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आधी अधूरी ज़िन्दगी

यशायाह 53:3-9; लूका 4:7

परिचय :- यशायाह नबी ने अपनी पुस्तक में प्रभु यीशु मसीह के विषय में उसके जन्म से 720 वर्ष पहले लिखा । उसमें उसने लिखा कि प्रभु यीशु मसीह तुच्छ जाना जाएगा । लोग उसे त्याग देंगे। उसको इस संसार में दुखों और सतावों से होकर गुज़रना पड़ेगा। लोग उसे पहचानने से इन्कार कर देंगे । उसके अपने उस से मुंह फेर लेंगे और वास्तव में ऐसा ही हुआ ।

जब प्रभु यीशु मसीह का जन्म हुआ तो उसके लिए सराय में जगह न थी । जिसने सारी सृष्टि को बनाया, जो सृष्टिकर्ता है, जो सबका प्रभु है, जो सबका परमेश्वर है । जो सर्वज्ञानी, सर्वव्यापक और सर्वसामर्थी है । जिसके वचन मात्र से सृष्टि की सृजना हो गई । उसके लिए सराय में जगह नहीं थी । यह पढ़कर ऐसा लगता है मानो किसी पिता के लिए अपने घर में जगह न हो । ऐसा लगता है मानो किसी बाग में फूलों के लिए स्थान न हो। ऐसा लगता है कि वाणी तो हो पर परन्तु शब्दों के लिए स्थान न हो । फूल तो हों परन्तु सुगन्ध के लिए उसमें जगह न हो ।

जब प्रभु यीशु मसीह इस संसार में आया, तो वह मारा-मारा फिरा । उसने हर प्रकार के सताव को सहा । अपनों का तिरस्कार और उनकी निन्दा बरदाश्त की । मत्ती 8:28-34 में वर्णन है कि कुछ मनुष्य थे जिनमें दुष्टात्माएं थीं । प्रभु यीशु मसीह ने उनकी दुष्टात्माओं को निकालकर सुअरों पर भेज दिया और सुअर मर गए। सारे नगर के लोग यीशु से भेंट करने को निकल आए और उसे देखकर विनती की, कि हमारे सिवानों से बाहर निकल जा । प्रभु यीशु मसीह ने एक व्यक्ति को बचाया था। उसकी आत्मा उसके लिए प्रमुख थी परन्तु लोगों के लिए उनके सुअर प्रमुख हो गए। वे प्रभु यीशु मसीह से कहने लगे कि तू हमारे स्थान से चला जा ।

लूका 4:16-30 में नासरत नगर का वर्णन है । नासरत वह स्थान था जहां प्रभु यीशु मसीह पला बढ़ा था । वहां उसका बचपन गुज़रा था । उस नासरत नगर में, कलीसिया की आराधना में प्रभु यीशु मसीह प्रचार करने के लिए गया । जब प्रभु यीशु मसीह ने प्रचार किया तो लूका 4:28-29 में हम पाते हैं - ``ये बातें सुनते ही जितने आराधनालय में थे, सब क्रोध से भर गए । और उठकर उसे नगर से बाहर निकाला, और जिस पहाड़ पर उनका नगर बसा हुआ था, उस की चोटी पर ले चले, कि उसे वहां से नीचे गिरा दें''। उनके इस कार्य से निराश होकर प्रभु यीशु मसीह वहां से चला गया और कहा कि भविष्यवक्ता अपने देश में मान-सम्मान नहीं पाता ।

लूका के 23 वें अध्याय में हम पाते हैं कि पीलातुस की अदालत लगी है । एक बड़ी भीड़ है । एक तरफ एक डाकू है, एक तरफ संसार को बचाने वाला है । एक ओर यीशु है, एक ओर बरअब्बा है । एक ओर मारने वाला है, एक ओर बचाने वाला है । एक ओर विनाशक है, दूसरी ओर उद्धारकर्त्ता है । एक ओर शैतान का पर्याय है, दूसरी ओर परमेश्वर का पुत्र है । बीच में क्रूस है और भीड़ चिल्लाती है कि हमारे लिए बरअब्बा को छोड़ दो और इस यीशु को क्रूस पर चढ़ाओ।

मत्ती 8:20 और लूका 9:58 में प्रभु यीशु मसीह कहते हैं कि ``लोमड़ियों के भट और आकाश के पक्षियों के बसेरे होते हैं; परन्तु मनुष्य के पुत्र के लिए सिर धरने की भी जगह नहीं है'' । यह बात वास्तव में सत्य साबित हुई । जब प्रभु यीशु मसीह की मृत्यु हुई तो उसके शरीर को दफ्रनाने के लिए कोई स्थान नहीं था । किसी दूसरे व्यक्ति की आरक्षित क़ब्र में उसकी देह को रखा गया । बैतलहम के गौशाले से लेकर क़ब्र तक की यात्रा में प्रभु यीशु मसीह के लिए जगह नहीं थी । सराय से लेकर क़ब्रिस्तान तक प्रभु यीशु मसीह के लिए जगह नहीं थी ।

आज 2000 वर्षों के बाद परिस्थितियां बदल गइंर् हैं । सराय के बदले अब होटल्स हैं । गधे की सवारी के बदले आज वाहन हैं । नाम लिखवाने के बदले आज इलेक्रां निकली बने हुए परिचय पत्र हैं । राजा के बदले आज प्रधानमन्त्री है । पगडंडियों की यात्रा के बदले आज राजमार्ग हैं । परिस्थितियां तो बदल गईं हैं । सन्दर्भ तो बदल गए हैं । पात्र तो बदल गए हैं । परन्तु बात वही है कि प्रभु यीशु मसीह के लिए हमारे जीवनों में कोई जगह नहीं है । उसके लिए हमारी दिनचर्या में कोई स्थान नहीं है । उसके लिए हमारे कार्यक्षेत्र में कोई चर्चा नहीं है । प्रभु यीशु मसीह के नाम से कार्यक्रम तो होते हैं परन्तु वास्तव में हमारे दिलों में उसके लिए जगह नहीं है।

किसी व्यक्ति ने बहुत अच्छी बात लिखी है जो हालांकि पढ़ने में तो बड़ी कड़वी लगेगी परन्तु है बिलकुल सत्य । उसने लिखा है कि - आज हमें अपने कुत्ते के मरने से तो दुख होता है परन्तु किसी परिचित की आत्मा के विनाश से कोई दुख नहीं होता । यदि हम अखबार न पढ़ें तो ऐसा लगता है कि कोई कमी रह गई है परन्तु अगर बाइबिल न पढ़ें तो इसका हमको कोई रंज नहीं होता। टेलीविजन का कोई मनपसन्द प्रोग्राम नहीं देख पाते तो उससे हमको काफी ग़म होता है परन्तु अगर चर्च आराधना में न जा सके तो उससे कोई अन्तर नहीं पड़ता। हमारे कूलर में पानी की कमी हो जाती है तो बड़ी तकलीफ हो जाती है परन्तु पास के गांव में लोग प्यासे मर जाते हैं तो हमें कोई दुख नहीं होता । बैंक की लम्बी लाइन में देर तक खड़े रहने में हमें कोई आपत्ति नहीं है परन्तु चर्च की आराधना में लम्बा सन्देश सुनने में हमको तकलीफ हो जाती है । तनख्वाह बढ़ जाती है तो हमें खुशी होती है परन्तु दसवांश देने की बात पर हमें तकलीफ होती है ।

दिन भर के 24 घंटों में हमारे पास 5 मिनिट का भी समय नहीं है कि अपने परमेश्वर के पास घुटने टेक कर ख़ामोशी से एकान्त में उसके साथ समय बिता लें । हमारे पास समय नहीं है कि अपनी रक्षा के लिए, अपनी आत्मा के उद्धार के लिए 5 मिनिट प्रार्थना में बिता लें । अगर वास्तव में देखें तो प्रभु यीशु मसीह के लिए हमारे पास आज भी कोई जगह नहीं है। हमारे जीवन के बोर्ड पर लिखा है - नो रूम, नो वेकेन्सी, हाउस फुल ।

सराय की इस घटना पर जब मैं विचार करता हूं तो 3 बातें मेरे सामने आती हैं । जिनके बारे में मैं चाहता हूं कि आप भी विचार करें ।

1. संसार में सफल होने का अर्थ यह नहीं है कि हमारा उद्धार हो गया :- संसार में सफल होने का अर्थ हमारा उद्धार हो जाना नहीं होता । सराय का मालिक हो सकता है कि बहुत अच्छा व्यक्ति रहा हो । सांसारिक रूप से सम्पन्न व्यक्ति रहा हो । सराय भरी हुई थी । उसके पास स्थान नहीं था। उसका व्यवसाय बहुत अच्छा चल रहा था । परन्तु उसके पास, उसकी सराय में, उसके घर में, प्रभु यीशु मसीह के लिए कोई जगह नहीं थी ।

आज बहुत से व्यक्ति हैं जिनके जीवनों को देखकर लगता है कि वे बहुत सफल हैं । उन्होंने बहुत पैसा कमाया है । बड़े-बड़े काम किए हैं । उनका नाम बहुत आदर से लिया जाता है परन्तु वास्तव में ये ऐसे लोग हैं जिनके जीवनों में प्रभु यीशु मसीह के लिए कोई जगह नहीं है । प्रभु यीशु मसीह कहते हैं - मनुष्य का जीवन उसकी संपत्ति की बहुतायत से नहीं होता । वह कहते हैं कि - यदि मनुष्य सारे जगत को प्राप्त कर ले और अपनी आत्मा की हानि उठाए तो उसे कुछ भी लाभ नहीं (मत्ती 16:26) । वचन कहता है कि हम इस जगत में न तो कुछ लाए हैं, न कुछ ले जाएंगे। अय्यूब कहता है - ``मैं अपनी मां के पेट से नंगा निकला और नंगा लौट जाऊं गा'' (अय्यूब 1:21) । संसार की सफलता से कुछ नहीं होगा । आर्थिक सम्पन्नता से कुछ नहीं होगा। भोग-विलास के साधनों को जुटा लेने से कुछ नहीं होगा । यदि हमारे जीवन में प्रभु यीशु मसीह के लिए जगह नहीं है, तो हम चाहे कितने भी सफल हों, हमारा उद्धार नहीं होगा ।

2. बीच का रास्ता या समझौते का रास्ता स्वर्ग नहीं ले जाता :- अक्सर ऐसा समय आता है कि जब हम आत्मिकता और सांसारिकता से समझौता करके बीच का कोई रास्ता निकाल लेते हैं । सराय के मालिक ने यूसुफ और मरियम को वापिस लौटा नहीं दिया । उसने कहा कि सराय में तो जगह नहीं है परन्तु एक बीच का रास्ता है, और वह यह कि गौशाले में ठहर जाओ।

हमारे जीवनों में अक्सर ऐसा ही होता है कि हम बीच का रास्ता निकालते हैं। हम सांसारिकता और धार्मिकता के बीच का कोई मार्ग ढूंढने का प्रयास करते हैं । हम दो नावों की सवारी करते हैं । हम सोचते हैं कि कोई ऐसा रास्ता निकल आए जिससे कि हम संसार में सफल हो जाएं और परमेश्वर को भी प्रसन्न कर सकें । परन्तु प्रकाशित वाक्य 3:15-17 में लौदीकिया की कलीसिया से प्रभु यीशु मसीह कहता है- ``मैं तेरे कामों को जानता हूं कि तू न तो ठंडा है और न गर्म : भला होता कि तू ठंडा या गर्म होता । सो इसलिये कि तू गुनगुना है, और न ठंडा है और न गर्म, मैं तुझे अपने मुंह में से उगलने पर हूं । तू जो कहता है, कि मैं धनी हूं, और धनवान हो गया हूं, और मुझे किसी वस्तु की घटी नहीं, और यह नहीं जानता, कि तू अभागा और तुच्छ और कंगाल और अंधा, और नंगा है'' ।

यूरोप की एक लोग कथा है कि एक बार पशुओं और पक्षियों के बीच युद्ध हुआ। इस युद्ध में चमगादड़ भी शामिल था । जब पशु जीतने लगते तो चमगादड़ पैरों से चलने लगता और जब पक्षी जीतने लगते तो चमगादड़ परों से उड़ने लगता और पक्षियों के दल में शामिल हो जाता ।

हमारे साथ कितनी ही बार ऐसा होता है कि हम सांसारिकता और धार्मिकता के बीच का रास्ता चुनते हैं । परन्तु प्रभु यीशु मसीह कहते हैं कि यदि तुम मेरे साथ नहीं तो मेरे विरोध में हो । यदि तुम मेरे साथ नहीं बटोरते तो बिखराते हो । तुम शैतान की मेज और परमेश्वर की मेज, दोनों में सहभागी नहीं हो सकते । इसीलिए हम सराय के मालिक के समान बीच का रास्ता न अपनाएं । यह बीच का रास्ता हमें स्वर्ग नहीं ले जा सकता । हम प्रभु यीशु मसीह के साथ-साथ चलें, जिससे कि अनन्त जीवन को प्राप्त कर सकें ।

3. जीवन में अतिव्यस्तता हमारी आत्मा के लिए घातक होती है :- जीवन की अत्यधिक व्यस्तता हमारे लिए, हमारे जीवन के लिए, हमारी आत्मा के लिए, हमारे परिवारों के लिए घातक हो सकती है । अक्सर हम अपने जीवनों में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि जो बात वास्तव में प्राथमिक है, प्रमुख है, जो बात परमेश्वर की दृष्टि में महत्वपूर्ण है, वह हमारे जीवनों में महत्वहीन हो जाती है । इसके विपरीत जो कुछ परमेश्वर के लिए महत्वहीन है, वह हमारे लिए महत्वपूर्ण हो जाता है ।

मेरे पिता अक्सर यह कहा करते थे कि जब वे बहुत कम उम्र के थे तभी उनके पिता की मृत्यु हो गई । उन्हें हमेशा यह अहसास पीड़ा देता था कि वे अपने पिता के साथ समय नहीं बिता पाए । एक बार सफर के दौरान मेरे एक मित्र जो राजनीति में हैं मुझसे कहने लगे कि मैं राजनीति में इतना लिप्त हो गया, बड़े-बड़े पदों पर मैं रहा, बहुत व्यस्त रहा कि मेरा बेटा कब ६ माह का था और कब वह 6 फुट का हो गया, मुझे पता ही नहीं चला । मेरे एक परिचित हैं जो पैसा कमाने के लिए विदेश चले गए और 20 वर्षों तक विदेश में रहे । वहां उन्होंने बहुत पैसा कमाया परन्तु जब लौटकर आए तो उन्हें पता चला कि उनके माता-पिता की मृत्यु हो चुकी है, उनकी बहन की ज़िन्दगी बर्बाद हो गई है और उनका भाई ड्रग ऐडिक्ट बन गया है । जीवन में इतना सब कमाने के बाद भी वे खाली हाथ हैं ।

हमारी गॉस्पल कैरियर्स टीम में मेरे साथ भाई फ्रैंक हेरीसन हैं जो न सिर्फ्र हमारी संस्था के मैनेजर हैं बल्कि मेरे मित्र भी हैं । एक बार हम लोग लखनऊ में आत्मिक सभाओं के लिए गए थे । जब हम अपनी यात्रा में थे तो वे मुझसे कहने लगे कि उन्हें अक्सर बहुत खराब लगता है कि वे अपने पिता के साथ बिल्कुल समय नहीं बिता पाते । जब भी वे टीम के साथ यात्रा में जाते हैं, तो चूंकि पिता पासबान हैं, वे उनका आशीर्वाद लेकर, उनसे मिलकर जाते हैं । परन्तु इस बार इतनी व्यस्तता रही कि वे अपने पिता से न मिल पाए । जब हम लोग वापिस लौटे तो हमारे लौटने के पहले ही उसी शाम भाई फ्रैंक के पिता की मृत्यु हो चुकी थी । कुछ वर्ष पहले मेरे पिता की मृत्यु हुई । वे 59 वर्ष के थे और कैन्सर से उनकी मृत्यु हो गई । मुझे भी इस बात का अहसास रहा कि जीवन में, अपनी सेवकाई में वे भी इतने व्यस्त रहे और मैं भी इतना व्यस्त रहा कि जो समय हमें साथ बिताना चाहिए था, वह नहीं बिता पाए ।

आज पैसा कमाने की धुन में, बड़े-बड़े पदों को पाने की धुन में, अपने कार्यों की व्यस्तता में, ज़िम्मेदारियों को पूरा करने में हमारा जीवन किसी मशीन के समान हो जाता है । इस कारण हमारे जो सम्बन्ध हैं वे निगेटिव हो जाते हैं, वे गौण हो जाते हैं ।

हॉलमन हन्ट की एक बहुत प्रसिद्ध पेन्टिंग है जो उसने यूरोप में बनाई थी । इस चित्र में प्रभु यीशु मसीह द्वार पर खड़ा है और खटखटा रहा है । एक बार एक प्रदर्शनी में यह पेन्टिंग लगी हुई थी । एक बेटा अपने पिता के साथ यह प्रदर्शनी देखने गया। बच्चे अक्सर ऐसे प्रश्न पूछ लेते हैं जिनका जवाब हम माता-पिता नहीं दे पाते । इस पेन्टिंग को देखते हुए बेटे ने अपने पिता से पूछा कि डैडी, प्रभु यीशु मसीह दरवाज़ा खटखटा रहा है तो लोग दरवाज़ा क्यों नहीं खोल रहे हैं ? पिता के पास कोई जवाब नहीं था । उसने कहा मुझे भी नहीं मालूम बेटा कि लोग दरवाज़ा क्यों नहीं खोलते। उसके बाद पिता थोड़ी देर तक सोचता रहा । फिर उसने कहा कि मैं तुम्हें बताता हूं कि ऐसा क्यों है । शायद भीतर इतना शोर है कि जब प्रभु यीशु मसीह खटखटाता है तो उसकी खटखटाहट की आवाज़ उनके कानों तक नहीं पहुंचती।

कितनी बार हमारे साथ भी ऐसा होता है । प्रभु यीशु मसीह हमारे दिल के दरवाज़े को खटखटाता है। परन्तु सांसारिकता की दौड़ में, जीवन की आपाधापी में, धन और पद प्राप्ति के लोभ में हम इतने व्यस्त हैं कि प्रभु यीशु मसीह की खटखटाहट की आवाज़ हमको सुनाई नहीं देती । हमें अपने जीवनों में प्रभु यीशु मसीह को प्रमुख स्थान देना है । प्रभु यीशु मसीह ने यूहन्ना 14 में कहा - मैं तुम्हारे लिए जगह तैयार करने जाता हूं कि जहां मैं रहूं वहां तुम भी रहो । जब न्याय का दिन आएगा तो कुछ लोग दाहिनी तरफ होंगे और कुछ लोग बांयी तरफ । जो लोग बांयी तरफ होंगे प्रभु यीशु मसीह उनसे कहेगा मैं तुम्हें नहीं जानता । जो दाहिनी तरफ होंगे प्रभु यीशु मसीह उनसे कहेगा - हे अच्छे और विश्वासयोग्य दास, तू थोड़े में विश्वासयोग्य रहा । आ, अपने स्वामी के आनन्द में सहभागी हो जा।

बाइबिल में कुछ अभागे लोगों का वर्णन मिलता है । उनमें से एक है यहूदा इस्करियोती, जो प्रभु यीशु मसीह के साथ-साथ रहा । जो प्रभु यीशु मसीह की रोटी में से खाता था। जो यीशु मसीह का परम मित्र था। जिसने प्रभु यीशु मसीह के आश्चर्यकर्मों को देखा था । जिसने देखा था कि कैसे प्रभु यीशु मसीह ने आवाज़ दी और मुर्दा लाज़र क़ब्र में से निकल आया । उसी यहूदा ने प्रभु यीशु मसीह को बेच दिया । उसके लिए 30 चांदी के टुकड़े प्रमुख हो गए और प्रभु यीशु मसीह व्यर्थ हो गया ।

क्रूस के नीचे कुछ सिपाही बैठे हुए थे और प्रभु यीशु मसीह क्रूस पर लटका हुआ था । परमेश्वर का एकलौता पुत्र, जगत का उद्धारकर्त्ता क्रूस पर लटका हुआ था । उसका रुधिर बह रहा था । ये सिपाही उस क्रूस की छाया में बैठकर चिटि्ठयां डाल रहे थे, उन चिन्दियों के लिए कि प्रभु यीशु मसीह के कपड़े किसको मिल जाएं।

जब प्रभु यीशु मसीह का जन्म हुआ तो गड़ेरिये भी आए और ज्योतिषी भी आए । परन्तु ऐसा कहीं नहीं लिखा हुआ कि सराय का मालिक आया । सराय के गौशाले में यीशु का जन्म हुआ परन्तु सराय का मालिक यीशु के पास नहीं आया। हम भी शायद ऐसे अभागे लोग हैं जो क्रूस की छाया में बैठते तो हैं, जो प्रभु यीशु मसीह की निकटता में चलते तो हैं, जो उसके वचनों को सुनते तो हैं । परन्तु वास्तव में हमारे दिलों में, हमारे जीवन में, हमारे कार्यों में प्रभु यीशु मसीह के लिए स्थान नहीं है । आवश्यकता इस बात की है कि हम प्रभु यीशु मसीह को स्थान दें, जिससे कि हम भी अनन्त काल के लिए उसके राज्य में प्रवेश कर सकें ।

अक्सर हमारा ध्यान देखे हुए सच की ओर जाता है । संसार का सच, जो दिखाई देता है, उसे हम देखते हैं; परन्तु आत्मा का सच, जो अनदेखा है, उसे नहीं देखते। पौलुस कहता है - हम तो उन बातों को देखते रहते हैं जो दिखाई नहीं देतीं। क्योंकि हम जानते हैं कि देखा हुआ सच समाप्त हो जाएगा, पर अनदेखा सच बना रहेगा ।

एक सच है शरीर का जो दिखाई देता है, एक सच है आत्मा का जो दिखाई नहीं देता । एक सच है फूल का जो दिखाई देता है, एक सच है उसकी सुगन्ध का जो दिखाई नहीं देता । एक सच है पानी की बूंदों का जो दिखाई देता है, एक सच है हवा के बहने का जो दिखाई नहीं देता । एक सच है आंखों के आंसुओं का जो दिखाई देता है, एक सच है हृदय की पीड़ा का जो दिखाई नहीं देता । एक सच है मां का जो दिखाई देता है, एक सच है मां की ममता का जो दिखाई नहीं देता। एक सच है शरीर का जो दिखाई देता है, एक सच है भावनाओं का जो दिखाई नहीं देता। एक सच है इमारत का जो दिखाई देता है, एक सच है बुनियाद का जो दिखाई नहीं देता । एक सच है मुस्कराहट का जो दिखाई देता है, एक सच है प्यार का जो दिखाई नहीं देता ।

निष्कर्ष :- अक्सर हमारा ध्यान सिर्फ्रदेखे हुए सच की ओर अटक जाता है और परमेश्वर के लिए, प्रभु यीशु मसीह के लिए हमारे दिल में कोई स्थान नहीं होता। परन्तु परमेश्वर हमें मौका देता है कि हम अपने हृदयों में उसको स्थान दें । जब क्रिसमस आता है तो मानो प्रभु यीशु मसीह एक बार फिर से हमारे परिवार के दरवाज़ों को, हमारे दिलों के दरवाज़ों को खटखटाता है । परन्तु भीतर इतना शोर है कि हमको उसके खटखटाने का शब्द सुनाई नहीं देता । इस बार जब यह क्रिसमस आए तो मैं आपसे यही कहना चाहता हूं कि प्रभु यीशु मसीह के खटखटाने का शब्द हम सुनें। इस उत्सव को बड़े आनन्द से मनाएं परन्तु साथ ही प्रभु यीशु मसीह को अपने हृदयों में स्थान दें । उस सराय के मालिक के समान ऐसा न हो कि हम उसकी निकटता में तो हों, पर उसमें न रहें । उसके पास तो हों, पर उसके दर्शन से वंचित रह जाएं। परमेश्वर हम सबको आशीष दे कि हम परमेश्वर के सच को पहचानें । उसे अपने जीवनों में ग्रहण करें। उसे अपनी आत्मा में उतारें और उसके बताए हुए मार्ग पर चलें।

परमेश्वर आपको आशीष दे ।