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प्रभु यीशु के सात पत्र - एक अवसर और

परिचय :- प्रकाशितवाक्‍य की पुस्‍तक में वर्णित कलीसियाओं में सातवीं कलीसिया लौदीकिया की कलीसिया है, जिसका वर्णन 3:14-22 में पाया जाता है। लौदीकिया की कलीसिया के माध्‍यम से प्रभु यीशु मसीह हमारी कलीसिया से क्‍या कहना चाहता है, हमसे व्‍यक्‍तिगत रूप से क्‍या कहना चाहता है? हम इस बात को समझने का प्रयास करेंगे।

हम इस बात को भी देखेंगे कि लौदीकिया भौगोलिक रूप से कहां पर स्‍थित था और जब यह पत्र प्रभु यीशु मसीह ने लिखा तो उस समय वहां पर कौन-कौन सी बातें थीं, क्‍योंकि इसकी भौगोलिक स्‍थिति ही इसकी आत्‍मिक स्‍थिति को प्रकट करती है।

इफिसुस से 75 मील पूर्व दिशा में यह शहर लायकस घाटी में स्‍थित था। इस घाटी के दो तरफ पहाड़ों पर एक तरफ कुलुस्‍से शहर और दूसरे पहाड़ पर हिरियापुलिस शहर बसा हुआ है। लौदीकिया से हिरियापुलिस की दूरी 6 किलोमीटर और कुलुस्‍से की दूरी 10 किलोमीटर है। लौदीकिया बहुत धनवान शहर था, इस शहर में उस समय का सबसे बड़ा बैंक था, यहां की बैंकिंग व्‍यवस्‍था बहुत विस्‍तृत थी। एक और प्रमुख बात जो है वह यह कि यहां पर काली भेड़ें पाई जाती थीं, सामान्‍यत: भेड़ों का रंग काला नहीं होता परन्‍तु यहां पर काली भेड़ें पाई जाती थीं और उनके काले ऊन का व्‍यापार सारे संसार में किया जाता था। यहां का ऊन बहुत ही महंगा और प्रसिद्ध था।

यहां पर एक बहुत बड़ा मेडिकल कॉलेज था, चिकित्‍सा का केन्‍द्र था, दूर-दूर से छात्र यहां मेडिकल शिक्षा प्राप्‍त करने आते थे। क्‍योंकि यह व्‍यापार का केन्‍द्र था इसलिए मेडिकल कॉलेज में भी एक फैक्‍ट्री लगी हुई थी, जिसमें सुरमा बनाया जाता था। लौदीकिया के क्षेत्र के पास कुछ वर्ष पहले एक ज्‍वालामुखी फटा था और उससे जो लावा निकला था, उस लावे में ऐसा गुण था कि यदि उसको आंखों में मल लिया जाए तो आंखों का रोग और इन्‍फेक्‍शन ठीक हो जाता था और इसीलिए यहां पर सुरमा बनाने की फैक्‍ट्री थी ।

लौदीकिया के बारे में एक प्रमुख बात और भी है जो इस कलीसिया को लिखे गए पत्र की आयतों से मिलती-जुलती है; और वह यह कि इस शहर में सबसे बड़ी समस्‍या पानी की थी। बहुत गहरे-गहरे कुंए खोदे जाते थे, बावलियां खोदी जाती थीं, फिर भी पानी की समस्‍या बनी रहती थी। इस समस्‍या से निपटने के लिए रोमी सम्राट ने एक विशेष व्‍यवस्‍था की थी, हिरियापुलिस शहर अपने गरम पानी के स्रोतों के लिए प्रसिद्ध था और दूसरी तरफ के पहाड़ पर बसा शहर कुलुस्‍से ठण्‍डे पानी के झरनों के लिए। लौदीकिया के शासक ने इस प्रकार से नहरें बनाईं थीं कि हिरियापुलिस और कुलुस्‍से से पानी वहां पहुंचता था। हम इस बात की कल्‍पना कर सकते हैं कि 6 मील दूर बसे हिरियापुलिस से गरम पानी आता था और 7 मील दूर बसे कुलुस्‍से से ठण्‍डा पानी आता था; दोनों तरफ से आने वाला यह पानी जब लौदीकिया में पहुंचता था तो पानी गुनगुना हो जाता था। इसीलिए प्रभु यीशु मसीह भी इसी बात का संकेत उनके जीवनों के लिए करता है ।

एक प्रमुख बात लौदीकिया के सम्‍बन्‍ध में और भी है और वह यह कि वहां एक बहुत बड़ा भूकम्‍प आया जिससे व्‍यापार नाश हो गए, कारखाने बर्बाद हो गए, घर गिर गए। रोमी सम्राट ने घोषणा की कि यह हमारा बहुत प्रभावशाली शहर है। इस शहर को बचाना है और इसे फिर से बनाना है। अच्‍छी सड़कें हों, सुन्‍दर और अच्‍छे घर हों, हम इस नगर को बहुत खूबसूरत बनाएंगे। तब रोमी सम्राट ने बहुत सारा धन लौदीकिया को भेज दिया कि उसे फिर से पुन: निर्मित कर लिया जाए। परन्‍तु लौदीकिया के लोगों ने उस धन को वापस कर दिया और यह कहा कि हमको इस धन की ज़रूरत नहीं क्‍योंकि हमारे पास खुद इतना पैसा है कि हम अपने शहर को अपने पैसे से बनाएंगे। शासक को इतनी बड़ी राशि लौटाने की घटना इतिहास में शायद ही घटी हो।

प्रकाशितवाक्‍य 3:14 में लिखा है;

“लौदीकिया की कलीसिया के दूत को यह लिख कि जो आमीन्‌, और विश्‍वासयोग्‍य, और सच्‍चा गवाह है और परमेश्‍वर की सृष्‍टि का मूल कारण है, वह यह कहता है”।

अपने हर पत्र में प्रभु यीशु मसीह कुछ लिखता है, उपदेश देता है। वह यह बताता है कि वह कौन है, और किस अधिकार से लिख रहा है; वह अपना परिचय देता है।

इफिसुस की कलीसिया को वह लिखता है, जो सातों तारे अपने हाथों में लिये हुए है और सातों दीवटों के बीच में चलता फिरता है, वह कहता है।

स्‍मुरना की कलीसिया को लिखते समय वह कहता है, जो प्रथम है और जो अन्‍तिम है, जो मर गया था और जो अब जीवता है, वह कहता है।

पिरगमुन की कलीसिया को वह लिखता है, जिसके पास दोधारी तलवार और चोखी तलवार है, वह कहता है।

थुआतीरा की कलीसिया को लिखता है, जिसकी आंख आग की ज्‍वाला के समान और जिसके पांव उत्‍तम पीतल के समान हैं, वह कहता है ।

फिलादेलफिया की कलीसिया को लिखते समय कहता है, जो पवित्र है और सत्‍य है और जो दाऊद की कुंजी रखता है, वह कहता है।

और लौदीकिया की कलीसिया को कहता है कि-जो आमीन्‌, विश्‍वासयोग्‍य और सच्‍चा गवाह है और परमेश्‍वर की सृष्‍टि का मूल कारण है, वह कहता है। यहां पर चार बातों का विवरण किया गया है कि; जो आमीन्‌, विश्‍वासयोग्‍य और सच्‍चा गवाह है और परमेश्‍वर की सृष्‍टि का मूल कारण है।

प्रभु यीशु मसीह इस अधिकार से लौदीकिया की कलीसिया को लिख रहा है, जो आमीन है जिसका अर्थ है ऐसा ही हो। आमीन शब्‍द परिपूर्णता का प्रतीक है, परमेश्‍वर की इच्‍छा पूरी होने का प्रतीक है, परमेश्‍वर की सम्‍पूर्णता को और उसकी प्रतिज्ञाओं की पूर्णता को प्रकट करता है।

प्रभु यीशु मसीह कहता है; जो आमीन है जिसमें परमेश्‍वर की प्रतिज्ञाएं पूरी होती हैं, जिसमें परमेश्‍वर का परमेश्‍वरत्‍व प्रदर्शित होता है, जिस प्रभु यीशु मसीह में परमेश्‍वर का स्‍वरूप प्रदर्शित होता है, जिसे सृष्‍टि की सृजना से लेकर अनन्‍त का अधिकार दिया गया है, जो सम्‍पूर्ण है, जो परिपूर्ण है, जो परमेश्‍वर को प्रकट करता है; वह आमीन है।

2 कुरिन्‍थियों 1:20 में लिखा है;

“क्‍योंकि परमेश्‍वर की जितनी प्रतिज्ञाएं हैं, वे सब उसी में हां के साथ हैं: इसलिये उसके द्वारा आमीन भी हुई, कि हमारे द्वारा परमेश्‍वर की महिमा हो”। जो सच्‍चा गवाह है जिसने परमेश्‍वर के प्रेम की गवाही दी है, जिसने परमेश्‍वर की क्षमा की गवाही दी है, जिसने परमेश्‍वर की योजना को पूरा किया है”।

यूहन्‍ना 1:2-3 में लिखा है;

“यही आदि में परमेश्‍वर के साथ था। सब कुछ उसी के द्वारा उत्‍पन्‍न हुआ और जो कुछ उत्‍पन्‍न हुआ है, उस में से कोई भी वस्‍तु उसके बिना उत्‍पन्‍न न हुई”।

परमेश्‍वर की सृष्‍टि का यह मूल है।

कुलुस्‍सियों 1:15-16 में लिखा है;

“वह तो अदृश्‍य परमेश्‍वर का प्रतिरूप और सारी सृष्‍टि में पहिलौठा है। क्‍योंकि उसी में सारी वस्‍तुओं की सृष्‍टि हुई, स्‍वर्ग की हो अथवा पृथ्‍वी की, देखी या अनदेखी, क्‍या सिंहासन, क्‍या प्रभुताएं, क्‍या प्रधानताएं, क्‍या अधिकार, सारी वस्‍तुएं उसी के द्वारा और उसी के लिये सृजी गई हैं”।

लौदीकिया की कलीसिया को यह प्रभु यीशु मसीह कहता है, जो सृष्‍टि का मूल कारण है, जो परमेश्‍वर का विश्‍वासयोग्‍य पुत्र है। प्रभु यीशु मसीह परमेश्‍वर की दृष्‍टि में भी विश्‍वास योग्‍य है क्‍योंकि परमेश्‍वर ने प्रभु यीशु मसीह को जो कार्य दिया उसने उसे पूर्ण विश्‍वासयोग्‍यता से पूरा किया।

प्रभु यीशु मसीह लोगों की दृष्‍टि में भी विश्‍वासयोग्‍य रहा क्‍योंकि जो प्रतिज्ञाएं उसने लोगों के लिए कीं, उन्‍हें वह पूरा करता है। प्रभु यीशु मसीह जो कहता है, उसमें वह विश्‍वासयोग्‍य है, जो वह करता है उसमें वह विश्‍वासयोग्‍य है। इसलिए प्रभु यीशु कहता है; आकाश और पृथ्‍वी टल जाएं परन्‍तु मेरी बातें कभी न टलेंगी; क्‍योंकि मेरी बातें विश्‍वासयोग्‍य हैं, मैं विश्‍वासयोग्‍य परमेश्‍वर का पुत्र हूं ।

लौदीकिया की कलीसिया के नाम प्रभु यीशु मसीह अपने पत्र में तीन बातें कहता है, ये बातें जो उस कलीसिया की कमज़ोरी थीं। इस कलीसिया की प्रभु यीशु ने किसी बात में तारीफ़ नहीं की, किसी भी बात में उन्‍हें प्रोत्‍साहित नहीं किया क्‍योंकि यह एक श्रापित कलीसिया है। प्रभु यीशु मसीह ने बड़े कटु शब्‍दों में इस कलीसिया की तीखी आलोचना की है ।

1. प्रभु यीशु कहता है तू न तो ठण्‍डा है, न गर्म वरन्‌ तू गुनगुना हो गया है:- प्रकाशितवाक्‍य 3:15-16 में प्रभु यीशु मसीह इस कलीसिया के लिए कहता है;

“कि मैं तेरे कामों को जानता हूं कि तू न तो ठण्‍डा है और न गर्म : भला होता कि तू ठण्‍डा या गर्म होता। सो इसलिये कि तू गुनगुना है, और न ठण्‍डा है और न गर्म, मैं तुझे अपने मुंह में से उगलने पर हूं”।

ग्रीक भाषा में ठण्‍डे के लिये जो शब्‍द आया है, वह सुक्रास है और सुक्रास शब्‍द का इस्‍त्‍ोमाल उन लोगों के लिये किया जाता है जिन्‍होंने प्रभु यीशु मसीह पर विश्‍वास नहीं किया। जो प्रभु यीशु मसीह से बाहर हैं, उनके लिए ठण्‍डा शब्‍द का इस्‍त्‍ोमाल किया गया है।

ग्रीक भाषा में गर्म के लिए प्रयोग किये जाने वाला शब्‍द है टेस्‍टॉस। यह शब्‍द उन लोगों के लिए इस्‍त्‍ोमाल किया जाता है, जो बचाए हुए लोग हैं, जो उद्धार पाये हुए लोग हैं। उसके बाद कायलियारॉस शब्‍द का इस्‍त्‍ोमाल किया गया है और इस शब्‍द का अर्थ है, गुनगुने लोग अर्थात्‌ जो न ठण्‍डे हैं और न गर्म, जो झूठे हैं, जो दिखावटी हैं, जो केवल नामधारी हैं ।

प्रभु यीशु मसीह कहता है कि तू ऊपर से तो गर्म दिखाई देता है पर ठण्‍डा है। तू दिखता कुछ और है, और वास्‍तव में तू कुछ और है; तेरे जीवन में विरोधाभास दिखाई देता है। अच्‍छा तो यह होता कि तू ठण्‍डा होता या गर्म होता।

तीतुस की पत्री के अध्‍याय 1:16 में लिखा है;

“वे कहते हैं, कि हम परमेश्‍वर को जानते हैं: पर अपने कामों से उसका इन्‍कार करते हैं, क्‍योंकि वे घृणित और आज्ञा न मानने वाले हैं; और किसी अच्‍छे काम के योग्‍य नहीं”।

वे परमेश्‍वर को मानते तो हैं लेकिन उनके काम उसके योग्‍य नहीं हैं क्‍योंकि उनमें गुनगुनापन आ गया है। वे न तो ठण्‍डे हैं और न ही गर्म। तुम्‍हारे जीवनों में विरोधाभास दिखाई देता है और ऐसे लोग किसी अच्‍छे काम के योग्‍य नहीं।

2 पतरस 2:20-22 में लिखा है;

“जब वे प्रभु और उद्धारकर्त्ता यीशु मसीह की पहचान के द्वारा संसार की नाना प्रकार की अशुद्धता से बच निकले, और फिर उन में फंसकर हार गए तो उन की पिछली दशा पहिली से भी बुरी हो गई है। क्‍योंकि धर्म के मार्ग का न जानना ही उन के लिये इस से भला होता, कि उसे जानकर, उस पवित्र आज्ञा से फिर जाते, जो उन्‍हें सौंपी गई थी। उन पर यह कहावत ठीक बैठती है, कि कुत्‍ता अपनी छांट की ओर और धोई हुई सूअरनी कीचड़ में लोटने के लिये फिर चली जाती है”।

कुत्‍त्‍ो और सुअर से उनकी तुलना की गई है, क्‍यों? क्‍योंकि वे बच तो निकले पर फिर फंस गये। अब उनकी दशा और भी बदतर हो गई।

कुलुस्‍सियों 2:20-23 में लिखा है;

“जब कि तुम मसीह के साथ संसार की आदि शिक्षा की ओर से मर गए हो, तो फिर उन के समान जो संसार में जीवन बिताते हैं, मनुष्‍यों की आज्ञाओं और शिक्षानुसार और ऐसी विधियों के वश में क्‍यों रहते हो? कि यह न छूना, उसे न चखना, और उसे हाथ न लगाना। क्‍योंकि ये सब वस्‍तुएं काम में लाते लाते नाश हो जाएंगी। इन विधियों में अपनी इच्‍छा के अनुसार गढ़ी हुई षक्‍ति की रीति, और दीनता, और शारीरिक योगाभ्‍यास के भाव से ज्ञान का नाम तो है, परन्‍तु शारीरिक लालसाओं के रोकने में इन से कुछ भी लाभ नहीं होता”।

जो संसार की बातें हैं, जो संसार की कहावतें हैं, जब तुम उनसे मर गये हो तो फिर उन के समान जो संसार में जीवन बिताते हैं, मनुष्‍य की शिक्षाओं और विधियों के वश में क्‍यों रहते हो? उन लोगों के समान क्‍यों चलते हो? क्‍योंकि तुम तो इन बातों के लिये मर गये हो। जब प्रभु यीशु मसीह में तुम जीवित हो तो संसार की बातों के लिये तुम मर गये हो। ऐसा नहीं हो सकता कि तुम प्रभु यीशु मसीह में भी जीवित रहो और संसार की बातों को भी मानो।

कितनी बार हमारे साथ ऐसा ही होता है कि हम समझौता कर लेते हैं। हमारी मसीहियत केवल रविवार तक सीमित रह जाती है, केवल होंठो तक रह जाती है, केवल हमारे कथनों तक सीमित रह जाती है परन्‍तु हमारे कार्यों में प्रभु यीशु मसीह दिखाई नहीं देता। इस कारण प्रभु यीशु मसीह हम से कहता है कि न तू ठण्‍डा है, तू गर्म है वरन्‌ तू गुनगुना हो गया है, भला होता कि तू ठण्‍डा ही होता या गर्म होता।

कितनी बार ऐसा होता है कि हम संसार की मान्‍यताओं को मानने लगते हैं - बच्‍चे की यदि तबीयत खराब है तो हम कहते हैं कि बच्‍चे को नज़र लग गई है काला टीका लगा दें। नई गाड़ी आई है तो उसमें एक काला जूता लटका दो। यदि कोई काना व्‍यक्‍ति दिख गया तो सारा दिन बेकार हो जायेगा। यदि काली बिल्‍ली ने रास्‍ता काट दिया तो ज़रूर कुछ खराब घटेगा।

ये सारी बातें परमेश्‍वर के वचन के अनुसार नहीं हैं पर हम कितनी बार इस प्रकार की बातें करते हैं। हम इस संसार में रहते हैं और जो प्रभु यीशु मसीह में हैं, उनके लिये इन बातों का कोई स्‍थान नहीं है। किसी मज़ार के सामने हमको गाड़ी खड़ी करने की ज़रूरत नहीं है क्‍योंकि हमारा परमेश्‍वर इन सब से कहीं बड़ा और सामर्थी है। हम उसके बेटे एवं बेटियां हैं, हमको उसके अनुसार चलना चाहिये और संसार की परम्‍पराओं और इन शिक्षाओं की ओर हमें ध्‍यान नहीं देना चाहिये।

प्रभु यीशु मसीह बड़े कटु शब्‍दों में ऐसे लोगों की आलोचना करता है, वह कहता है;

“तू जो कहता है कि मैं धनी हूं, और धनवान हो गया हूं, और मुझे किसी वस्‍तु की घटी नहीं, और यह नहीं जानता, कि तू अभागा और तुच्‍छ और कंगाल और अन्‍धा और नंगा है”।

तू सोचता है कि संसार की दृष्‍टि में तू सफल हो गया है, तेरे पास बहुत पैसा है, तू अपनी मनमानी कर सकता है। तेरे पास सुख-सुविधाएं हैं तो तू सोचता है कि तू सफल हो गया है। परन्‍तु परमेश्‍वर की दृष्‍टि और संसार की दृष्‍टि में अन्‍तर है। संसार की सफलता में और आत्‍मिक सफलता में अन्‍तर है। एलेक्‍जेंडर दि ग्रेट जिसने बहुत कम उम्र में अधिकांश देशों में अपनी विजय पताका लहरा दी थी उसने अपनी मृत्‍यु के पूर्व कहा कि जब मेरी अर्थी निकलेगी, तो मेरे ख़ाली हाथ अर्थी से बाहर कर देना जिससे लोग देख सकें कि सिकन्‍दर ख़ाली हाथ आया था और ख़ाली हाथ चला गया। वह संसार की दृष्‍टि में एक महान राजा हो गया है, आधे से ज़्‍यादा विश्‍व में उसने अपनी विजय पताका लहरा दी, परन्‍तु परमेश्‍वर की दृष्‍टि में एक असफल व्‍यक्‍ति रहा।

हैनिबॉल के विषय में हम पाते हैं कि उसने एक लाख से अधिक लोगों की हत्‍या की थी और जिन लोगों को उसने मारा था, उनके हाथ में सोने की अंगूठियां थीं। यह उसका शौक था कि वह ऐसे व्‍यक्‍ति की हत्‍या करे जिसके हाथ में बहुत ही आकर्षक अंगूठी हो और जब उसकी मृत्‍यु के बाद उसके संग्रह को देखा गया तो उसके पास डेढ़ लाख अंगूठियां निकलीं जो उन लोगों की थीं जिन्‍हें उसने मार डाला था।

हैनिबॉल का संसार में बहुत नाम था, बड़ा यश था; लेकिन अन्‍त में वह इतना निराश हो गया कि उसने ज़हर खाकर आत्‍महत्‍या कर ली। जूलियर सीज़र एक प्रसिद्ध शासक था जिसने संसार के 800 शहरों को जीत लिया था और 10 लाख से भी अधिक लोगों का लोहू बहाया था। जब वह अपनी जीत का जश्‍न मना रहा था तब उसके निकट के मित्र ने पीछे से आकर तलवार से उसे प्रहार किया और उसी जश्‍न के दौरान जूलियर सीज़र की हत्‍या कर दी गई।

मर्लिन मुनरो एक विश्‍व विख्‍यात अभिनेत्री थी, उसके सौंदर्य की चर्चा संसार के कोने-कोने में थी, वह लाखों और करोड़ों डालर कमा रही थी। कई अन्‍तर्राष्‍ट्रीय अवॉर्ड उसने जीते थे लेकिन अपने जीवन में वह इतनी निराश हो गई कि एक रात जश्‍न के बाद वह अपने कमरे में वापस आयी और उसने आत्‍महत्‍या कर ली।

प्रभु यीशु मसीह ने एक किसान का दृष्‍टान्‍त बताया। वह किसान सोचता था कि मैंने बहुत अच्‍छा व्‍यवसाय किया है, मैं और बड़े गोदाम बनवाऊंगा, और धन कमाऊंगा, आराम से रहूंगा, सुख से रहूंगा, ऐश करूंगा परन्‍तु परमेश्‍वर उससे कहता है, हे मूर्ख ! परमेश्‍वर की दृष्‍टि में वह व्‍यक्‍ति मूर्ख है क्‍योंकि उसकी योजना में, उसकी सफलता में परमेश्‍वर की इच्‍छा शामिल नहीं है।

हम संसार की दृष्‍टि में कितने भी सफल क्‍यों न हो जाएं, हम संसार की दृष्‍टि में कितने भी धनवान हो जाएं परन्‍तु परमेश्‍वर की दृष्‍टि में हम क्‍या हैं ? यह प्रभु यीशु मसीह जब हमको अपनी जलती हुई आंखों से देखता है, जब वह हमारे दिल को देखता है, जब वह हमारी आत्‍मा को देखता है तो उसको क्‍या दिखाई देता है? क्‍या तब वह यह कहता है कि तू न तो ठण्‍डा है और न गर्म लेकिन तू गुनगुना है। तुझे देखकर मैं अपने आप को बीमार सा महसूस करता हूं और मैं तुझे उगलने पर हूं।

2. प्रभु यीशु कहता है तूने अपनी स्‍थिति का ग़लत मूल्‍याकंन किया है:- प्रकाशितवाक्‍य 3:17 में प्रभु यीशु मसीह इस कलीसिया के लिए कहता है;

“तू जो कहता है, कि मैं धनी हूं, और धनवान हो गया हूं, और मुझे किसी वस्‍तु की घटी नहीं, और यह नहीं जानता, कि तू अभागा और तुच्‍छ और कंगाल और अन्‍धा और नंगा है”।

प्रभु यीशु कहता है; तू भ्रम में है, तूने अपनी स्‍थिति का ग़लत मूल्‍यांकन किया है। कितनी बार हमारे साथ यह समस्‍या होती है कि हम अपनी स्‍थिति का ग़लत मूल्‍यांकन कर लेते हैं। हम सोचते हैं कि हम तो बहुत धर्मी हैं, हम तो दूसरों से बेहतर हैं, हम तो प्रार्थना करते हैं, हम तो कलीसिया की आराधना में जाते हैं; परन्‍तु हो सकता है कि प्रभु यीशु मसीह हम से कहे कि तूने अपना ग़लत मूल्‍यांकन किया है।

कुछ समय पूर्व मेरी बेटी जब अमेरिका से आई तो बताने लगी कि अमेरिका में जवानों में बहुत तेज़ी से एक बीमारी फैल रही है, जिसे एनेरैक्‍सिया कहते हैं। डॉ. गैरी जॉनसन जब भारत यात्रा पर आए तो वे भी इस बीमारी के बारे में बता रहे थे। इस बीमारी के लक्षण ये हैं कि व्‍यक्‍ति यह सोचने लगता है कि उसका शरीर बहुत बढ़ रहा है। आजकल बढ़ते वज़न की सबको चिन्‍ता होती है। व्‍यक्‍ति को यह लगने लगता है कि वह बहुत मोटा हो रहा है और इसके कारण वह खाना बन्‍द कर देता है या खाना बहुत कम कर देता है।

एनेरैक्‍सिया में वास्‍तव में व्‍यक्‍ति का भार बढ़ नहीं रहा होता बल्‍कि वह अपने मन में यह सोच लेता है। उसकी ऐसी मानसिकता हो जाती है जिससे व्‍यक्‍ति खाना बहुत कम खाता है या खाना ही बन्‍द कर देता है और इससे कई जवान लोगों की मृत्‍यु हो चुकी है। यह एक जानलेवा बीमारी है क्‍योंकि व्‍यक्‍ति को एक ऐसी स्‍थिति का भ्रम हो जाता है; जो कि वास्‍तव में है ही नहीं।

ऐसे कई लोग हैं; जिन्हें आत्‍मिक जीवन का एनेरैक्‍सिया हुआ है। हमको ऐसा लगता है कि हम बहुत अच्‍छे मसीही हैं। हम को लगता है कि हम बहुत प्रार्थना करते हैं जबकि वास्‍तव में तो हम प्रार्थना नहीं करते या बहुत थोड़ी प्रार्थना करते हैं। हमको ऐसा लगता है कि हम वचन का बहुत अध्‍ययन कर रहे हैं, परन्‍तु वास्‍तव में हम बाइबिल का पठन बिल्‍कुल नहीं करते या बहुत थोड़ा करते हैं। हम ऐसा सोचते हैं कि हम अपना जीवन परमेश्‍वर के भय में रह कर बिता रहे हैं परन्‍तु वास्‍तव में ऐसा होता नहीं है।

बार-बार परमेश्‍वर के वचन में यह आया है कि शैतान ने, इस संसार के अधिकारी राजा ने हमारी आंखों को अन्‍धा कर दिया है। पतरस के जीवन में हम इसे देख सकते हैं कि उसने अपना ग़लत मूल्‍यांकन किया।

यूहन्‍ना 13:37 में हम पाते हैं ;

“पतरस ने उस से कहा, मैं तो तेरे लिये अपना प्राण भी दे दूंगा”।

लेकिन बाद में पतरस अपने इस वचन से मुकर जाता है, उसने अपना ग़लत मूल्‍यांकन किया था। पतरस ने शैतान की शक्‍ति का कम मूल्‍यांकन किया था और अपनी शक्‍ति का अधिक मूल्‍यांकन कर लिया था ।

रोमियों 3:10 में लिखा है;

“जैसा लिखा है, कि कोई धर्मी नहीं, एक भी नहीं”।

1 यूहन्‍ना 1:6 में लिखा है;

“यदि हम कहें, कि उसके साथ हमारी सहभागिता है, और फिर अन्‍धकार में चलें, तो हम झूठे हैं: और सत्‍य पर नहीं चलते”।

1 यूहन्‍ना 2:4 में लिखा है;

“जो कोई यह कहता है, कि मैं उसे जान गया हूं, और उस की आज्ञाओं को नहीं मानता, वह झूठा है; और उस में सत्‍य नहीं”।

नीतिवचन 3:5-7 में लिखा है;

“तू अपनी समझ का सहारा न लेना, वरन सम्‍पूर्ण मन से यहोवा पर भरोसा रखना। उसी को स्‍मरण करके सब काम करना, तब वह तेरे लिये सीधा मार्ग निकालेगा। अपनी दृष्‍टि में बुद्धिमान न होना; यहोवा का भय मानना, और बुराई से अलग रहना”।

हमारी दृष्‍टि में क्‍या हम बहुत धर्मी हो गये हैं? क्‍या हमारी दृष्‍टि में हमारा जीवन बहुत सन्‍तोषजनक हो गया है? हमारी दृष्‍टि में प्रार्थना का जीवन क्‍या पर्याप्‍त है? हम वचन का जो अध्‍ययन करते हैं क्‍या वह पर्याप्‍त है? प्रभु यीशु मसीह इस कलीसिया की बड़ी कटु आलोचना करता है कि तेरे यहां वस्‍त्र तो बनते हैं पर तू नंगा है। तेरे यहां सुरमा तो बनता है परन्‍तु तू अन्‍धा है, तेरे यहां चिकित्‍सा भी की जाती है परन्‍तु तू रोगी है।

3. प्रभु यीशु कहता है मैं अब भी तुझसे प्रेम रखता हूं:- प्रकाशितवाक्‍य 3:18-22 में प्रभु यीशु मसीह इस कलीसिया से कहता है;

“इसीलिये मैं तुझे सम्‍मति देता हूं, कि आग में ताया हुआ सोना मुझ से मोल ले, कि धनी हो जाए; और श्‍वेत वस्‍त्र ले ले कि पहिनकर तुझे अपने नंगेपन की लज्‍जा न हो; और अपनी आंखों में लगाने के लिये सुर्मा ले, कि तू देखने लगे। मैं जिन जिन से प्रीति रखता हूं, उन सब को उलाहना और ताड़ना देता हूं, इसलिये सरगर्म हो, और मन फिरा। देख, मैं द्वार पर खड़ा हुआ खटखटाता हूं; कि जो कोई मेरा शब्‍द सुनकर द्वार खोलेगा, तो मैं उसके पास भीतर आकर उसके साथ भोजन करूंगा, और वह मेरे साथ। जो जय पाए, मैं उसे अपने साथ अपने सिंहासन पर बैठाऊंगा, जैसा मैं भी जय पाकर अपने पिता के साथ उसके सिंहासन पर बैठ गया। जिस के कान हों वह सुन ले कि आत्‍मा कलीसियाओं से क्‍या कहता है”।

प्रभु यीशु मसीह कहता मैं अब भी तुझसे प्रेम रखता हूं। मैं अब भी तुझ को अवसर देता हूं, मैं अब भी तुझ को अपने पास बुलाता हूं। तुझमें सारी कमज़ोरियां तो हैं, परन्‍तु तेरे लिये अब भी अवसर है क्‍योंकि मैं अभी भी तुझ से प्रेम रखता हूं। मैं अभी भी तेरे दरवाज़े पर खड़ा हुआ खटखटाता हूं। यदि तू मन फिराएगा, यदि तू सरगर्म होगा, यदि तू जय पाएगा तो तुझको अभी भी अवसर है कि तू उस अन्‍तिम मैच को जीत सकता है। तुझे अभी भी अवसर है कि तू सिंहासन पर बैठ सकता है।

यूहन्‍ना 21:3 में हम पाते हैं;

“शमौन पतरस ने उन से कहा, मैं मछली पकड़ने को जाता हूं: उन्‍हों ने उस से कहा, हम भी तेरे साथ चलते हैं: सो वे निकलकर नाव पर चढ़े परन्‍तु उस रात कुछ न पकड़ा”।

पतरस वापस अपने व्‍यापार में लौट गया था। रात भर वह मछली इसलिये नहीं पकड़ रहा था कि उनका मनोरंजन हो या अपने घर में मछली ले जाए और पकाकर खाए। परन्‍तु वे मछलियां इसलिए पकड़ रहे थे कि उसे वे बाज़ार में ले जाकर बेचें और रोजी-रोटी कमाएं।

परन्‍तु उसके बाद यूहन्‍ना 21:12 में हम पाते हैं;

“यीशु ने उन से कहा, कि आओ, भोजन करो और चेलों में से किसी को हियाव न हुआ, कि उस से पूछे, कि तू कौन है? क्‍योंकि वे जानते थे, कि हो न हो यह प्रभु ही है”।

तत्‍कालीन रिवाज़ के अनुसार कोई भी यहूदी किसी व्‍यक्‍ति को भोजन पर तब तक नहीं बुलाता था जब तक वह उसे क्षमा न कर दे। प्रभु यीशु मसीह जब पतरस और चेलों को बुला रहा है कि आओ तुम मेरे साथ भोजन करो। तो इसका अर्थ यह है कि प्रभु यीशु मसीह यह कह रहा है कि मैंने तुम्‍हें क्षमा कर दिया है। चाहे तुम्‍हारा अतीत कैसा भी रहा हो, तुम ने कैसा भी भयंकर पाप किया हो, चाहे तुम ने मेरे नाम का इन्‍कार किया हो; मैंने तुम्‍हें क्षमा कर दिया है।

आज यही प्रभु यीशु मसीह हम से भी कहता है कि हमारा अतीत कैसा भी रहा हो, हमारे अतीत में कैसे भी धब्‍बे लगे हों, चाहे हमने कितने भी घृणित काम किये हों इसके बावजूद वह हमको अपने पास बुलाता है ।

यूहन्‍ना 21:15 में हम पाते हैं कि;

“भोजन करने के बाद यीशु ने शमौन पतरस से कहा, हे शमौन, यूहन्‍ना के पुत्र, क्‍या तू इन से बढ़कर मुझ से प्रेम रखता है? उस ने उस से कहा, हां, प्रभु, तू तो जानता है कि मैं तुझ से प्रीति रखता हूं : उस ने उस से कहा, मेरे मेम्‍नों को चरा।”

वर्तमान में तूने जिन बातों को अपने जीवन में भर लिया है, क्‍या तू उन से बढ़कर मुझ से प्रीति रखता है ? तू जो वर्तमान में अपने पुराने व्‍यवसाय में लौट गया है क्‍या उस से बढ़कर तू मुझसे प्रेम रखता है?

प्रभु यीशु मसीह कह रहा है कि हमारा वर्तमान चाहे कैसा भी हो, कैसे भी कामों में लगे हों, कैसी भी मानसिकता में जी रहे हों; वह हमको क्षमा करने को तैयार है। उसने व्‍यभिचार में लिप्‍त उस सामरी स्‍त्री को बुलाया क्‍योंकि वह उसे क्षमा करने के लिए, स्‍वीकार करने के लिये तैयार है। जक्‍कई ने धन, समय और पद का दुरुपयोग किया परन्‍तु उसके बावज़ूद भी प्रभु यीशु मसीह ने जक्‍कई को चुना।

चाहे हमने अपने जीवन में व्‍यभिचार किया हो, हमने प्रभु यीशु को मानने से इन्‍कार कर दिया हो, चाहे हमने अपने जीवन में उसे दुःख पहुंचाया हो, हमारा जीवन ऐसा हो जो प्रभु यीशु मसीह का न होकर शैतान का हो।

परन्‍तु वह कहता है कि तेरा अतीत चाहे कैसा भी हो, तेरा वर्तमान कैसा भी हो। मैं तुझे स्‍वीकार करने को तैयार हूं, मैं तुझे अवसर देता हूं। और जब इस अवसर को शाऊल स्‍वीकार करता है तो मसीहियों का विनाशक; वचन का प्रचार करने वाला बन जाता है।

क्रूस पर लटका डाकू जिसने न जाने कितनी हत्‍याएं की होंगी, व्‍यभिचार में लिप्‍त रहा होगा; जब इस अवसर को पहचान लेता है तो प्रभु यीशु मसीह उससे कहता है कि तू आज ही मेरे साथ स्‍वर्गलोक में होगा। तेरा अतीत चाहे कैसा भी रहा हो, तेरा वर्तमान चाहे कैसा भी हो; परन्‍तु तेरा भविष्‍य मेरे पास सुरक्षित है। प्रभु यीशु मसीह हमको सम्‍पूर्णता से क्षमा करता है।

9 अप्रैल 1995 को सुबह 9 बजकर 10 मिनिट पर अमेरिका के ओक्‍लाहोमा सिटी के फेडरल बैंक की बिल्डिंग को उड़ा दिया गया, जिसमें 168 लोग मारे गए और जिनमें से अधिकांश बच्चे थे। इस नृशंस घटना को अन्‍जाम देने वाले तिमोथी मैक्‍वेल को मृत्‍युदण्‍ड की सज़ा दी गई और बता दिया गया कि 16 मई को सुबह 5 बजे उसको मृत्‍यु दण्‍ड दे दिया जायेगा। उसको कारावास में कमरे में ले जाया जायेगा और कुर्सी पर बैठा दिया जायेगा और एक ज़हर का इंजेक्‍शन लगा दिया जायेगा और उससे उसकी मृत्‍यु हो जायेगी। अपनी मृत्‍यु से दो दिन पहिले तिमोथी मैक्‍वेल ने प्रभु यीशु मसीह का आमंत्रण सुना और उस आमंत्रण को सुन कर उसने अपना दिल प्रभु यीशु मसीह को दे दिया। सोलह मई की सुबह पांच बजे जब उसको ज़हर की सुई लगाई गई तो उसका शरीर तो समाप्‍त हो गया परन्‍तु मरने के पहले उसने कहा, ‘मैंने अपने पाप को स्‍वीकार किया है, मैंने पश्‍चात्ताप किया है, और मैंने प्रभु को पहचाना है और मैं जानता हूं कि मेरी आत्‍मा उसके हाथों में सुरक्षित है’।

चाहे हम ने अपने अतीत में कुछ भी किया हो, चाहे हमारा वर्तमान कितना कलुषित क्‍यों न हो, यदि हम इस अवसर को पहचानते हैं, अपने पापों को स्‍वीकार करते हैं, सच्‍चे हृदय से पश्‍चात्ताप करते हैं तो प्रभु यीशु मसीह हमें क्षमा करने के लिए तत्‍पर है।

एक जवान बेटे की घटना है, जो धनवान लोगों के बीच में रहता था और वहां के निवासियों का यह नियम हो गया था कि जब बच्‍चा कॉलेज से स्‍नातक होता था तो उसको एक कार खरीद कर दी जाती थी। इस जवान की माता की मृत्‍यु हो चुकी थी, परिवार में केवल पिता ही था। बेटे ने पिता से कहा जब मैं ग्रेजुएट होऊंगा तो मुझे एक कार चाहिये। पिता ने कहा ठीक है बेटा देखते हैं। और वे कारों के शोरूम में गए जहां बेटे को सबसे महंगी कार पसन्‍द आई। पिता मुस्‍कराया और उसने कहा - मैं जो कर सकता हूं, वह मैं तुम्‍हारे लिए करूंगा। जब बेटे का ग्रेजुएशन हुआ तो सब जवानों के माता-पिता आ रहे थे और उन्‍हें कार की चाबी दे रहे थे।

उस पिता ने अपने बेटे को एक छोटा सा पैकेट दिया, जिसमें एक पुस्‍तक पैक थी। बेटा घर गया, उसने देखा कि उस पैकेट में बाइबिल रखी थी। यह देखकर वह क्रोध से भर गया क्‍योंकि वह परमेश्‍वर से दूर था, प्रभु यीशु मसीह को वह नहीं पहचानता था। उसने कहा, पिता ने मुझे बाइबिल पकड़ा दी और उसने गुस्‍से से उस को कमरे में फेंक दिया और उसके बाद वह घर छोड़कर चला गया।

दो माह के बाद जब वह हॉस्‍टल में पढ़ रहा था, उसके पास खबर आयी कि उसके पिता की मृत्‍यु हो गई है। जब वह अपने पिता के अन्‍तिम संस्‍कार के लिए लौटा तो वह अपने कमरे में गया। उसने देखा कि वह बाइबिल उसके कमरे में उसी स्‍थान पर अभी भी पड़ी थी। दूसरे कमरे में पिता की मृतक देह थी। उसने उस बाइबिल को उठाया, उसकी आंखों में आंसू थे कि किस प्रकार उसने अपने पिता की अन्‍तिम भेंट को अस्‍वीकार कर दिया था। और जब उसने बाइबिल का पहला पन्‍ना खोला तो उस बाइबिल के भीतर एक चेक रखा पाया, जो उस कार की कम्‍पनी के नाम था, जो कार उसको पसन्‍द आई थी।

कितनी बार ऐसा होता है कि हम परमेश्‍वर के वचन का तिरस्‍कार कर देते हैं। प्रार्थना के जीवन को, वचन के जीवन को अपने से अलग कर देते हैं। परन्‍तु हम यह नहीं जानते कि परमेश्‍वर के वचन में उसने हमको अनन्‍त जीवन की भेंट दी है। उस अनन्‍त जीवन में जाने का टिकट दे दिया है; जहां कोई दुःख नहीं, जहां कोई पीड़ा नहीं, जहां कोई अलगाव नहीं।

परमेश्‍वर ने अपने घर की मिल्‍कियत के कागज़ात हमको दे दिये हैं, वह घर जिसे उसने अपने परिश्रम से, अपने पसीने को बहाकर, अपने लहू को बहाकर बनाया है।

वह प्रभु यीशु मसीह हमको आज अगर देखता है तो वह कहता है कि तू अन्‍धा है, तू नंगा है और तू अभागा है परन्‍तु वह आज भी हमसे यह कहता है कि आ, मेरे साथ भोजन कर, मैं तुझे क्षमा करने को तैयार हूं। क्‍या हम आएंगे?

लौदीकिया में आज कलीसिया नहीं है परन्‍तु क्‍या हमारे दिलों में प्रभु यीशु मसीह के लिए जगह है? क्‍या हम उसके साथ चलने के लिए तैयार हैं? यही प्रभु के लिये प्रमुख है, इसी में हमारे जीवनों की सफलता और आत्‍मा की सुरक्षा है।