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प्रभु यीशु के सात पत्र - समझौते का रास्ता

परिचय :- इस श्रृंखला में हम प्रकाशितवाक्‍य में वर्णित सात कलीसियाओं का अध्‍ययन कर रहे हैं। ये सात कलीसियाएं उन दिनों के एशिया माइनर में पाई जाती थीं। तीसरी कलीसिया जिसके नाम प्रभु यीशु मसीह अपना सन्‍देश देता है, उसका वर्णन प्रकाशितवाक्‍य 2:12-17 में पाया जाता है ;

“और पिरगमुन की कलीसिया के दूत को यह लिख कि, जिस के पास दोधारी और चोखी तलवार है, वह यह कहता है, कि मैं यह तो जानता हूं, कि तू वहां रहता है जहां शैतान का सिंहासन है, और मेरे नाम पर स्‍थिर रहता है; और मुझ पर विश्‍वास करने से उन दिनों में भी पीछे नहीं हटा जिन में मेरा विश्‍वासयोग्‍य साक्षी अन्‍तिपास, तुम में उस स्‍थान पर घात किया गया जहां शैतान रहता है। पर मुझे तेरे विरुद्ध कुछ बातें कहनी हैं, क्‍योंकि तेरे यहां कितने तो ऐसे हैं, जो बिलाम की शिक्षा को मानते हैं, जिस ने बालाक को इस्राएलियों के आगे ठोकर का कारण रखना सिखाया, कि वे मूरतों के बलिदान खाएं, और व्‍यभिचार करें। वैसे ही तेरे यहां कितने तो ऐसे हैं, जो नीकुलइयों की शिक्षा को मानते हैं। सो मन फिरा, नहीं तो मैं तेरे पास शीघ्र ही आकर, अपने मुख की तलवार से उन के साथ लड़ूंगा। जिस के कान हों, वह सुन ले कि आत्‍मा कलीसियाओं से क्‍या कहता है; जो जय पाए, उस को मैं गुप्‍त मन्‍ना में से दूंगा, और उसे एक श्‍वेत पत्‍थर भी दूंगा; और उस पत्‍थर पर एक नाम लिखा हुआ होगा, जिसे उसके पाने वाले के सिवाय और कोई न जानेगा”।

पिरगमुन शहर उन दिनों में इफिसुस से 15 मील उत्‍तर की ओर था। यह एशिया की राजधानी हुआ करता था। पिरगमुन की आबादी उस समय लगभग 1 लाख 60 हज़ार थी। उन दिनों में दुनिया का सबसे बड़ा पुस्‍तकालय पिरगमुन में था, जहां पर दो लाख हस्‍त लिखित पुस्‍तकें थीं। उस समय तक प्रिटिंग प्रेस का अविष्‍कार नहीं हुआ था अत: ये पुस्‍तकें विद्वानों के द्वारा हाथ से लिखी गई थीं। उस समय तक कागज़ का अविष्‍कार नहीं हुआ था। उन दिनों में लिखने के लिए पेड़ों की छाल का उपयोग होता था, जिसे स्‍क्रोल्‍स कहते थे।

पिरगमुन में एक और प्रयोग हुआ था और वहां पार्चमेंट का अविष्‍कार किया गया था। पार्चमेंट कागज़ के समान ही होता था और यह जानवरों की सूखी त्‍वचा से बनता था, इस पर लिखा जा सकता था, इस पर चित्र बनाये जा सकते थे, बहुत से लेखकों ने इतिहास को लिखने में इसी पार्चमेंट पेपर का उपयोग किया। पिरगमुन और पार्चमेंट का अर्थ ग्रीक भाषा में एक ही है, पिरगमुन का नाम इसी कारण पड़ा था क्‍योंकि पार्चमेंट का आविष्‍कार यहीं हुआ था। परन्‍तु इससे भी प्रमुख बात जो है वह यह कि यहां पर चार सबसे प्रमुख मन्‍दिर थे।

1. कैसर का मन्‍दिर:- उन दिनों के रोमी सम्राज्‍य में धर्म और राज्‍य को अलग नहीं किया जा सकता था। राज्‍य के निवासियों के लिए अनिवार्य था कि वे कैसर की पूजा, उपासना करें। मसीहियों को दण्‍ड इसलिए नहीं दिया जाता था कि वे मसीही थे और वे प्रभु यीशु मसीह की आराधना करते थे परन्‍तु उनको दण्‍ड इसलिए दिया जाता था क्‍योंकि वे यह नहीं कहते थे कि कैसर ही प्रभु है, कैसर ही परमेश्‍वर है।

2. डायोनिसियस का मन्‍दिर:- उन दिनों में भोग विलास के देवता की उपासना की जाती थी जिसका नाम डायोनिसियस था, वह खाने-पीने का देवता हुआ करता था।

3. एसक्‍लेपियस का मन्‍दिर:- इस मन्‍दिर में चंगाई देने वाले देवता एसक्‍लेपियस की उपासना की जाती थी और इस मन्‍दिर में हज़ारों और लाखों रोगी आते थे। यहां तक कि उस समय का सम्राट औगस्‍तुस कैसर भी निरन्‍तर इस मन्‍दिर में आता था क्‍योंकि वह इतनी ज़्‍यादा शराब पीने लगा था कि वह अत्‍यन्‍त कमज़ोर हो गया था और चंगाई की आशा में इस मन्‍दिर में आता था। इस मन्‍दिर का चिन्‍ह यह था कि एक सांप लंगर पर चढ़ रहा है और आज भी मेडिकल साइंस में इस चिन्‍ह का उपयोग किया जाता है।

4. अथेना का मन्‍दिर:- अथेना देवी ज्ञान और कला की देवी थी। ठीक उसी प्रकार जैसे आज हमारे देश में सरस्‍वती को ज्ञान की देवी माना जाता है।

यदि आज हमें पिरगमुन जाना हो तो दिल्‍ली से तुर्किस्‍तान जाना पड़ेगा और वहां से पिरगमुन शहर, जिसे आज बरगामा के नाम से जाना जाता है, जाया जा सकता है।

पिरगमुन की कलीसिया और हमारे लिए प्रभु यीशु मसीह के इस सन्‍देश को हम चार भागों में बांट सकते हैं।

1. प्रभु यीशु मसीह स्‍वयं अपना परिचय देता है:- इससे पहले कि लोग प्रश्‍न उठाएं कि कलीसियाओं को सन्‍देश देने वाले तुम होते कौन हो? तुम किस अधिकार से कलीसियाओं को सन्‍देश देते हो? उससे पहले, अपने हर सन्‍देश से पूर्व प्रभु यीशु मसीह बताता है कि उसके पास कौन सा अधिकार है, जिसके आधार पर वह इन कलीसियाओं को सन्‍देश दे रहा है। वह सबसे पहले अपना परिचय देता है; और अपने परिचय में वह चार बातें कहता है;

1. जिसके पास दोधारी और चोखी तलवार है:- प्रभु यीशु मसीह कहता है;

“पिरगमुन की कलीसिया के दूत को यह लिख कि जिसके पास दोधारी और चोखी तलवार है, वह यह कहता है” (प्रकाशितवाक्‍य 2:12) ।

उन दिनों में दोधारी तलवार को सबसे ख़तरनाक हथियार माना जाता था। ठीक वैसे ही जैसे आज के समय में परमाणु बम या मिसाइल्‍स्‌ हैं। जिसके पास अधिकार है, जिसके पास वचन की दोधारी तलवार है, जिसके पास चोखी तलवार है; वह कहता है। मत्‍ती 28:18 में प्रभु यीशु मसीह कहता है;

“स्‍वर्ग और पृथ्‍वी का सारा अधिकार मुझे दिया गया है”।

प्रभु यीशु मसीह कहता है कि मैं तुमसे अधिकार से कहता हूं। सारी पृथ्‍वी पर और सारे स्‍वर्ग का अधिकार परमेश्‍वर ने मुझको दिया है। यह जो दोधारी तलवार है, वह मेरा वचन है (इब्रानियों 4:12) और इस अधिकार से मैं तुम्‍हारे पास आता हूं।

2. वह कहता है मैं यह जानता हूं:- 13वें पद में प्रभु यीशु मसीह कहता है;

“मैं यह तो जानता हूं कि तू वहां रहता है जहां शैतान का सिंहासन है”।

यह बात हम सभी कलीसियाओं में पाते हैं। प्रभु यीशु मसीह इफिसुस की कलीसिया से कहता है - मैं तेरे काम और परिश्रम और धीरज को जानता हूं। स्‍मुरना की कलीसिया से वह कहता है - मैं तेरे क्‍लेश और दरिद्रता को जानता हूं, और पिरगमुन की कलीसिया से वह कहता है - मैं यह जानता हूं कि तू कहां रहता है।

बार-बार प्रभु यीशु मसीह कहता है मैं जानता हूं क्‍योंकि वह सर्वज्ञानी है। वह जानता है कि हमारे दिल में क्‍या है, हमारे विचारों में क्‍या है, हमारे इरादे क्‍या हैं, हमारी क्‍या इच्‍छाएं हैं और हमारे जीवन के कोई भी पाप प्रभु यीशु मसीह से छुपे हुए नहीं हैं।

इब्रानियों 4:12-13 में लेखक कहता है;

“क्‍योंकि परमेश्‍वर का वचन जीवित, और प्रबल, और हर एक दोधारी तलवार से भी बहुत चोखा है, और जीव और आत्‍मा को, और गांठ -गांठ, और गूदे-गूदे को अलग करके, आर-पार छेदता है; और मन की भावनाओं और विचारों को जांचता है। और सृष्‍टि की कोई वस्‍तु उससे छिपी नहीं है वरन्‌ जिस से हमें काम है, उसकी आंखों के सामने सब वस्‍तुएं खुली और बेपरद हैं”।

प्रभु यीशु मसीह के सामने हमारे विचार, हमारी भावनाएं, हमारा मन; कोई भी बात छिपी नहीं है।

3. मुझे तेरे विरुद्ध कुछ बातें कहना है:- 14वें पद में प्रभु यीशु मसीह कहता है;

“मुझे तेरे विरुद्ध कुछ बातें कहना है”

प्रभु यीशु मसीह जिसके पास अधिकार है, जो सर्वज्ञानी है वह कहता है कि, ‘मुझे तेरे विरुद्ध कुछ बातें कहना है’। जिसके कान हो वह सुन ले, वह न्‍याय करने वाला है। जो व्‍यक्‍ति हमारा न्‍याय करने वाला है वह सब बातों को जानता है। प्रश्‍न यह है कि हमारे लिये यह आनंद की बात है या पीड़ा की बात है।

अगर कोई न्‍यायाधीश हो, जिसके सामने हम गुनाहगार के रूप में खड़े हैं, एक दोषी के रूप में खड़े हैं और हमें यह लगे कि वह हमारी सब बातें जानता है तो यदि हम निर्दोष हैं तो हमारे लिये यह आनन्‍द की बात होगी; क्‍योंकि हमें यह मालूम है कि हमारा जो

अधिकारी है, हमारा जो न्‍यायी है, वह सब बातों को जानता है इसलिए वह सही न्‍याय करेगा। परन्‍तु यदि हम दोषी हैं, यदि हमने झूठे गवाह खड़े कर लिए हैं, यदि हमने अपने आपको बचाने के लिए अपनी ओर से सारी तैयारी कर ली है, यदि हमारे मन में कुछ और है और दिखाई कुछ और देता है और हमें यह भी मालूम है कि हमारा जो न्‍यायी है, वह सब बातें जानता है तो हमारे लिये यह भय से कांपने की बात है। जो स्‍वामी है, अधिकारी है, जो न्‍यायी है वह सब बातें जानता है, उसके न्‍याय से हम बच नहीं सकते।

4. चेत जा:- प्रकाशितवाक्‍य 2:5 में वह कहता है;

“सो चेत जा” और 2:16 में कहता है- “सो मन फिरा”।

वह अवसर देने वाला प्रभु है और आज भी हमारे लिये यह आनन्‍द की बात है कि वह हमको अवसर देता है।

1 यूहन्‍ना1:8-10 में लिखा है;

“यदि हम कहें, कि हम में कुछ भी पाप नहीं, तो अपने आप को धोखा देते हैं : और हम में सत्‍य नहीं। यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने, और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्‍वासयोग्‍य और धर्मी है। यदि हम कहें कि हम ने पाप नहीं किया, तो उसे झूठा ठहराते हैं, और उसका वचन हम में नहीं है”।

वह क्षमा करने वाला है, वह विश्‍वासयोग्‍य है, वह अवसर देने वाला है और इस अधिकार से वह पिरगमुन की कलीसिया को अपना सन्‍देश देता है।

2. प्रभु यीशु पिरगमुन की कलीसिया की प्रशंसा करता है:- पिरगमुन की कलीसिया की जो प्रशंसनीय बातें हैं, जिन बातों को देखकर प्रभु यीशु प्रसन्‍न होता है वह उनकी चर्चा करता है।

13वें पद में वह कहता है; ‘तू वहां रहता है जहां शैतान का सिंहासन है’। पिरगमुन में तथाकथित देवी देवताओं के इतने अधिक मन्‍दिर थे कि वहां की जनसंख्‍या से ज़्‍यादा वहां पर मूर्तियां थीं, जिनकी लोग उपासना करते थे। प्रभु यीशु कहता है, मैं जानता हूं कि यह कठिन स्‍थान है, जहां पर विभिन्‍न देवी-देवताएं और विभिन्‍न मान्‍यताएं हैं, जहां पर शासन बाध्‍य करता है कि राजा की उपासना की जाए, यह कहा जाए कि कैसर ही ईश्‍वर है। जहां पर यह समझौता करने के लिये दबाव है कि कैसर को मान लो और उसके बाद फिर जो चाहो वह करो।

परन्‍तु प्रभु यीशु मसीह कहता है; “मैं यह तो जानता हूं, कि तू वहां पर रहता है जहां शैतान का सिंहासन है, और मेरे नाम पर विश्‍वास करने से उन दिनों में भी पीछे नहीं हटा जिनमें मेरा विश्‍वासयोग्‍य साक्षी अन्‍तिपास तुम में उस स्‍थान पर घात किया गया जहां शैतान रहता है” (प्रकाशितवाक्‍य 2:13)।

प्रभु यीशु मसीह कहता है कि मेरे नाम पर तू स्‍थिर रहता है और सताव में तूने समझौता नहीं किया। प्रभु यीशु मसीह उदाहरण देता है अन्‍तिपास का, जो सेवक था, जिसने समझौता नहीं किया और उसका परिणाम यह हुआ कि उसे मार डाला गया।

मत्‍ती रचित सुसमाचार 10:33 में लिखा है;

“जो कोई मनुष्‍यों के साम्‍हने मेरा इन्‍कार करेगा, मैं भी अपने स्‍वर्गीय पिता के साम्‍हने उसका इन्‍कार करूंगा”।

बार-बार हम इतिहास में यह बात पाते हैं कि जहां समझौता नहीं किया जाता है, वहां गवाही होती है। जहां पर हम परमेश्‍वर में बने रहते हैं, उसके विश्‍वास में दृढ़ रहते हैं, उसकी गवाही में स्‍थिर रहते हैं, वहां पर परमेश्‍वर की गवाही होती है। चीन में हम पाते हैं कि माओ त्‍से तुंग द्वारा जब मसीहियों पर सताव आया तो सबसे तेज़ी से कलीसिया, चीन में बढ़ी। कलीसिया के इतिहास को देखें तो जब-जब मसीहियों पर सताव आया है तब-तब उस क्षेत्र में, उस देश में कलीसियाओं की बहुत तेज़ी से वृद्धि हुई है।

प्रारम्‍भिक कलीसिया के बारे में हम पाते हैं, जहां पर सबसे ज़्‍यादा सताव आया, जहां के अगुवों को मार डाला जाता था हम पाते हैं कि सबसे तेज़ी से प्रारम्‍भिक कलीसिया ही बढ़ी। लिखा है; प्रतिदिन कलीसिया में लोग मिलाये जाते थे।

3. प्रभु यीशु मसीह कमज़ोरियों के प्रति चेतावनी देता है:- प्रभु यीशु मसीह पिरगमुन की कलीसिया को उनकी कमज़ोरियां बताता है। जो बातें कलीसिया में प्रभु यीशु मसीह की दृष्‍टि में उचित नहीं हैं, जो बातें कलीसिया का विनाश कर सकती हैं, जो बातें हमारी आत्‍मा को बर्बाद कर सकती हैं, जो हमको नरक की आग में ढ़केल सकती हैं; उन बातों की प्रभु यीशु मसीह यहां चर्चा करता है। वह कहता है;

“तेरे यहां तो कितने ऐसे हैं जो बिलाम की शिक्षा को मानते हैं... वैसे ही तेरे यहां तो कितने ऐसे हैं जो नीकुलइयों की शिक्षा को मानते हैं”।

जिन बातों से प्रभु यीशु मसीह नाराज़ है, जो बातें प्रभु यीशु मसीह कलीसिया के विरोध में कह रहा है वे यह कि तेरे यहां तो कितने ऐसे हैं। इसका अर्थ यह है कि कुछ लोग ऐसे हैं जो तेरी कलीसिया में सदस्‍य तो हैं पर बिलाम और नीकुलइयों की शिक्षा को मानते हैं, जो झूठे शिक्षकों की बातों पर चलते हैं। हम देखें कि बिलाम और नीकुलइयों की शिक्षा क्‍या थी।

1. बिलाम की शिक्षा:- इस घटना का वर्णन हम गिनती की पुस्‍तक के 22वें, 25वें और 31वें अध्‍याय में पाते हैं।

बालाक; मोआब देश का राजा था और वह इस्राएलियों से डरता था क्‍योंकि उसे भय था कि यदि इस्राएली आ जाएंगे तो वे उसे नाश कर देंगे। क्‍योंकि उनमें बड़ी शक्‍ति और सामर्थ्‍य है। वह यह जानता था कि परमेश्‍वर की आशीष उनके साथ है। बिलाम जो परमेश्‍वर का भविष्‍यवक्‍ता था, उसको बुलाने के लिये बालाक ने अपने लोगों को भेजा। बालाक ने सोचा कि जब बिलाम आ जाएगा तो उसको मैं लालच दूंगा और उससे कहूंगा कि इस्राएलियों को श्राप दे ताकि इस्राएली समाप्‍त हो जाएं और इस्राएलियों की सेना कमज़ोर हो जाए।

पहली बार जब बालाक के लोग बिलाम के पास गए तो बिलाम नहीं आया। बालाक ने दोबारा अपने आदमी भेजे और तब बिलाम उसके पास आया और बालाक ने उससे कहा कि तू इस्राएलियों को श्राप दे क्‍योंकि यदि तू श्राप देगा तो ये नाश हो जाएंगे। जिसको तू श्राप देता है वह नाश हो जाता है और जिसको तू आशीष देता है, वह बढ़ जाता है। और तब राजा बिलाम को रिश्‍वत देने की बात करता है। गिनती 22:7 में लिखा है;

“मैं निश्‍चय तेरी प्रतिष्‍ठा करूंगा और जो कुछ तू मुझसे कहे वही मैं करूंगा। पर तू इस्राएलियों को श्राप दे”।

उसके बाद परमेश्‍वर का वचन बिलाम के पास पहुंचा कि तू इस्राएलियों को श्राप मत दे परन्‍तु आशीष दे और बिलाम ने इस्राएलियों को श्राप नहीं दिया वरन्‌ आशीष दी। उसके बाद वह बालाक के पास गया और उसने बालाक से कहा, मैं तो भविष्‍यवक्‍ता हूं, मुझे तो इस्राएलियों को आशीष देना होगी। क्‍योंकि परमेश्‍वर जो कहेगा उसको मुझे मानना है। परन्‍तु तुझे मैं एक रास्‍ता बताता हूं, यदि तुझे इसा्रएलियों को कमज़ोर करना है तो मुझे आशीष देने तो दे परन्‍तु तू एक काम कर कि जो मोआबी लड़कियां हैं उन्‍हें इस्राएलियों के पास भेज दे ताकि वे उनके साथ कुकर्म करें और मूरतों के आगे चढ़ा हुआ प्रसाद उनको खाने को दे ताकि वे परमेश्‍वर की आज्ञा का उल्‍लघंन करें। जब वे लोग आज्ञा का उल्‍लघंन करेंगे तो परमेश्‍वर उनको नाश कर देगा। दूसरे शब्‍दों में कहें तो बिलाम ने बालाक को यह सलाह दी कि इस्राएलियों को नाश करने के लिए वह उनके चरित्र को तोड़ दे।

गिनती 31:16 में लिखा है;

“देखो, बिलाम की सम्‍मति से, कोर के विषय में इस्राएलियों से यहोवा का विश्‍वासघात इन्‍हीं ने कराया और यहोवा की मण्‍डली में मरी फैली”।

प्रकाशितवाक्‍य 2:14 में इन्‍हीं बातों का सार लिखा हुआ है कि बिलाम इस्राएलियों को श्राप न दे पाया तो उसने राजा बालाक को सलाह दी कि इस्राएलियों को यज्ञ का प्रसाद खिला दे और मोआबी लड़कियों को भेज दे कि वे उनसे कुकर्म करें। यदि हम उन्‍हें बल से नहीं हरा पाएंगे तो उनके चरित्र को तोड़ देंगे। इस बात से परमेश्‍वर का प्रकोप भड़का, चौबीस हज़ार इस्राएलियों की हत्‍या कर दी गई और वे नाश हो गए।

जो बिलाम की शिक्षा है वह यह है कि परमेश्‍वर के वचन में संसार की बातों को मिला दो। आत्‍मिकता का सांसारिकता से समझौता कर दो।

2. नीकुलइयों की शिक्षा:- प्रेरितों के काम 6:5 में हम पाते हैं कि कलीसिया में जो सात सेवक चुने गए उनमें से सातवां सेवक नीकुलाउस था। यह कलीसिया का सेवक था और आगे चलकर यह मसीही सिद्धान्‍तों से भटककर ग़लत सिद्धान्‍तों में पड़ गया। उसने एक नई शिक्षा शुरू की जिसके अनुसार उसका यह कहना था कि आत्‍मा और शरीर अलग-अलग है। शरीर तो भ्रष्‍टाचारी है, श्रापित है और यह नाश होने वाला है। परन्‍तु आत्‍मा अमर है, आत्‍मा परमेश्‍वर का दिया हुआ दान है। जब हम प्रभु यीशु मसीह को ग्रहण कर लेते हैं तो हमारी आत्‍मा बच गई। अब शरीर रह गया है जो कि भ्रष्‍ट है और जिसे क़ब्र में जाना है। क्‍योंकि शरीर तो नाशवान है इसलिए हम शरीर के साथ कुछ भी करें, सब ठीक है।

इस शिक्षा के अनुसार कोई व्‍यक्‍ति एक से अधिक पत्‍नियों को रख सकता था। इस शिक्षा के कारण उनका मानना था कि शरीर के साथ कुछ भी करो आत्‍मा पर उसका प्रभाव नहीं पड़ेगा। यीशु मसीह को ग्रहण कर लिया तो आत्‍मा सुरक्षित हो गई और अब शरीर के जो पाप हैं, चाहे वे नशीली वस्‍तुएं हों या व्‍यभिचार या शरीर का कैसा भी दुरुपयोग हो; वह सब ठीक है क्‍योंकि शरीर तो नाशवान है और क़ब्र में जाने वाला है।

पिरगमुन की कलीसिया के माध्‍यम जो बात प्रभु यीशु मसीह हम से कहना चाहता है वह यह कि हमको मसीही जीवन में समझौता नहीं करना है। प्रभु यीशु मसीह की शिक्षाओं को संसार के तौर-तरीकों से नहीं मिलाना है। यदि हमको प्रभु यीशु मसीह के रास्‍त्‍ो पर चलना है तो हमें संसार के रास्‍त्‍ो पर नहीं चलना है, हम समझौता करके चल नहीं सकते।

कितनी बार हमारे साथ ऐसा होता है कि हम संसार की और प्रभु यीशु मसीह की शिक्षाओं को मिला देते हैं। हम कहते हैं कि जो शरीर को भला लगे वह करते जाओ, हमने प्रभु यीशु मसीह पर विश्‍वास किया है इसलिए वह तो क्षमा कर देगा। रोटी कमाने के लिये संसार से हमको थोड़ा सा समझौता ही तो करना है, थोड़ा सा झूठ बोल दो, थोड़ा-सा भ्रष्‍टाचार कर लो, हम को बड़ा लाभ होगा। उसके बाद हम जाकर प्रभु से क्षमा मांग लेंगे, उसके सामने आंसू बहा देंगे। घूस यदि ले लेंगे तो उसमें से दस प्रतिशत चर्च में दे देंगे। पीलिया हो गया, सांप ने काट लिया है, क्‍या करें? झाड़-फूंक करवा लो। बच्‍चा यदि रो रहा है तो नज़र लग गई है, काला टीका लगा लो। हमारी समस्‍याएं नहीं जा रही हैं, ऐसा लगता है परमेश्‍वर हमारी नहीं सुन रहा है तो चलो जाकर किसी मज़ार पर चादर चढ़ा दो, हमारी मनोकामनाएं पूरी हो जाएंगी। संसार से समझौता कर लें और अपने पाप के लिए प्रभु से माफी मांगते जाएंगे क्‍योंकि प्रभु तो महान है, दयालु है, अनुग्रहकारी है।

परन्‍तु प्रभु यीशु मसीह कहता है कि इन बातों से मैं नाराज़ होता हूं, यह वह बात है जो मुझे तेरे विरोध में कहना है। वह अपनी कलीसिया में, उसकी पवित्रता में, उसकी दुल्‍हिन के चरित्र में ये बातें बर्दाश्‍त नहीं करता और हमारा प्रभु यीशु मसीह, दुनिया और शैतान की ताक़त से वाक़िफ है।

वह कहता है ये बातें ठीक नहीं हैं। मैं आऊंगा और अपनी तलवार से उनको नाश कर दूंगा। वे लोग बचेंगे नहीं, उनकी आत्‍मा का विनाश हो जाएगा। इसलिए जो बिलाम और नीकुलइयों की शिक्षा है, जो संसार और प्रभु यीशु मसीह की शिक्षाओं को जोड़ने की बात है, जो समझौते की शिक्षा है; उससे तू दूर हट जा, नहीं तो मैं तलवार चलाकर तुझे नाश कर दूंगा। प्रभु यीशु मसीह कहता है कि मेरी क्षमा को, मेरे अनुग्रह को तुम सस्‍ता मत समझो, मैं आऊंगा, और तलवार से तुम्‍हें नाश कर दूंगा।

कॉन्‍सटेंटाइन जब रोम के क्षेत्र का अधिकारी बना तो उसने कहा, मैं सब बातों में मसीह की छाप लगा दूंगा। उस समय जो मुद्रा प्रचलन में थी, उनमें एक तरफ प्रभु यीशु मसीह का चित्र हुआ करता था और दूसरी तरफ दूसरे देवता की छाप हुआ करती थी। इसका उपयोग इस प्रकार से होता था यदि कोई व्‍यक्‍ति मसीही है और उसे कुछ खरीदना होता था तो वह जब उस मुद्रा को देता था तो प्रभु यीशु मसीह के चित्र वाले भाग को ऊपर कर देता था और यदि वह मसीही नहीं होता था तो दूसरे भाग को ऊपर कर देता था।

कितनी बार ऐसा होता है कि जहां परमेश्‍वर की बात से हमें प्रतिष्‍ठा मिलती है, वहां हम परमेश्‍वर का नाम ऊंचा कर देते हैं और जहां हमें संसार से समझौता करने की बात होती है तो हम उसको हटा देते हैं। हमारे जीवन के दोनों पहलुओं में प्रभु यीशु मसीह की मोहर लगना चाहिए।

इसीलिए 1 कुरिन्‍थियों 10:21 में लिखा है;

“तुम प्रभु के कटोरे और दुष्‍टात्‍माओं के कटोरे, दोनों में से नहीं पी सकते! तुम प्रभु की मेज़ और दुष्‍टात्‍माओं की मेज़ दोनों में साझी नहीं हो सकते”।

प्रभु यीशु मसीह कहता है यदि तुम मेरे साथ नहीं हो तो तुम मेरे विरोध में हो।

व्‍यवस्‍थाविवरण 22:9-11 में लिखा है;

“अपनी दाख की बारी में दो प्रकार के बीज न बोना, ऐसा न हो कि उसकी सारी उपज अर्थात्‌ तेरा बोया हुआ बीज और दाख की बारी की उपज दोनों अपवित्र ठहरें। बैल और गदहा दोनों संग जोत कर हल न चलाना। ऊन और सन के मिलावट से बना हुआ वस्‍त्र न पहिनना”।

हमारे जीवन में कितनी बार ऐसा होता है कि हम अपनी दाख की बारी में दो प्रकार के बीज लगाते हैं, हम अपने हलों में बैल और गदहे को संग जोत देते हैं और हम ऊन और सन से मिला हुआ वस्‍त्र पहनते हैं ।

4. वह एक और अवसर देने वाला परमेश्‍वर है:- बार-बार जब प्रभु यीशु मसीह कलीसियाओं की कमज़ोरियां बताता है तो वह कहता है सो मन फिरा, सो चेत जा, सो जाग जा। मन फिरा! क्‍यों? क्‍योंकि अभी भी अवसर है। परमेश्‍वर नहीं चाहता कि कोई भी नाश हो, परमेश्‍वर हम से अटूट और असीम प्रेम रखता है और इसीलिए वह बार-बार कहता है सो चेत जा, सो मन फिरा, सो जाग जा। चाहे कैसी भी स्‍थिति में हम हों। हम में से प्रत्‍येक के लिए अवसर है। प्रभु यीशु मसीह कहता है; ‘जो मन फिराएगा, उसको मैं गुप्‍त मन्‍ना दूंगा और श्‍वेत पत्‍थर दूंगा’।

यह गुप्‍त मन्‍ना क्‍या है? गुप्‍त मन्‍ना किसके लिए है? मन्‍ना किसको दिया गया?

यह मन्‍ना उन्‍हें दिया गया जिन्‍होंने मिस्र के धन को ठुकरा दिया था, जो बन्‍धुवाई से निकल कर आ गए थे, जिन्‍होंने मिस्र के राज्‍य को ठुकरा दिया था। समझौतावादी लोगों के लिए मन्‍ना नहीं है।

जिन्‍होंने परमेश्‍वर के रास्‍त्‍ो को, उसकी योजना को, उसके उपायों को समझा है और उसको पहला स्‍थान दिया है, उनको मन्‍ना प्राप्‍त होगा; उनको परमेश्‍वर के द्वारा स्‍वर्गीय भोजन मिलेगा। जिन्‍होंने विश्‍वास से लाल समुद्र में अपना कदम बढ़ा दिया, यह जानते हुए कि परमेश्‍वर रास्‍ता निकालेगा; उनको मन्‍ना मिलेगा।

मन्‍ना सीधा स्‍वर्गीय भोजन है, परमेश्‍वर की सीधी आशीष है। यह मनुष्‍य की तरफ से नहीं है, मनुष्‍य की आशीष नहीं है, यह मनुष्‍य का प्रलोभन नहीं है, मनुष्‍य की दी हुई भेंट नहीं है। परमेश्‍वर तुम्‍हें विशेष आशीषें देगा, यदि इस संसार के धन को, यदि इन संसार की परीक्षाओं को, यदि इस संसार के पाप को तू छोड़ देगा, यदि विश्‍वास से तू लाल समुद्र पार करने के लिए कदम उठायेगा तो पार चला जाएगा। ऊपर से दिखाई नहीं देगा परन्‍तु हृदय में आनन्‍द होगा, हृदय में दृढ़ता होगी। मन्‍ना तृप्‍त करने के लिए है। प्रभु यीशु मसीह की तरफ से यह सीधा आएगा और हमको तृप्‍त करेगा।

प्रभु यीशु मसीह कहता है कि मैं उसे श्‍वेत पत्‍थर दूंगा, जिस पर उसका नाम लिखा हुआ होगा। यह श्‍वेत पत्‍थर क्‍या है? उन दिनों जब कोई व्‍यक्‍ति अदालत में निर्दोष पाया जाता था तो उसको न्‍यायाधीश अपना निर्णय सुनाने के समय एक सफेद पत्‍थर देता था, जिस पर उस व्‍यक्‍ति का नाम लिखा होता था। वह व्‍यक्‍ति उस सफेद पत्‍थर को अपने घर में रखता था, यह बताने के लिए कि उस पर दोष तो लगाया गया था परन्‍तु वह निर्दोष ठहरा और जो दण्‍डित होते थे, उनको काला पत्‍थर दिया जाता था।

यहां पर प्रभु यीशु मसीह वही कह रहा है कि मैं उसको सफेद पत्‍थर दूंगा; जिस पर विशेष मुहर लगी होगी, जिसको परमेश्‍वर आशीषित करेगा, जिसको परमेश्‍वर निर्दोष साबित करेगा। यह सफेद पत्‍थर कहां से मिलेगा? यह उसे मिलेगा जिसने प्रभु यीशु मसीह के रक्‍त में अपने आप को धोया है।

क्‍या हमको निश्‍चितता है कि हमको सफेद पत्‍थर ही मिलेगा? प्रभु यीशु मसीह पिरगमुन की कलीसिया के माध्‍यम से हमसे यह कहना चाहता है कि तू जाग जा, तू चेत जा, तू मन फिरा। एक और अवसर प्रभु यीशु मसीह देता है और लिखा हुआ है - जो जय पाए, जो परीक्षाओं से जय पाए, जो संसार के दबाव से जय पाए, जो जीवन के संघर्षों से जय पाए, जो शैतान की शक्‍तियों से जय पाए; मैं उसे श्‍वेत पत्‍थर भी दूंगा। उस पत्‍थर पर उसका नाम लिखा हुआ होगा जिसे उसके पाने वाले के सिवाय कोई नहीं जानेगा।

जिसके कान हों वह सुन ले कि आत्‍मा कलीसियाओं से क्‍या कहता है। जो जय पाए उसको मैं गुप्‍त में मन्‍ना दूंगा और उसे एक श्‍वेत पत्‍थर भी दूंगा। क्‍या हमने जय पायी है? क्‍या हमने इस संसार की परीक्षाओं पर जय पायी है? क्‍या हमने अपने पुराने जीवन पर जय पायी है? क्‍या हमने पाप के जीवन पर जय पायी है? क्‍या हमने अपने पुराने सोच पर जय पायी है? मसीही जीवन जय का जीवन है। क्‍या वह जय हमने पायी है? क्‍या हमें इस बात की निश्‍चितता है कि जब प्रभु यीशु मसीह और हमारा आमना-सामना होगा तो वह हमको वह सफेद पत्‍थर देगा जिस पर हमारा नाम लिखा हुआ होगा और हम जान लेंगे कि जीवन की पुस्‍तक में भी हमारा नाम लिखा हुआ है।