परिचय :- प्रकाशितवाक्य की पुस्तक में वर्णित कलीसियाओं में छठवीं कलीसिया फिलादेलफिया की कलीसिया है, जिसका वर्णन 3:7-13 में पाया जाता है। फिलादेलफिया की कलीसिया एक जीवित और आशीषित कलीसिया है। फिलादेलफिया शब्द ग्रीक भाषा से लिया गया है, जो दो शब्दों से मिलकर बना है। फिलियो जिसका अर्थ होता है प्रेम और एडलफोस जिसका अर्थ है भाई ; अर्थात् भाईचारे का प्रेम, और उस कलीसिया में भाईचारे का प्रेम पाया जाता है। इस कलीसिया के इतिहास को अगर हम देखें तो प्रभु यीशु मसीह के जन्म से 150 वर्ष पूर्व एटलस द्वितीय के द्वारा इस शहर की स्थापना की गई। वह पिरगमुन का शासक था और पिरगमुन के लोगों और व्यापारियों ने मिलकर फिलादेलफिया शहर को बसाया था। उन दिनों में यह एशिया माइनर के क्षेत्र में प्रवेश द्वार के समान था और इसी कारण इसे 'गेटवे सिटी ऑफ एशिया माइनर’ भी कहा गया है। यह ग्रीक संस्कृति और भाषा का केन्द्र था। यह बड़ा शान्तिपूर्ण नगर था क्योंकि यहां के अधिकांश निवासी आपस में भाईचारे के साथ रहते थे। इस नगर के आसपास बहुत से ज्वालामुखी फटे थे और उनसे निकले लावे से बहकर जो राख और मिट्टी इकट्ठा हुई थी, वह अंगूर की खेती के लिए बहुत ही उपयोगी थी। अंगूर की खेती होने के कारण यहां पर शराब बनाई जाती थी जिससे वहां के निवासी बहुत धन कमाते थे। जबकि सारे एशिया माइनर में तेज़ी से इस्लाम धर्म का प्रचार हो रहा था और लोग इस्लाम को ग्रहण कर रहे थे, फिलादेलफिया के निवासी यूनानी देवी-देवताओं के उपासक थे। अथेने के बाद इस नगर में सबसे ज़्यादा मन्दिर थे, जिनमें देवी-देवताओं की उपासना की जाती थी परन्तु इसके बावजूद यह शहर मसीहियत का गढ़ कहा जाता था। यह नगर भूकम्प से ग्रसित था और दस वर्षों में तीन बार भूकम्पों से नष्ट हो चुका था और इसे वहां के शासकों के द्वारा पुन: निर्मित किया जाता था। जिस प्रकार कई शहरों के नाम बदल गए जैसे कि मद्रास को चेन्नई, बम्बई को मुम्बई और कलकत्ता को कोलकाता नाम से जाना जाने लगा है वैसे ही आज तुर्की में फिलेदिलफिया नगर को अलाशीर के नाम से जाना जाता है। तुर्की एक ऐसा देश है जहां इस्लाम धर्म बहुत तेज़ी से बढ़ा और आज तुर्की में लगभग एक हज़ार मसीही विश्वासी पाए जाते हैं। इस देश में मसीहियों पर सताव आता है और मसीही धर्म का प्रचार करने पर आजीवन कारावास दे दिया जाता है, यहां तक कि यदि धर्मान्तरण होता है तो करने वाले और करवाने वाले दोनों को, मृत्यु दण्ड तक दिया जाने का प्रावधान कानून में पाया जाता था। यह कलीसिया एक आशीषित कलीसिया है क्योंकि सातों कलीसियाओं में से यही एक कलीसिया है जिसे प्रभु यीशु मसीह कोई श्राप नहीं देता था, जिससे उसे कोई शिकवा-शिकायत नहीं है। इफिसुस की कलीसिया के लिये वह कहता है; तूने पहला-सा प्रेम छोड़ दिया है। स्मुरना की कलीसिया के लिये वह कहता है; तेरे बीच में ऐसे लोग हैं जो कहते कुछ हैं करते कुछ हैं, उनमें ढोंग है। पिरगुमन की कलीसिया के लिये वह कहता है; तुम्हारे मध्य कुछ ऐसे हैं जो झूठे शिक्षकों की शिक्षा को मानते हैं, बिलाम की और नीकुलइयों की शिक्षाओं को मानते हैं। थुआतीरा की कलीसिया के लिये वह कहता है; तू ऐसी स्त्री इज़बेल को अपने बीच में रहने देता है, तेरा अनुशासन कहां गया? सरदीस की कलीसिया के लिये वह कहता है; यह मरी हुई कलीसिया है। लौदीकिया की कलीसिया के लिये वह कहता है; न तू ठंडा है - न गर्म है, तू तो गुनगुना है और मैं तुझे उगलने पर हूं। लेकिन फिलादेलफिया की कलीसिया एक जीवित, धन्य और आशीषित कलीसिया है। इस कलीसिया के विषय में ऐसी कौन-सी बातें हैं जिनकी प्रशंसा प्रभु यीशु मसीह करता है और वे कौन-सी बातें हैं जो हमारे जीवनों में भी लागू होती हैं। 1. प्रभु यीशु मसीह हमारे लिए द्वार खोलता है कि हम उनमें प्रवेश करें:- वह द्वारों को खोलने वाला प्रभु है। आठवीं आयत में यीशु कहता है कि देख मैंने तेरे लिए एक द्वार खोल रखा है। 1. वह हमारे लिये सेवा का द्वार खोलता है: 2कुरिन्थियों 4:1-2 में लिखा है; “इसलिए जब हम पर ऐसी दया हुई, कि हमें यह सेवा मिली, तो हम हियाव नहीं छोड़ते परन्तु हम ने लज्जा के गुप्त कामों को त्याग दिया, और न चतुराई से चलते, और न परमेश्वर के वचन में मिलावट करते हैं, परन्तु सत्य को प्रगट करके, परमेश्वर के साम्हने हर एक मनुष्य के विवेक में अपनी भलाई बैठाते हैं”। पौलुस कहता है, जब हमारे लिये यह सेवा का मौका मिला। उसी प्रकार प्रभु यीशु मसीह हमारे जीवन में, हमारी कलीसिया के लिये सेवा का द्वार खोलता है। आज जो मसीही संस्थाएं हैं, वे इस बात का प्रमाण हैं कि इन संस्थाओं के द्वारा प्रभु यीशु मसीह सेवा करता है, सेवा के द्वार खोलता है, सेवा का अवसर हमको देता है और वह चाहता है कि इन सेवकाई के द्वारों से हम भीतर जाएं। 2. वह हमारे लिये प्रचार का द्वार खोलता है: वह हमारे लिये प्रचार का द्वार खोलता है कि हम जाकर उसके वचन का प्रचार कर सकें। कुलुस्सियों 4:3 में लिखा है; “और इस के साथ ही साथ हमारे लिये भी प्रार्थना करते रहो, कि परमेश्वर हमारे लिये वचन सुनाने का ऐसा द्वार खोल दे, कि हम मसीह के उस भेद का वर्णन कर सकें जिस के कारण मैं कै़द में हूं”। 2 कुरिन्थियों 2:12 में लिखा है; “और जब मैं मसीह का सुसमाचार सुनाने को त्रोआस में आया, और प्रभु ने मेरे लिये एक द्वार खोल दिया”। यह प्रभु यीशु मसीह है जो हमारे लिये प्रचार करने का द्वार खोलता है। ऐसा कितनी बार होता है कि हम चूक जाते हैं। हम अपने पड़ोसी से प्रभु यीशु मसीह के बारे में बात करने से चूक जाते हैं, अपने मित्रों से प्रभु यीशु मसीह के बारे में बात करने से चूक जाते हैं। हम अपने आसपास के लोगों से प्रभु यीशु मसीह के बारे में बात करने से चूक जाते हैं। परन्तु हमें स्मरण रखना है कि ये सारे लोग हमारे लिए प्रभु यीशु मसीह के द्वारा खोला गया प्रचार का द्वार है। 3. वह हमारे लिये आशीषों के द्वार को खोलता है: मलाकी 3:10 में लिखा है; “सारे दशमांस भंडार में ले आओ कि मेरे भवन में भोजनवस्तु रहे; और सेनाओं का यहोवा यह कहता है, कि ऐसा करके मुझे परखो कि मैं आकाश के झरोखे तुम्हारे लिये खोलकर तुम्हारे ऊपर अपरम्पार आशीष की वर्षा करता हूं कि नहीं”। 4. वह हमारे लिये विश्वास का द्वार खोलता है: प्रेरितों के काम 14:27 में लिखा है; “वहां पहुंचकर, उन्हों ने कलीसिया इकट्ठी की और बताया, कि परमेश्वर ने हमारे साथ होकर कैसे बड़े-बड़े काम किए! और अन्यजातियों के लिए विश्वास का द्वार खोल दिया”। प्रभु यीशु मसीह ने ऐसा विश्वास का द्वार खोल दिया जिससे अन्यजातियों के बीच में गवाही हो सके। 5. वह हमारे लिए समस्याओं के समाधान के द्वार खोलता है: कितनी बार हमको ऐसा लगता है कि इस समस्या से हम कैसे निकल पाएंगे या हम इस आदत से कैसे उबर पाएंगे? अब यह पहाड़ हमारे जीवनों में आया है, तो इस पहाड़ को हम कैसे पार कर पाएंगे? परन्तु यदि हम प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास करते हैं तो हम पाते हैं कि वह हमारे लिये समस्याओं के समाधान का द्वार खोलता है। 2 कुरिन्थियों 1:8-10 में लिखा है; “हे भाईयों, हम नहीं चाहते कि तुम हमारे उस क्लेश से अनजान रहो, जो आसिया में हम पर पड़ा, कि ऐसे भारी बोझ से दब गये थे, जो हमारी सामर्थ से बाहर था, यहां तक कि हम जीवन से भी हाथ धो बैठे थे। वरन् हम ने अपने मन में समझ लिया था, कि हम पर मृत्यु की आज्ञा हो चुकी है कि हम अपना भरोसा न रखें, वरन् परमेश्वर का जो मरे हुओं को जिलाता है। उसी ने हमें ऐसी बड़ी मृत्यु से बचाया, और बचाएगा; और उस से हमारी यह आशा है, कि वह आगे को भी बचाता रहेगा”। ये परमेश्वर है जो समस्याओं का समाधान करता है, ये परमेश्वर है जो चंगाई देता है, ये परमेश्वर है जो मृत्यु से हमको बचाता है, ये परमेश्वर है जो शैतान की शक्तियों से बचाता है। 6. प्रभु यीशु मसीह ने हमारे लिये अनन्त जीवन का और स्वर्ग का द्वार खोला है: और इसलिये पौलुस कहता है; “हे मृत्यु तेरी जय कहां रही? जय ने मृत्यु को निगल लिया...... परमेश्वर का धन्यवाद हो, जो हमारे प्रभु यीशु मसीह के द्वारा हमें जयवंत करता है” (1 कुरिन्थियों 15:54, 55, 57) प्रभु यीशु मसीह हमारे लिये अनन्त जीवन और स्वर्ग का द्वार खोलता है। प्रकाशितवाक्य 3:8 में लिखा है; “देख, मैंने तेरे साम्हने एक द्वार खोल रखा है, जिसे कोई बन्द नहीं कर सकता”। कितनी बार हमारे जीवनों में ऐसे अवसर आते हैं कि हम इन द्वारों से गुज़रते नहीं हैं। जब प्रभु यीशु मसीह द्वार खोलता है तो उसमें प्रवेश करने से मुकर जाते हैं। 2. प्रभु यीशु मसीह हमें प्रोत्साहित करता है कि हम अपनी क्षमता से कहीं अधिक करें:- प्रकाशितवाक्य 3:8 में वह कहता है; “कि तेरी सामर्थ्य थोड़ी सी है, और तू ने मेरे वचन का पालन किया है और मेरे नाम का इन्कार नहीं किया”। हम जो मसीही लोग हैं, जो विश्वासी हैं, हमारी कलीसिया जो विश्वास में मज़बूत है; हम को इस बात का अहसास करना चाहिये कि हमारी सामर्थ्य तो थोड़ी है परन्तु परमेश्वर चाहता है, कि हम अपनी सामर्थ्य से कहीं बढ़कर प्रयास करें। जब हम ऐसा कदम उठाते हैं तो प्रभु यीशु मसीह हमको आशीषित करता है। इफिसियों 3:20 में लिखा है; “अब जो ऐसा सामर्थी है, कि हमारी बिनती और समझ से कहीं अधिक काम कर सकता है, इस सामर्थ के अनुसार जो हम में कार्य करता है”। प्रभु यीशु मसीह की सामर्थ्य ऐसी है जो हमारी समझ से, हमारी सोच से, हमारी योग्यताओं से, हमारी कल्पनाओं, और हमारी विनती से कहीं अधिक काम कर सकती है। कभी-कभी हम भूल जाते हैं कि हम प्रभु के विश्वासी हैं, कि प्रभु हमारे हृदयों में रहता है, और हमारी सामर्थ्य और सोच से कहीं अधिक काम करता है। प्रेरितों के काम 3:6 में पाया जाता है; “तब पतरस ने कहा, चांदी और सोना तो मेरे पास है नहीं; परन्तु जो मेरे पास है, वह तुझे देता हूं: यीशु मसीह नासरी के नाम से चल फिर”। मेरे पास सोना चांदी तो नहीं है परन्तु जो सामर्थ्य प्रभु यीशु मसीह की है, यह उससे बढ़कर है काश! पतरस के समान हमारे दिल में भी इस बात का अहसास हो कि प्रभु यीशु मसीह के द्वारा दी गई यह सामर्थ्य हमारे सोने-चांदी, हमारी शक्ति, हमारे सम्बन्धों और सम्पर्कों किसी भी संसार की शक्ति से कहीं अधिक बढ़कर है क्योंकि यह प्रभु यीशु मसीह की ज़िन्दा सामर्थ्य है। मत्ती 21:21 में लिखा है; “यीशु ने उन को उत्तर दिया, कि मैं तुम से सच कहता हूं; यदि तुम विश्वास रखो, और सन्देह न करो; तो न केवल यह करोगे, जो इस अंजीर के पेड़ से किया गया है; परन्तु यदि इस पहाड़ से भी कहोगे, कि उखड़ जा; और समुद्र में जा पड़, तो यह हो जाएगा”। 1 राजा 17:12 में हम पाते हैं कि एलिय्याह सारपत नगर को जाता है और वहां एक विधवा से मिलता है जिसके पास एक मुट्ठी भर मैदा और कुप्पी में थोड़ा सा तेल था। इसके बाद हम जानते हैं कि परमेश्वर की सामर्थ्य से वहां कैसा अद्भुत कार्य होता है। पांच रोटी और दो मछली का उदाहरण। मूसा की लाठी का उदाहरण हमारे सामने है कि कैसे परमेश्वर की सामर्थ्य उससे प्रगट हुई और किस प्रकार उसकी लाठी से लाल समुद्र दो भागों में बंट गया। जब हम परमेश्वर पर विश्वास करते हैं और अपने जीवन को सम्पूर्णता से उसको समर्पित कर देते हैं और कहते हैं कि; परमेश्वर तेरी सामर्थ्य मेरी कमज़ोरियों में काम करे, मेरी निर्बलताओं में काम करे तो उसकी सामर्थ्य हमारी निर्बलताओं में बहुतायत से काम करती है। अमेरिका की जॉन हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी में पीडीयाट्रिक्स के न्यूरो सर्जरी विभाग के प्रमुख और विख्यात न्यूरोसर्जन बैन कारसन अपनी पुस्तक में लिखते हैं; कि बाल्यावस्था में मेरे पिता की मृत्यु हो गई। हम लोग 13 भाई-बहन थे और भयंकर गरीबी से गुज़रे। हमारी मां पढ़ी-लिखी नहीं थी, परन्तु प्रभु यीशु मसीह पर बहुत ही कट्टरता से विश्वास करती थीं और उनके साथ न सिर्फ़ उनके भाई-बहन रहते थे परन्तु सौतेले भाई-बहन भी रहते थे। क्योंकि शायद उनके माता या पिता ने दूसरा विवाह किया था। बैन कारसन लिखते हैं कि मेरे जीवन में क्रोध की समस्या थी, मैं बहुत जल्दी क्रोधित हो जाता था और एक दिन ऐसा हुआ कि मेरा झगड़ा मेरे सौतेले भाई से हो गया और झगड़ा बहुत बढ़ गया। मैं क्रोध में उबलने लगा, मेरे भीतर जैसे रक्त उबल रहा था और तब रात में मैंने अपने हाथ में एक चाकू लिया और जहां मेरा सौतेला भाई सो रहा था, उसको मारने के लिये अपना हाथ बढ़ाया। तभी अचानक मेरी मां ने पीछे से आकर मेरा हाथ पकड़ लिया और आंसू भरी आंखों से कहा; ‘बेटा अपने क्रोध को ठंडा करो और इन हाथों को प्रभु यीशु मसीह को समर्पित करो। ये हाथ, मिटाने के लिये नहीं बल्कि बनाने के लिये हैं। परमेश्वर की सामर्थ्य को काम करने दो’ और तब बैन कारसन अपनी मां की कहानी बताते हैं कि उनकी मां ऐसे परिवार में पैदा हुई थी जहां 24 भाई-बहन थे और बड़ी कठिनाई और संघर्ष और निर्धनता से उस मां को पाला गया। मां ने बैन कारसन से कहा अपने हाथ परमेश्वर को समर्पित करो, और तब कारसन लिखते हैं कि वे हाथ जिनमें हत्या करने की ताकत थी, वे हाथ जो मिटाने के लिये प्रेरित हो गये थे; उन हाथों को जब उन्होंने प्रभु यीशु मसीह की शक्ति को समर्पित कर दिया तो वे हाथ आज एक सर्जन के हाथ हो गये हैं, बच्चों की जान बचाने वाले हाथ हो गये हैं। यह हमारे प्रभु यीशु मसीह का चमत्कार है, यह उस की आशीष है कि जब उसकी सामर्थ्य हम में से होकर कार्य करती है तो हमारी शक्ति चाहे कम हो, उस परमेश्वर की सामर्थ्य हमको बदलती है और उसकी गवाही के लिये महान कार्य करती है। 3. प्रभु यीशु मसीह हमें स्मरण दिलाता है कि मसीही जीवन साहस का जीवन है:- प्रकाशितवाक्य 3:9-10 में लिखा है; “देख, मैं शैतान के उन सभावालों को तेरे वश में कर दूंगा जो यहूदी बन बैठे हैं, पर हैं नहीं, वरन झूठ बोलते हैं- देख, मैं ऐसा करूंगा, कि वे आकर तेरे चरणों में दण्डवत् करेंगे, और यह जान लेंगे, कि मैं ने तुझ से प्रेम रखा है। तू ने मेरे धीरज के वचन को थामा है, इसलिये मैं भी तुझे परीक्षा के उस समय बचा रखूंगा, जो पृथ्वी पर रहने वालों के परखने के लिये सारे संसार पर आने वाला है”। प्रभु यीशु मसीह कहता है, मैं शैतान के लोगों को तेरे वश में कर दूंगा। जो झूठे हैं, जो बाधा पहुंचाते हैं, जो अफवाहें फैलाते हैं, जो अवरोध पैदा करते हैं; वे तेरे चरणों में दण्डवत् करेंगे। क्यों? क्योंकि तू ने मेरे वचन को थामा है और लिए तेरी परीक्षा की घड़ी में मैं तुझे थामूंगा। कितनी बड़ी बात होगी यदि प्रभु यीशु मसीह हमसे कहे कि तूने मेरे वचन को थामा है इसलिए परीक्षा की घड़ी में मैं भी तुझे थामूंगा। 9वें पद में वह कहता है कि वे जान लेंगे कि मैं ने तुझसे प्रेम रखा है। यह मेरे प्रेम का प्रमाण होगा कि वे तेरे सामने झुकेंगे और तेरे चरणों में दण्डवत् करेंगे। इसलिए वह कहता है कि तुझे हियाव नहीं खोना है; क्योंकि मैं तेरे साथ हूं, मैं तुझे उस परीक्षा से निकालूंगा जो सारे संसार पर फैलने वाली है। आज हम जिस संसार में जीते हैं वहां शैतान की शक्तियां हैं। विरोध करने वाले लोग, झूठ बोलने वाले लोग, अवरोध उत्पन्न करने वाले लोग, निराश करने वाले लोग, निन्दा करने वाले लोग हैं। मसीही कार्यों को, मसीही संस्थाओं को, मसीह के प्रचार को रोकने वाले लोग हैं। परन्तु प्रभु यीशु मसीह कहता है क्योंकि तूने मेरे वचन को थामा है, मैं भी तुझे थामे रहूंगा। प्रभु यीशु मसीह अपने अन्तिम आदेश में कहता है कि “जगत के अन्त तक मैं सदैव तुम्हारे साथ हूं”। यदि हम प्रभु यीशु मसीह के साथ हैं तो प्रभु यीशु मसीह हमारे साथ है। व्यवस्थाविरण 20:1 में लिखा है; “जब तू अपने शत्रुओं से युद्ध करने को जाए, और घोड़े, रथ और अपने से अधिक सेना को देखे, तब उन से न डरना; तेरा परमेश्वर यहोवा जो तुझ को मिस्र देश से निकाल ले आया है वह तेरे संग..... संग चलेगा”। भजन संहिता 20:7-8 में लिखा है; “किसी को रथों का, और किसी को घोड़ों का भरोसा है, परन्तु हम तो अपने परमेश्वर यहोवा ही का नाम लेंगे। वे तो झुक गए और गिर पड़े: परन्तु हम उठे और सीधे खड़े हैं”। 1996 के समर ओलम्पिक में भाग लेने आई अमेरिकी जिम्नास्टिक टीम की एक खिलाड़ी डॉमनिक डॉस का विवरण आज इतिहास के पन्नों में दर्ज हो चुका है। डॉमनिक डॉस जिम्नास्टिक का प्रदर्शन करने के लिये आई थी और जब पहली बार वह 30 मीटर दौड़कर अपना प्रदर्शन करने के लिये आई तो उसका दाहिना पंजा मुड़ गया और उसमें मोच आ गई और उसमें भयंकर दर्द होने लगा। जब उसने दूसरी बार प्रदर्शन के लिए दौड़ लगाई तो 20 मीटर दौड़ने के बाद वह गिर पड़ी और उसके घुटने में चोट लग गई। क्योंकि उसके पैर में भयंकर दर्द था तो उसके कोच ने कहा, तुम बैठ जाओ। आयोजकों ने भी कहा, लड़की को बैठा दो, परन्तु डॉमनिक डॉस ने कहा कि मैं जाऊंगी और दौडूंगी, मुझे मेरे देश ने यहां पर असफल होने के लिये नहीं भेजा है। उसके बाद वह तीसरी बार फिर दौड़ी। हालांकि उसके पैर में बहुत तेज़ दर्द था मगर फिर भी वह बहुत तेज़ दौड़ी और 80 फीट की दूरी तय की। उसके बाद जब उसने जिम्नास्टिक का प्रदर्शन किया तो उसने स्वर्ण पदक जीता। जब डॉमनिक डॉस से पूछा गया कि वह कौन-सी बात थी जिसने तुमको प्रेरणा दी, तो उसने जवाब दिया कि मेरा दर्द ही मेरी चुनौती बन गया। जो पीड़ा आई उससे मैं निराश नहीं हुई परन्तु दर्द के साथ दौड़ना मेरे लिये चुनौती बन गया। मेरी पीड़ा मेरी प्रेरणा बन गई। मुझको मेरे देश ने भेजा है कि मैं सफल होकर आऊं; न कि असफल! इस संसार में हमको भी परमेश्वर ने भेजा है, फिर चाहे हमारे पैर में मोच आए, चाहे हमारे शरीर में पीड़ा हो और चाहे कैसे भी अवरोध आएं। काश ! हम भी ऐसा कह सकें कि मेरा दर्द, मेरी पीड़ा मेरे मसीही जीवन के लिये चुनौती बन गया। 4. प्रभु यीशु मसीह हमें चेतावनी देता है ताकि हम सतर्क रहें:- प्रकाशितवाक्य 3:11 में लिखा है; “मैं शीघ्र ही आने वाला हूं; जो कुछ तेरे पास है, उसे थामे रह, कि कोई तेरा मुकुट छीन न ले”। जो तुझे परमेश्वर से मिला है, ऐसा न हो कि तू मनुष्यों के कारण उसे खो दे। परमेश्वर से हमको क्षमा मिलती है, उसका अनुग्रह मिलता है, उद्धार मिलता है। परन्तु लोगों के कारण, किसी विरोधी के कारण, किसी निराश करने वाले के कारण हम नकारात्मक हो जाते हैं और अपने व्यवहार को बदल देते हैं। हम उस मुकुट को खो देते हैं जो हमको दिया गया है। प्रभु यीशु मसीह कह रहा है कि जो अनन्त जीवन तुझको मिला है, उसे संसार के क्षणिक सुख के लिये दांवपर मत लगा। लूका 11:35 में लिखा है; “इसलिये चौकस रहना, कि जो उजियाला तुझ में है वह अन्धेरा न हो जाए”। तू तो इस अन्धकार में जीता है, संसार के तूफानों में जीता है, कहीं ऐसा न हो कि जो उजियाला तुझ में है वह अन्धकार में बदल जाए। 1पतरस 5:8 में लिखा है; “सचेत हो, और जागते रहो, क्योंकि तुम्हारा विरोधी शैतान गर्जने वाले सिंह की नाईं इस खोज में रहता है, कि किस को फाड़ खाए”। एसाव के उदाहरण को देते हुए इब्रानियों 12:16-17 में लिखा है; “ऐसा न हो, कि कोई जन व्यभिचारी, या एसाव की नाईं अधर्मी हो, जिस ने एक बार के भोजन के बदले अपने पहिलौठे होने का पद बेच डाला। तुम जानते तो हो, कि बाद को जब उस ने आशीष पानी चाही, तो अयोग्य गिना गया, और आंसू बहा-बहाकर खोजने पर भी मन फिराव का अवसर उसे न मिला”। जो तेरे पास है, उसे थामे रह ऐसा न हो कि कोई तेरा मुकुट छीन ले। इस संसार की मिट्टी के बदले में कोई तेरा स्वर्ग का मुकुट न छीन ले। निष्कर्ष :- यह प्रभु यीशु मसीह है जो द्वार खोलने वाला है; यह प्रभु यीशु मसीह है जो प्रोत्साहित करता है कि हम अपनी क्षमता से कहीं अधिक करें, यह प्रभु यीशु मसीह है जो हमें स्मरण दिलाता है कि मसीही जीवन साहस का जीवन है, यह प्रभु यीशु मसीह है जो हमें चेतावनी देता है कि हमें जो प्रभु से मिला है, उसे संसार के कारण खो न दें। इटली की राजधानी रोम में एक बहुत मशहूर पियानो वादक था जिसका नाम पेडरवैस्की था। उसका बहुत बड़ा शो था और हज़ारों लोग उस ऑडिटोरियम में बैठे हुए थे। एक माता थी जिसका 4 साल का बेटा था, बेटे ने कहा मैं भी चलूंगा क्योंकि वह भी थोड़ा-थोड़ा पियानो बजाता था। पेडरवैस्की के शो देखने के लिये बेटा अपनी मां के साथ गया, और वे एक स्थान पर आकर बैठ गये। अचानक मां को अपना कोई परिचित दिख गया और वह उससे मिलने के लिये चली गई। जब थोड़ी देर तक मां नहीं आई तो बेटा उठ कर मां को ढूंढ़ने लगा। क्योंकि लाइटस् ऑफ कर दी गईं थीं और सब तरफ अन्धेरा था। उस अन्धेरे में बेटा मां को ढूंढ़ते-ढूंढ़ते कहीं और चला गया। वह ऐसे स्थान पर पहुंचा जहां नो एन्ट्री लिखा हुआ था और आगे बढ़ते-बढ़ते वह स्टेज पर पहुंच गया। थोड़ी-सी लाईट के बीच में उसने देखा कि स्टेज पर एक पियानो है और वह उस पियानो के पास जाकर बैठ गया। जब मां वापस आई तो उसने देखा कि बेटा तो यहां है नहीं तो वह परेशान हो गई। तभी स्टेज का पर्दा खुला और लाईट्स जलीं। मां ने देखा उसका बेटा स्टेज पर बैठा पियानो बजा रहा था - टिव्कंल टिव्कंल लिटल स्टार, हाउ आई वंडर वॉट यू आर........। सारे हॉल में सन्नाटा सा छा गया था, लोग समझ नहीं पा रहे थे कि यह क्या हो रहा है। यह बच्चा जो धुन बजा रहा था वह बहुत साधारण-सी थी। तब पेडरवैस्की वहां आया और उस बच्चे के पीछे खड़े होकर उसके साथ पियानो बजाने लगा। बच्चे की धुन और पेडरवैस्की की धुन से जो संगीत निकला उससे सभी आश्चर्य चकित हो गये और एक गीत हुआ, दूसरा गीत हुआ; पेडरवैस्की ने बच्चे से कहा तुम बजाते जाओ....वह बच्चा अपने छोटे-छोटे हाथों से बजाता गया और उसके साथ पेडरवैस्की ने भी बजाया और तीसरे गीत के बाद हज़ारों लोग खड़े हो गये और तालियों से ऑडिटोरियम गूंज उठा। वे धुनें जो बजायी गईं; वे आज भी रोम के इतिहास में विख्यात हैं। वह चार साल का बच्चा जो भीड़ में गुम गया था, जो टिव्कंल-टिव्कंल लिटल स्टार की धुन पियानो पर बजाता था; पेडरवैस्की के प्रोत्साहन से रोम के सम्राट के दरबार में पियानो की धुनें बजाने लगा और उसका नाम माल्टीनी हुआ; जो सारे इटली तो क्या विश्व में भी विख्यात हुआ। हमारी क्षमता भी उस बच्चे के समान है, कि शायद हम कुछ बजाने का प्रयास करते हैं, उस क्षमता के साथ जो हमारे पास है। और तब परमेश्वर आता है, अपनी बांहों से हमको घेरता है और खूबसूरत धुन बजाता है और हमारी टूटी हुई, छोटे-छोटे हाथों की बिगड़ती हुई धुन और उस परमेश्वर की धुन जब बजती है तो एक खूबसूरत संगीत निकलता है। यदि हम साहस करेंगे, आगे जाएंगे, परमेश्वर की महिमा करने का प्रयास करेंगे तो परमेश्वर हमको आशीषित करेगा। प्रभु यीशु मसीह कहता है कि मैंने तेरे लिये एक द्वार खोला है, मैं तुझे प्रोत्साहित करता हूं। प्रभु यीशु मसीह यह भी कहता है, मैं केवल द्वार खोलने वाला नहीं हूं, मैं द्वार बंद करने वाला भी हूं और एक दिन यह द्वार बन्द भी हो जाएगा। क्या हमको इस बात की निश्चितता है कि जब वह द्वार बन्द होगा तो हम उस प्रभु के साथ उस द्वार के भीतर होंगे; जीवन की पुस्तक में हमारा नाम होगा?