संदर्भ: मत्ती 2ः7-12
“तब हेरोदस ने ज्योतिषियों को चुपके से बुलाकर उन से पूछा, कि तारा ठीक किस समय दिखाई दिया था और उस ने यह कहकर उन्हें बैतलहम भेजा कि जाकर उस बालक के विषय में ठीक-ठीक मालूम करो और जब वह मिल जाए तो मुझे समाचार दो ताकि मैं भी आकर उस को प्रणाम करूं। वे राजा की बात सुनकर चले गए, और देखो जो तारा उन्होंने पूर्व में देखा था, वह उन के आगे-आगे चला, और जहां बालक था, उस जगह के ऊपर पहुंचकर ठहर गया। उस तारे को देखकर वे अति आनन्दित हुए और उस घर में पहुंचकर उस बालक को उस की माता मरियम के साथ देखा, और मुंह के बल गिरकर उसे प्रणाम किया, और अपना अपना थैला खोलकर उस को सोना, और लोहबान और गन्धरस की भेंट चढ़ाई और स्वप्न में यह चितौनी पाकर कि हेरोदेस के पास फिर न जाना, वे दूसरे मार्ग से होकर अपने देश को चले गए” (मत्ती 2ः7-12)। क्रिसमस की घटना का समापन प्रकाशितवाक्य की पुस्तक, जो नये नियम की अन्तिम पुस्तक है, के 22वें और अन्तिम अध्याय के अन्तिम दो पदों में होता है; जहां इस प्रकार लिखा है, “जो इन बातों की गवाही देता है, वह यह कहता है, हां मैं शीघ्र आने वाला हूं। आमीन। हे प्रभु यीशु आ। प्रभु यीशु का अनुग्रह पवित्र लोगों के साथ रहे। आमीन”। क्रिसमस की घटना का प्रारम्भ हेरोदेस राजा और ज्योतिषियों से हुआ। ज्योतिषी उसी रात बैतलहम नहीं पहुंचे जिस रात चरवाहे आए। जब यीशु पैदा हुए, उस समय ज्योतिषियों ने चलना प्रारम्भ किया। उन्हें इस पूरी यात्रा में लगभग दो वर्ष लगे। जब वे बैतलहम पहुंचे यीशु की उम्र तब लगभग दो वर्ष रही होगी। ज्योतिषियों की इस घटना का समापन दृश्य उपरोक्त सन्दर्भ की बारहवीं आयत है। बैतलहम पहुंचने के बाद, यीशु को देखने के बाद, अपनी बहुमूल्य भेंटों को चढ़ाने के बाद, यीशु की आराधना करने के बाद; वे दूसरे मार्ग से लौट गए। वह पुराना मार्ग छूट गया; और यही सन्देश है कि यीशु के जन्म का वास्तविक अनुभव करने के बाद दूसरी राह है। जब आप जीवन यात्रा में बैतलहम पहुंचते हैं, जब आप यीशु को देखते हैं, उसे अपना जीवन अर्पण करते हैं, तब दूसरी राह होना चाहिए। क्रिसमस का अनुभव जीवन को परिवर्तित करने वाला अनुभव है। ज्योतिषी आए थे सांसारिक राजा को देखने और उन्होंने पाया आत्मिक राजा को। आज हम जीवन के रास्तों के विषय पर विचार करें। 1. जीवन का एक रास्ता सांसारिक रास्ता है:- ज्योतिषी सांसारिक राजा को ढूंढने आए थे। जब राजमहल में वह नहीं मिला तो वे शायद निराश हुए होंगे। जीवन की राह में समस्याओं से हम गुज़रते हैं परन्तु जीवन में समस्याओं का आना तय है। कभी एक साथ, कभी एक के बाद एक और कभी कुछ अन्तराल से। कभी छोटी, कभी बड़ी, कभी शारीरिक, कभी मानसिक समस्याओं का आना तय है। अपने जीवन की समस्याओं का हल हम भी सांसारिकता में ढूंढते हैं। यदि हम जीवन की समस्याओं का हल सिर्फ सांसारिकता में ढूंढते हैं तो हम कभी सन्तुष्ट नहीं होंगे। जीवन में हमेशा ख़ालीपन, अधूरापन रहेगा। सूनापन, निराशा होगी। यीशु कहते हैं “मेरा राज्य इस जगत का नहीं....”। ज्योतिषी सांसारिक राजा को खोजने आए थे। हम संसार में रहकर सांसारिकता से प्रभावित हो जाते हैं परन्तु यीशु कहते हैं “यदि मेरा राज्य इस जगत का होता, तो मेरे सेवक लड़ते” (यूहन्ना 18ः36)। पौलुस रोमियों की कलीसिया के नाम अपने पत्र में सांसारिक रास्तों पर चल रहे लोगों का वर्णन करता है। वह लिखता है “जैसा लिखा है, कि कोई धर्मी नहीं, एक भी नहीं, कोई समझदार नहीं, कोई परमेश्वर का खोजने वाला नहीं। सब भटक गए हैं, सब के सब निकम्मे बन गए, कोई भलाई करने वाला नहीं, एक भी नहीं। उन का गला खुली हुई क़ब्र है; उन्होंने अपनी जीभों से छल किया है, उन के होठों में सांपों का विष है। और उन का मुंह श्राप और कड़वाहट से भरा है। उन के हाथ लोहू बहाने को फुर्तीले हैं। उन के मार्गों में नाश और क्लेश है। उन्होंने कुशल का मार्ग नहीं जाना। उन की आंखों के साम्हने परमेश्वर का भय नहीं” (रोमियों 3ः10-18)। यीशु कहते हैं “सकेत फाटक से प्रवेश करो, क्योंकि चौड़ा है वह फाटक और चाकल है वह मार्ग जो विनाश को पहुंचाता है और बहुतेरे हैं जो उस से प्रवेश करते हैं। क्योंकि सकेत है वह फाटक और संकरा है वह मार्ग जो जीवन को पहुंचाता है, और थोड़े हैं जो उसे पाते हैं” (मत्ती 7ः13-14)। यह चौड़ा रास्ता, संसार का रास्ता है। इस रास्ते के बारे में हम अख़बारों की सुर्खियों में पढ़ते हैं, टी.वी. सिनेमा, मैग्ज़ीन्स इस रास्ते को दिखाती हैं। कभी आपने सोचा कि यीशु के जन्म को किस-किसने खो दिया या उसमें शामिल होने से चूक गए? ऐसे लोग जो संसार की राह पर चल रहे थे। सराय का मालिक, जिसकी सराय में मरियम और यूसुफ के लिए जगह न थी; यीशु के जन्म के लिए स्थान न था। वह उस व्यापारी वर्ग का प्रतिनिधि है जो पैसा कमाने के उद्देश्य में क्रिसमस से चूक गये। शासक वर्ग के लोग जिनमें हेरोदेस शामिल था और बाद में पीलातुस शामिल हुआ; वे भी इस अनमोल अवसर को चूक गये। शासक वर्ग के लोग जिनमें हेरोदेस शामिल था और बाद में पीलातुस शामिल हुआ; वे भी इस अनमोल अवसर को चूक गये। धार्मिक अगुवे, शास्त्री और फरीसी जो व्यवस्था को जानने वाले थे, मंच पर बैठने वाले और धार्मिकता के चोगे पहनने वाले थे; वे इस अवसर से चूक गये। 2. जीवन का दूसरा रास्ता परमेश्वर का रास्ता है:- ज्योतिषी चितौनी पाकर दूसरे मार्ग से लौट गए। वे परमेश्वर के रास्ते से लौट गए क्योंकि उन्होंने परमेश्वर के उद्धार को देख लिया था। उन्होंने अपनी भेटें तो दे दीं परन्तु परमेश्वर की बहुमूल्य, अतुल्य भेंट पाई, जो वर्णन से बाहर है। बाइबिल में परमेश्वर के रास्ते का वर्णन है। लिखा है “जब कभी तुम दाहिनी या बाईं ओर मुड़ने लगो, तब तुम्हारे पीछे से यह वचन तुम्हारे कानों में पड़ेगा, मार्ग यही है, इसी पर चलो” (यशायाह 30ः21)। यीशु ने कहा, “मार्ग, सत्य और जीवन मैं ही हूं बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुंच सकता”। संसार कहता है कि अनेक रास्ते हैं परन्तु बाइबिल बताती है कि एक ही रास्ता है; कोई चयन नहीं है। भजन संहिता में वचन कहता है “ईश्वर का मार्ग सच्चाई; यहोवा का वचन ताया हुआ है; वह अपने सब शरणागतों की ढाल है। यहोवा को छोड़ क्या कोई ईश्वर है? हमारे परमेश्वर को छोड़ क्या और कोई चट्टान है? यह वही ईश्वर है, जो सामर्थ्य से मेरा कटिबन्ध बान्धता है, और मेरे मार्ग को सिद्ध करता है” (भजन संहिता 18ः30-32)। आज यही प्रश्न इस क्रिसमस के अवसर पर आप के सामने भी है कि आप किस रास्ते पर चलना चाहते हैं? पक्का रास्ता, निश्चित रास्ता, उद्देश्य पूर्ण रास्ता, मंज़िल तक ले जाने वाला रास्ता; प्रभु का रास्ता है, परमेश्वर का रास्ता है किन्तु ये चुनौती भरा रास्ता है क्योंकि यह संकरा रास्ता है। ज्योतिषी स्वप्न में यह चितौनी पाकर कि हेरोदेस के रास्ते से फिर मत जाना; दूसरे रास्ते से अपने देश को चले गए। ज्योतिषियों को स्वप्न में परमेश्वर की चितौनी मिली और वे मान गए। परन्तु हमें तो ज़िन्दगी में चेतना की अवस्था में चितौनियां मिलती है; चर्च में चेतावनी, क़ब्रिस्तान में चेतावनी, संसार की राह पर पराजय के समय, आंसुओं के साथ चेतावनी और टूटते दिल में चेतावनी मिलती है। यह क्रिसमस भी एक चेतावनी है; आने वाला नया वर्ष भी एक चेतावनी है। कितने लोग पिछले क्रिसमस पर हमारे साथ थे, आज नहीं हैं और कितने आज हैं जो शायद अगले क्रिसमस पर न होंगे। शायद उन में हम भी शामिल हों। आज यह ख्रीष्ट जन्मोत्सव एक नये मार्ग पर चलने की चुनौती हमें दे रहा है। आज यदि आपने अपनी जागृत अवस्था में इस चुनौतीपूर्ण चेतावनी को सुना है तो आइये, अब नयी राह पर चलें। बैतलहम हम पहुंच चुके हैं; आगे नया मार्ग है। एक फ़र्क मार्ग है जो परमेश्वर का मार्ग है। हेरोदेस का मार्ग छोड़ें, और परमेश्वर के मार्ग पर बढ़ें। परमेश्वर इस मार्ग पर चलने की सामर्थ्य आपको देगा। परमेश्वर आपको आशीष दे।