दानिय्येल 5:24-31 परिचय :- जिस समय बेलशस्सर बाबुल की राजगद्दी पर बैठा तो उस समय के इतिहास के अनुसार वह दुनिया का सबसे शक्तिशाली राजा था । बाबुल राज्य आर्थिक रूप से बहुत ही समृद्ध था । उसके पास दुनिया की सबसे शक्तिशाली सेना थी । बाबुल संसार का सबसे बड़ा और सबसे प्रमुख नगर था । बाबुल व्यापार का सबसे बड़ा केन्द्र था । बाबुल को बहुत खूबसूरती के साथ एक योजनाबद्ध तरीके से बसाया गया था । सारा का सारा शहर एक चहारदीवारी के अन्दर ही बसाया गया था । लगभग 6 वर्ष पहले की बात है । पुरातत्व वैज्ञानिकों ने अपनी खोज के दौरान बाबुल शहर की खुदाई की । वे आश्चर्य चकित रह गए क्योंकि उस खुदाई के दौरान उन्हें बहुत बड़े-बड़े महल मिले । उन्हें ऐसे हॉल मिले जिनमें मेज़ों को लगाने के बाद 1 हज़ार लोगों के एक साथ बैठकर भोजन करने की व्यवस्था थी । पुरातत्व विज्ञानियों के अनुसार बाबुल के महलों के इन कमरों की दीवारों की ऊंचाई 350 फुट और मोटाई 87 फुट थी । नगर में प्रवेश करने के लिए इस्तार नाम का एक दरवाज़ा था जो शुद्ध और ठोस पीतल का बना हुआ था । जो सड़कें थीं उनकी चौड़ाई लगभग 140 फुट थी । ये सड़कें सीधे राजमहल की तरफ जाती थीं । जब बाबुल की सेना किसी दूसरे राज्य पर चढ़ाई करती थी तो वे वहां के नागरिकों को बंधुवाई में बांधकर लाते थे। उस 140 फुट चौड़ी सड़क पर एक समारोह होता था जिस पर चारों तरफ बाबुल के लोग जमा हो जाते थे । यह बड़ी भीड़ अपनी सेना की जयजयकार करती थी । बंधुवाई में लाए गए लोगों को उस रास्ते से निकाला जाता था और उनके पीछे-पीछे बाबुल की सेना अपनी शक्ति का प्रदर्शन करती हुई घमण्ड के साथ उस सड़क पर कदम ताल करती हुई आगे बढ़ती जाती थी । इस सड़क के दोनों तरफ सोने के सिंहों की 120 प्रतिमाएं बनाकर ऊंचाई पर लगाई गयी थीं । 120 सिंहों की ये प्रतिमाएं बाबुल शहर की शक्ति, उसकी प्रतिभा और सम्पन्नता को प्रगट करती थीं । यह मुख्य रास्ता सीधा बेलशस्सर राजा के राजमहल को जाता था । उसके राजमहल में पहुंचने के पहले दोनों तरफ 75-75 फुट की ऊंचाई पर बहुत चौड़े-चौड़े बगीचे बने हुए थे जिन्हें हैंगिंग गार्डन्स कहा गया है । उनमें बहुत खूबसूरत फूल लगाए गए थे, जिनकी फुलवारी बारहों महीने बनी रहती थी । इस सारी शानो-शौकत के बीच उस चहारदीवारी के भीतर राजा बेलशस्सर ने अपने राजमहल में, जिसे परमेश्वर के वचन में रंग महल कहा गया है, राज मन्दिर कहा गया है, एक बड़ा भोज किया । इंग्लिश टीकाकारों ने इसे लिखा है - क्तऱ् ञीक् ी ूद्भएीड्य छलीक्ऱ्. उसने बड़ी शानो-शौकत और बड़ी गरिमा के साथ इस भोज के लिए एक हज़ार प्रधानों को नेवता दिया था । टीकाकारों का कहना है कि इस भोज में इन एक हज़ार प्रधानों के अलावा और भी लोग मौजूद थे जिनकी कोई गिनती नहीं थी । इस भोज का एक उद्देश्य था । उस समय बाबुल को चारों तरफ से फ्रारसियों और मादियों की सेनाओं ने घेर लिया था, तब बेलशस्सर राजा ने अपनी ताकत दिखाने के लिए यह भोज किया था ताकि वो फ्रारसियों की सेना को चुनौती दे सके और उन्हें बता सके कि ये एक हज़ार प्रधान मेरे साथ हैं और मेरे पास बहुत शक्तिशाली सेना है । आज अगर देखें तो बड़े-बड़े राजनेता भी दिल्ली या बड़े शहरों में अपनी शक्ति का प्रदर्शन करने के लिए ऐसे भोज करते हैं । ऐसे भोज तब होते हैं जब उन्हें लगता है उनके विरोधियों या दुश्मनों ने उनको चारों तरफ से घेर लिया है, वे किसी संकट में पड़े हैं, वे किसी अदालत के सामने खड़े हुए हैं । ऐसी स्थिति में अपनी शक्ति दिखाने के लिए ये राजनेता और अधिकारी भोज करते हैं । वास्तव में यदि देखा जाए तो बेलशस्सर को शत्रुओं का कोई भय नहीं था । वह तो बड़ी निर्भीकता, निडरता और आनन्द से इस जेवनार को कर रहा था । इतिहासकारों के अनुसार बाबुल शहर के चारों ओर 55 मील या 88 किलो मीटर लम्बी दीवार थी, जिसकी ऊंचाई 350 फुट थी । इस दीवार के भीतर एक और दीवार थी। पहली दीवार की मोटाई 80 फुट थी और दूसरी दीवार की मोटाई भी लगभग इतनी ही थी । इस प्रकार 350 फुट ऊंची और 80 फुट चौड़ी और उसके बाद एक और 80 फुट चौड़ी शहरपनाह के पीछे अपने राजमन्दिर में बैठकर राजा बेलशस्सर एक जेवनार करता है । वह अपने आपको बहुत सुरक्षित पाता है । वह सोचता है कि चारों तरफ यह जो दीवार मैंने घेर ली है और पीतल का जो दरवाज़ा लगाया है, उससे मुझे पूरी सुरक्षा है । यदि हम अध्ययन करें तो पाते हैं कि उन दिनों बाबुल के चारों तरफ संसार की एक बड़ी प्रसिद्ध नदी बहती थी जिसका नाम यूफेरिटीस् था । यह नदी बाबुल के चारों तरफ उसकी शहरपनाह के बाहर बहती थी । इसके लिए एक विशेष रास्ता बनाया गया था जिससे कि बाबुल नगर में पानी की कमी न रहे । विभिन्न रास्तों से यह नदी उन दीवारों से होकर राजमहल के भीतर पहुंचती थी और लोगों को पानी की कोई कमी न थी । इस कारण बेलशस्सर को चिन्ता नहीं थी क्योंकि वह जानता था कि यह नदी शत्रुओं से मेरी रक्षा करेगी, यह नदी एक खाई के समान है, जो किले के चारों तरफ है, जो दीवाल के बाहर है । इसके साथ बेलशस्सर ने एक कार्य और किया था वह यह कि अपने राज्य के लिए उसने 20 वर्षों के लिए अनाज लेकर गोदामों में भर लिया था । अगर 20 वर्षों तक भी भोजन की कोई व्यवस्था न होती तो बेलशस्सर के पास इतना भोजन था कि 20 वर्षों तक बाबुल के रहने वालों को भोजन की कमी नहीं होती । बेलशस्सर के पास सारी सुरक्षा थी । शहरपनाह के रूप में ऊंची-ऊंची, मोटी-मोटी दीवारें थीं और दीवारों के पास गहरी खाई थी । 20 वर्षों के लिए भोजन-पानी की व्यवस्था थी । उसके पास सारी शक्ति, सारा ऐश्वर्य था । यह बेलशस्सर राजा अपने राजमहल में एक भोज करता है और उसमें एक हज़ार प्रधानों को बुलाता है। इंग्लिश में लिखा हुआ है- स्ल्ड्डल् ञ्ल्ड्डल् द्भछल् ऱ्स्द्भट्टक्ीछश्व छद्भाड्यल् ब्ल्छ. उसके दरबार में जो सुयोग्य या यूं कहें कि उसके दरबार के जो रत्न थे, या जो उसके प्रमुख अधिकारीगण थे, उन्हें वह बुलाता है । इसके बाद शराब पिलाई जाती है और सब लोग शराब पीते हैं । तब शराब के नशे में वह कहता है कि जाओ और यरूशलेम के मन्दिर से जो सोने और चांदी के पात्र लाए गए थे, उनको यहां पर लेकर आओ। इसके बाद वे सोने और चांदी के पात्र लाए जाते हैं और राजा उनमें स्वयं शराब पीता है । वह अपनी रानियों को शराब पिलाता है, अपनी रखेलियों को शराब पिलाता है, अपने प्रधानों को शराब पिलाता है और मतवाला हो जाता है। किसी ने कहा है कि पहले मनुष्य शराब पीता है और फिर शराब आदमी को पी जाती है। दानिय्येल 5:4 में लिखा है - ``वे दाखमधु पी-पीकर सोने, चान्दी, पीतल, लोहे, काठ और पत्थर के देवताओं की स्तुति करने लगे'' । बेलशस्सर सोचता था कि मैं बहुत बड़ा काम कर रहा हूं । वह तो अपने घमण्ड के नशे में डूबा हुआ था क्योंकि उसकी समझ से उसके पास सुरक्षा थी, भोजन था, पानी था और सारे श्रेष्ठ लोग जो उसके प्रधान थे वे वहां जमा थे । तब फिर उसने परमेश्वर के मन्दिर के पात्रों से सब को शराब पिलाई और खुद भी शराब पी । उन्होंने मन्दिर के पात्रों का अपमान किया । उसके बाद वे सोने, चांदी, पीतल, काठ और पत्थर के देवताओं की उपासना करने लगे । बेलशस्सर ने फ्रारसियों की सेना को चुनौती देते-देते परमेश्वर यहोवा को चुनौती दे डाली । ऐसा लगता है कि मानो बेलशस्सर अपने जेवनार से यह घोषणा करता है कि मुझे किसी बात की चिन्ता नहीं, मुझे किसी बात की परवाह नहीं । मुझे परमेश्वर की परवाह नहीं, मुझे जो कहना है वह मैं कहूंगा और जो मुझे करना है वह मैं करूंगा । उसके बाद इस प्रकार के ठाठ-बाट के बीच में एक घटना घटी । मनुष्य के हाथ जैसा कुछ प्रगट हुआ । नशा अभी चढ़ ही रहा था, राजा की उद्दण्डता जारी थी। उसका उपहास अभी समाप्त नहीं हुआ था कि राज महल की दीवार पर जो चूने से पुती हुई थी, मनुष्य का सा एक हाथ दिखाई दिया और कुछ लिखने लगा। पुरातत्ववेत्ताओं ने छह वर्ष पहले जब बाबुल की खुदाई की तो उनको बड़ी अजीब सी बात मिली । बाबुल के राजा के राजमहल में पाए गए चूने में कुछ ऐसी वस्तु उन्हें प्राप्त हुई, एक ऐसा पदार्थ पाया गया जिस पर यदि आप अंगुली से लिखें तो ठीक वैसी ही लिखाई आती है जैसे आप किसी भाप जमे हुए कांच पर लिख रहे हैं । वैज्ञानिकों को पता नहीं चल पाया कि वास्तव में यह तत्व कौन सा है? यह कौन सा पदार्थ है? दानिय्येल 5:6 में लिखा है - ``उसे देखकर राजा भयभीत हो गया, और वह अपने सोच में घबरा गया, और उसकी कटि के जोड़ ढीले हो गए, और कांपते-कांपते उसके घुटने एक दूसरे से टकराने लगे'' । परमेश्वर की सामर्थ्य की हल्की सी झलक राजाओं को बदहवास कर देती है, झकझोर देती है और अगर आज की शब्दावली में कहा जाए तो उनकी छुट्टी कर देती है । भजन संहिता के 29 वें अध्याय में लिखा है - प्रतापी ईश्वर गरजता है । यहोवा की वाणी मेघों के ऊपर तक सुनाई देती है । यहोवा की वाणी प्रतापमय है, यहोवा की वाणी देवदारों को तोड़ डालती है, यहोवा की वाणी आग की लपटों को चीरती है, यहोवा की वाणी जंगल को हिला देती है, यहोवा की वाणी से वन में मानो पतझड़ आ जाता है । परमेश्वर का जो हाथ उस दीवार पर आता है, उससे चार शब्द लिखे जाते हैं - ``मने, मने, तकेल, ऊपर्सीन।'' इस वाक्य का अर्थ है; मने - अर्थात् परमेश्वर ने तेरे राज्य के दिन गिनकर उसका अन्त कर दिया है । तकेल, तू मानो तराजू में तौला गया और हल्का पाया गया है । परेस और ऊपर्सीन, का अर्थ है - तेरा राज्य बांटकर मादियों और फ्रारसियों को दिया गया है । उसके बाद 30 वीं आयत में लिखा गया है कि उसी रात कसदियों का राजा बेलशस्सर मार डाला गया । बेलशस्सर के जीवन और इस घटना से हमें क्या शिक्षा मिलती है ? प्रश्न यह नहीं कि दीवार पर लिखे हुए हाथ ने बेलशस्सर को कौन सा सन्देश दिया ? परन्तु प्रश्न यह है कि दीवार पर जो भाषा लिखी गई, जो कुछ लिखा गया, वह आज मुझे और आपको क्या सन्देश देता है ? इस सन्दर्भ में 3 बातों को हम देखेंगे । 1. हम परमेश्वर की महानता को हमेशा याद रखें :- हम इस बात को याद रखें कि हमारा जीवन और हमारे जीवन की बागडोर परमेश्वर के हाथ में है। इस घटना की जो शिक्षा है, वह यही है कि सारा पराक्रम, और सारी महिमा, और सारा अधिकार, और सारी सामर्थ्य परमेश्वर की है । संसार के राजाओं, राष्ट्रपतियों, प्रधानमंत्रियों, मुख्यमंत्रियों, राज्यपालों; सभी को अधिकार प्रदान करने की स्वीकृति परमेश्वर देता है । सारा अधिकार परमेश्वर के हाथ में केन्द्रित है । हमें यह नहीं भूलना है कि परमेश्वर के पास सारा अधिकार है। दानिय्येल 5:18 में लिखा है - ``हे राजा, परम प्रधान परमेश्वर ने तेरे पिता नबूकदनेस्सर को राज्य, बड़ाई, प्रतिष्ठा और प्रताप दिया था'' । दानिय्येल दीवार पर लिखे उन शब्दों का अर्थ बताते समय राजा बेलशस्सर से कहता है कि चार बातें परमेश्वर ने तेरे पिता नबूकदनेस्सर को दी थीं । अर्थात् राज्य, बड़ाई, प्रतिष्ठा और प्रताप दिया था। यह जो कुछ तेरे पिता ने पाया था, उसे तेरे पिता ने अर्जित नहीं किया था वरन् यह तेरे पिता को परमेश्वर ने दिया था । उसके आगे दानिय्येल 5:23 में लिखा है - ``वरन् तू ने स्वर्ग के प्रभु के विरुद्ध सिर उठाकर, उसके भवन के पात्र मंगवाकर अपने साम्हने धरवा लिए और अपने प्रधानों, और रानियों, और रखेलियों समेत तू ने उन में दाखमधु पिया; और चांदी-सोने, पीतल, लोहे, काठ और पत्थर के देवता, जो न देखते, न सुनते, न कुछ जानते हैं, उनकी तो स्तुति की, परन्तु परमेश्वर, जिसके हाथ में तेरा प्राण है, और जिसके वश में तेरा सब चलना-फिरना है, उसका सम्मान तू ने नहीं किया'' । हमें याद रखना है, कि परमेश्वर परमेश्वर है, और मनुष्य मनुष्य है। परमेश्वर स्वामी है, और मनुष्य मनुष्य है । परमेश्वर सर्वसामर्थी है और मनुष्य मनुष्य है । हमारे जीवन की श्वास, हमारे हृदय की एक-एक धड़कन, हमारे जीवन में आने वाला कल और हमारी ज़िन्दगी का एक-एक पल; परमेश्वर के हाथ में है । यदि हमने अपने जीवन में इस बात को नहीं सीखा तो हमारे जीवन की बुनियाद खोखली रह जाएगी। सारा सत्य और परमेश्वर का सन्देश इसी बुनियाद पर आधारित है कि सब कुछ परमेश्वर के हाथ में है । यशायाह 55:8-9 में लिखा हुआ है - ``क्योंकि यहोवा कहता है, मेरे विचार और तुम्हारे विचार एक समान नहीं हैं, न तुम्हारी गति और मेरी गति एक सी है । क्योंकि मेरी और तुम्हारी गति में और मेरे और तुम्हारे सोच विचारों में, आकाश और पृथ्वी का अन्तर है'' । बेलशस्सर ने सोचा कि सुरक्षा की बड़ी-बड़ी सीमाओं में, ऊंची-ऊंची और मोटी-मोटी दीवारों में मैं सुरक्षित हूं । मेरे पास 20 वर्षों के लिए सिक्योरिटी डिपॉज़िट है । मेरे पास दुनिया की सबसे मज़बूत सेना है । परन्तु परमेश्वर कहता है तेरा राज्य समाप्त हुआ, तेरा जीवन समाप्त हुआ । लिखा हुआ है कि उसी रात वह मार डाला गया । 2. हम परमेश्वर के वचन की चेतावनियों को स्मरण रखें:- हम अपने जीवन में परमेश्वर की महानता को स्मरण रखें । हम परमेश्वर के वचन की चेतावनियों को स्मरण रखें । हम परमेश्वर के वचन और उसकी चेतावनियों की अवहेलना न करें। आप कहेंगे कि परमेश्वर ने बेलशस्सर को कोई चेतावनी नहीं दी? दीवार पर लिखा हुआ था - मने, मने, तकेल, ऊपर्सीन; वह तो परमेश्वर के न्याय की घोषणा थी, वह तो परमेश्वर का निष्कर्ष था परन्तु परमेश्वर ने बेलशस्सर को चेतावनी कहां दी? दानिय्येल की पुस्तक के तीसरे अध्याय में हम पाते हैं कि बेलशस्सर के पिता नबूकदनेस्सर ने सोने की एक मूरत बनाई थी और कहा था कि हर एक व्यक्ति जो उसके राज्य में है उसको दण्डवत करेगा । उसके आगे की घटना हम जानते हैं कि किस प्रकार शदरक, मेशक और अबेदनगो ने कहा कि हम ऐसा नहीं करेंगे और उनको आग के भट्टे में डाल दिया गया । परन्तु परमेश्वर ने अपना पराक्रम दिखाते हुए शदरक, मेशक और अबेदनगो को उस आग के भट्टे से बचाया। बेलशस्सर अपने पिता के राज्य की उन घटनाओं को भूल गया । वह उस आग के भट्टे को भूल गया। वह शदरक, मेशक और अबेदनगो पर परमेश्वर के हाथ को भूल गया । उसके बाद दूसरी चेतावनी हम दानिय्येल की पुस्तक की 4:7 आयत में पाते हैं कि जब नबूकदनेस्सर राजा घमण्डी हो गया और अपने आप को बहुत कुछ समझने लगा तो परमेश्वर ने उसके घमण्ड को तोड़ा और उसे एक बीमारी हो गई । आज डॉक्टर्स उसे अपनी भाषा में ज़ोएन्थ्रोपी कहते हैं । ज़ोएन्थ्रोपी एक ऐसी दिमागी बीमारी है जिसमें व्यक्ति अपने आपको पशु के समान समझने लगता है । उसके हाव-भाव पशु के समान हो जाते हैं, वह पशुओं के समान चारा चरने लगता है, उसकी समझ पशु के समान हो जाती है, उसके कार्य पशु के समान हो जाते हैं । हम पाते हैं कि जब नबूकदनेस्सर राजा सात वर्षां तक गधों के समान और बैलों के समान जंगल में घास चरता रहा और उसका जीवन पशुवत हो गया था, तब हम नबूकदनेस्सर के अन्तिम शब्दों को पाते हैं । वह कहता है - ``अब मैं नबूकदनेस्सर स्वर्ग के राजा को सराहता हूं, और उसकी स्तुति और महिमा करता हूं, क्योंकि उसके सब काम सच्चे, और उसके साथ सब व्यवहार न्याय के हैं; और जो लोग घमण्ड से चलते हैं, उन्हें वह नीचा कर सकता है'' (दानिय्येल 4:37) । जो लोग घमण्ड से चलते हैं, परमेश्वर यहोवा उनको नीचा कर सकता है । बेलशस्सर ! तू याद कर उस भट्टे को । बेलशस्सर ! तू स्मरण कर अपने पिता के जीवन के सात वर्षो को । जब उसने इन चेतावनियों को भुला दिया । जब उसने वही किया जो उसके पिता ने किया था कि चांदी, सोने, पीतल, लोहे, काठ और पत्थर के देवी और देवताओं की उपासना की, तो परमेश्वर ने अपना निर्णय उसके महल की दीवार पर लिख दिया । इससे पहले परमेश्वर हमारा निर्णय लिखे, काश! हम उसकी चेतावनियों को पाकर सुधर जावें। परमेश्वर हमको चेतावनियां देता है। जब हमारी कलीसिया के किसी परिवार में किसी की मृत्यु होती है, तब परमेश्वर हमको चेतावनी देता है । जब हमारी कलीसिया के किसी परिवार में किसी को गम्भीर अस्वस्थता होती है, तब परमेश्वर हमको चेतावनी देता है । जब हम परमेश्वर के भवन में आते हैं, तो परमेश्वर हमको चेतावनी देता है । परन्तु चेतावनियों के बाद परमेश्वर का निर्णय आता है । इससे पहले कि परमेश्वर हमारा निर्णय करे, हम उसकी चेतावनियों को पाकर सुधर जाएं । 3. हम परमेश्वर के तराजू को स्मरण रखें, हम परमेश्वर के मापदण्डों को स्मरण रखें :- दीवार पर लिखा गया - मने, मने, तकेल, उपर्सीन । तकेल का अर्थ है - तू तौला गया और हल्का पाया गया । बेलशस्सर अपने ही तराजू में अपने आपको तौलता था और बहुत खुश था । वह बहुत संतुष्ट था, बड़े-बड़े भोज कर रहा था, जेवनार कर रहा था, चुनौती दे रहा था । वह घमण्ड से फूल रहा था। तब परमेश्वर लिखता है कि तू तौला गया और हल्का पाया गया। हमारे सोचने का तरीका अलग है । हम अपने आपको कैसे तौलते हैं? हम अपने आपको अपने बांटों से तौलते हैं, अपने मापदण्डों से तौलते हैं, अपनी सोच से तौलते हैं । हम अपने आपको अपने पड़ोसियों के सोच से तौलते हैं । हम कहते हैं कि दुनिया में तो और भी बुरे लोग हैं, उनसे तो हम बेहतर हैं । हम दुनिया के बांटों से और दुनिया के तराजुओं से अपने आपको तौलते हैं । परन्तु जब परमेश्वर हमको तौलता है तब हमारा सही माप पता चलता है । जब हमारे पास हमारे स्वयं के तर्क, सोच-विचार के तरीके और चिन्तन की प्रक्रिया होती है तब हो सकता है शायद हम अपनी दृष्टि और संसार की दृष्टि में बहुत बुद्धिमान हों । बेलशस्सर अपने तराजू में स्वयं को तौलता है और खुद को बहुत शक्तिशाली समझता है, परन्तु जब परमेश्वर ने उसे तौला तो उसी रात वह तलवार से मारा गया । उसका शाही खून उसकी लुढ़की हुई शराब के साथ मिलकर संगमरमर पर बह गया और उसी रात उसके साम्राज्य का अन्त हो गया । परमेश्वर न सिर्फ्र बोलने वाला परमेश्वर है, परमेश्वर पिता न सिर्फ्रचेतावनियां देने वाला परमेश्वर है, मुझे और आपको तौलने वाला परमेश्वर भी है । परमेश्वर अवसर देता है, परमेश्वर क्षमा करता है, परमेश्वर अनुग्रह देता है, परमेश्वर प्रेम करता है, परमेश्वर चेतावनी देता है । परन्तु उसके बाद एक सीमा है । वह रात आने वाली है जिसमें कोई काम हो नहीं सकेगा। बेलशस्सर ने घमण्ड किया और अपने अधिकार का दुरुपयोग किया । उसने परमेश्वर के उन पात्रों को, जो मन्दिर में समर्पित थे, अपवित्र किया । उसने शराब पीकर पराये देवताओं के आगे अपने सिर को झुकाया । तब परमेश्वर कहता है बस! बहुत हो गया, (न्छद्भट्टश्रस् रूक् न्छद्भट्टश्रस्), सीमा को तूने पार कर दिया । बोलने का वक्त ख़त्म हुआ । तौलने का वक्त आ गया । तू तौला गया और हल्का पाया गया। किसी ने लिखा है -इससे पहले कि परमेश्वर दीवार पर लिखे हमें पश्चात्ताप करना है (भल्श्नद्भड्डल् द्भिश्व ञ्ड्डरूऱ्ल्क् द्भछ ऱ्स्ल् शीड्यड्य, ञ्ल् ब्ट्टक्ऱ् ड्डल्ढ्यल्छऱ्.) प्रश्न यह उठता है कि बेलशस्सर के उस मज़बूत गढ़ और उसके राजमहल में फारसियों की सेना कैसे घुसी ? टीकाकारों के वर्णन और बाइबिल के दूसरे इतिहासकारों ने जो कुछ लिखा है, उसके अनुसार जब फारसियों की सेना ने बाबुल के नगर में प्रवेश किया, और उन्होंने बाबुल राज्य पर कब्ज़ा कर लिया तो शत्रुओं (फारसियों) की सेना का एक भी सिपाही नहीं मारा गया । क्यों ? क्योंकि दारा जो कि फारसियों का राजा था उसने बाबुल के चारों तरफ अपनी सेना को जमा किया। उसके बाद उसने यूफिरिटीस नदी से बहुत ख़ामोशी से एक ऐसी नहर बनवा दी जो राजमहल और बाबुल की दीवारों से 10 मील दूर जाती थी । इस नहर के माध्यम से उसने नदी के पानी की दिशा उस झील की ओर मोड़ दी जो बाबुल के उत्तर की दिशा में है। तब उसी शाम जब बेलशस्सर जेवनार कर रहा था, उस नहर के फाटक खोल दिए गए और नदी का सारा पानी राजमहल की ओर न जाकर उस झील की ओर चला गया । जिस रास्ते से राजा के राजमहल तक पानी जाने का रास्ता था उस रास्ते से दारा की सेना भीतर पहुंच गई । उसकी सेना के लोग एक-एक स्थान पर पहुंच गए क्योंकि पानी अनेक स्थानों पर जाता था । 250 पहरेदार 350 फीट ऊंची दीवारों पर अपनी-अपनी बुर्जियों पर खड़े रहे परन्तु दारा के सैनिक उस राजमहल में प्रवेश कर गए और उन्होंने बेलशस्सर को मार डाला । रोमियों 14:11-12 में लिखा है - ``क्योंकि लिखा है, कि प्रभु कहता है, मेरे जीवन की सौगन्ध कि हर एक घुटना मेरे साम्हने टिकेगा, और हर एक जीभ परमेश्वर को अंगीकार करेगी । सो हम में से हर एक परमेश्वर को अपना-अपना लेखा देगा''। हम में से हर एक परमेश्वर को अपना-अपना लेखा देगा । परमेश्वर का धन्यवाद हो कि हमें किसी का न्याय नहीं करना है । परमेश्वर का धन्यवाद हो कि किसी की तरफ उंगली नहीं उठाना है । परमेश्वर का धन्यवाद हो कि हमें किसी के लिए बुरा नहीं कहना है । क्योंकि हम में से हर एक अपने-अपने कामों का लेखा परमेश्वर को देगा । परमेश्वर अपने वचन में स्वयं अपने जीवन की सौगन्ध लेकर यह बात कहता है । हम परमेश्वर की महानता को स्मरण करें । हम परमेश्वर की चेतावनियों को स्मरण करें । हम परमेश्वर के तराजू को स्मरण करें । न्याय का दिन आने वाला है । वह दिन आएगा जब हम परमेश्वर के सिंहासन के सामने खड़े होंगे और अपने जीवन का लेखा परमेश्वर को देंगे । जिस परमेश्वर ने बेलशस्सर राजा के राजमहल की दीवारों पर लिखा था, उसी परमेश्वर ने मेरे और आप के लिए प्रभु यीशु मसीह को भेजा है । अपने अच्छे कामों के द्वारा, अपने धर्म के कामों के द्वारा, अपने नाम के द्वारा हम उद्धार अर्जित नहीं कर सकते । अगर हमें क्षमा मिलेगी, अनन्त जीवन और उद्धार मिलेगा तो केवल प्रभु यीशु मसीह के द्वारा । ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की एक घटना मैं पढ़ रहा था । यूनिवर्सिटी में फाइनल एग्ज़ाम्स चल रहे थे । तर्कशास्त्र की परीक्षा थी । तर्कशास्त्र के प्रोफेसर ने परीक्षा से पहले छात्रों से कहा कि मैं जानता हूं कि यह परीक्षा सबसे कठिन होती है, इसलिए मैं आप सभी को एक छूट देता हूं । 12 ट्ठ 8 इंच के पेपर पर आप कुछ भी ला सकते हैं (श्सीऱ् ल्ख्ल्ड्ड श्नरूऱ्क् रूछ ऱ्द्भ ऱ्स्ल् क्स्ल्ल्ऱ् द्भश्न १२ट्ठ८ रूछत्तस् ढ्यीढ्यल्ड्ड एद्भट्ट ीड्डल् श्नड्डल्ल् ऱ्द्भ ाड्डरूछश्र) । जो कुछ आप इस शीट पर रख सकते हैं उसे ला सकते हैं । परन्तु आकार इससे बड़ा नहीं होना चाहिए । तब बहुत से छात्रों ने उस आकार का पेपर लिया और बहुत छोटे-छोटे अक्षरों में संभावित प्रश्नों के उत्तर लिखे । किसी ने एक तरफ लिखा और किसी ने दोनों तरफ लिखा । बहुत से छात्रों ने उन कलाकारों के पास जाकर जो बहुत बारीक चित्रकारी करते थे, उनसे बहुत छोटी-छोटी चित्रकारी में बहुत सी बातें लिखवा लीं। परन्तु एक होशियार छात्र था। वह अपने साथ 12 ट्ठ 8 इंच का कोरा पेपर लेकर आया । वह अपने साथ अपने एक मित्र को भी लाया जो दूसरी यूनिवर्सिटी में तर्कशास्त्र का प्रोफेसर था । उसने उस 12 ट्ठ 8 के पेपर को अपनी कुर्सी के बगल में रख दिया और अपने प्रोफेसर मित्र को उस 12 ट्ठ 8 के पेपर पर खड़ा कर दिया। उसके पैर उस 12 ट्ठ 8 के पेपर से बाहर नहीं निकले । तब अपने उस मित्र से पूछकर इस छात्र ने तर्कशास्त्र का वह प्रश्न पत्र हल कर दिया । जब यूनिवर्सिटी के तर्कशास्त्र के प्रोफेसर वहां आए और उन्होंने इस छात्र को ऐसा करने पर आपत्ति प्रगट की तो इस छात्र ने कहा - आप तर्कशास्त्र पढ़ाते हैं, आपका तर्क था कि 12 ट्ठ 8 के पेपर पर जो कुछ भी आ सके उसे छात्र ला सकते हैं । आपने इस बात की अनुमति दी थी और मैंने वही किया। प्रोफेसर को अपनी बात माननी पड़ी और उसको स्वीकृति देनी पड़ी । निष्कर्ष :- परमेश्वर के न्याय के सिंहासन के सामने जब हम अपनी अच्छाइयों का वर्णन करेंगे तो हमारी अच्छाइयां बहुत थोड़ी होंगी परन्तु बुराइयां बहुत अधिक होंगी । धर्म के काम बहुत थोड़े होंगे, अधर्म के काम बहुत अधिक होंगे। हम अपनी अच्छाइयों से, अपनी धार्मिकता के कामों से, अपने नाम से, अपने पद से, इस संसार में जो कुछ हमने किया उस सब से हमें उद्धार नहीं मिल सकता । उससे हम अपने आपको न्याय से बचा नहीं सकते । हमारे 12 ट्ठ 8 के पेपर पर खड़ा होकर यदि हमें कोई बचा सकता है तो वह हमारा प्रभु यीशु मसीह है । जिसके रक्त बहाने से, जिसके बलिदान से, हम बचाए जा सकते हैं । क्या वह प्रभु यीशु मसीह मेरे और आप के जीवन में है ? क्या वह प्रभु यीशु मसीह मेरे और आपके साथ है ? हम परमेश्वर की महानता को स्मरण रखें, हम परमेश्वर की चेतावनियों को स्मरण रखें, और हम परमेश्वर के तराजू को स्मरण रखें । काश ! जब परमेश्वर हमारा अन्तिम निर्णय लिखे तो वह लिखे - ``हे अच्छे और सच्चे विश्वासयोग्य दास, तू थोड़े में विश्वासी रहा, आ, अपने स्वामी के आनन्द में शामिल हो जा ।'' परमेश्वर आपको आशीष दे ।