि हमारा जीवन उसके लिये काम आ सकता है तो यह हमारे लिए सर्वाधिक आनन्द की बात है। हमें अपने श्रेष्ठतम प्रयास करना चाहिए।

एक पुरानी कहानी है, एक युवा फकीर दुनिया घूमने निकला। सारी धरती का भ्रमण किया, पहाड़, रेगिस्तान, मैदान, अनेकों देश देख डाले। मानो सारी धरती का भ्रमण किया, बरसों बाद वापस लौटा। बचपन के मित्र ने जो अब उसके देश का राजा था, उसका स्वागत किया और पूछा, मित्र मेरे लिए क्या भेंट लाए? फकीर बोला दुनिया में कई चीज़ देखीं, सब तो है तुम्हारे पास, पर एक चीज़ लाया हूं तुम्हारे लिए। राजा को एकान्त में ले गया और कंधे से फटा-पुराना झोला उतारकर उसमें से एक छोटा-सा आइना निकाला, बोला यह भेंट लाया हूं तुम्हारे लिए, शायद तुम स्वयं को सच्चाई से देखने में समर्थ हो जाओगे।

आज ख्रीष्ट जन्म के पर्व पर मैं आपसे यही निवेदन करता हूं कि वचन के आइने में स्वयं को देखिये, पूछिये अपने आप से कि;

आपके जीवनों में किसकी प्रमुखता है?
मानवीय असफलताओं में आपका मसीही विश्वास कितना दृढ़ रहता है?
आपके जीवन के लक्ष्य क्या हैं? कौन-सी दौड़-दौड़ रहे हैं आप?
प्रभु को आपने क्या अर्पित किया?

ज्योतिषियों के जीवन और उस सितारे पर ध्यान लगाइये, निश्चित ही यह ख्रीष्ट जन्म उत्सव आपके लिए सच्चे आत्मिक आनन्द का पर्व बन जाएगा।

परमेश्वर आपको आशीष दे।