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प्रभु यीशु के सात पत्र - आत्मिक हत्या के तीन औज़ार

परिचय :- प्रकाशितवाक्‍य की पुस्‍तक में वर्णित कलीसियाओं में पांचवी कलीसिया सरदीस की कलीसिया है जिसका वर्णन 3:1-6 में पाया जाता है।

सरदीस नगर इफिसुस से 50 मील पूर्व में स्‍थित है और 1700 फीट ऊंची पहाड़ी पर बसा हुआ है, आज यह स्‍थान तुर्किस्‍तान में पाया जाता है। सरदीस एक बहुत प्रमुख स्‍थान था और पांच प्रमुख मार्ग यहां आकर मिलते थे। पांच राजमार्गों का संगम होने के कारण यह व्‍यवसाय का एक प्रमुख स्‍थान था। सरदीस में अनेक धनवान लोग रहते थे। उस समय का सबसे धनवान व्‍यक्‍ति क्रोयेशस, सरदीस में रहता था जिसके कारण भी सरदीस विख्‍यात था। संसार की पहली टकसाल सरदीस में ही खुली थी जहां सिक्‍के बनाए जाते थे। विश्‍व में सबसे खूबसूरत और महंगे गलीचे बनाने का उद्योग भी सरदीस में था और चूंकि यह एशिया का प्रमुख शहर था इस कारण यहां बनने वाले गलीचों के कारण एशियन गलीचे नाम से ही विश्‍व विख्‍यात हैं। विश्‍व के दो प्रमुख मन्‍दिर सरदीस में थे। जिनमें से एक डायना देवी और दूसरा अपोलो देवता का मन्‍दिर था जहां सूर्य देवता की उपासना की जाती थी।

सरदीस पर दो बार आक्रमणकारियों ने हमला करके नगर पर कब्‍ज़ा किया, जिनमें से पहली बार फारसियों ने और दूसरी बार यूनानियों ने सरदीस पर कब्‍ज़ा किया। ऐसा इस कारण हुआ क्‍योंकि वहां के लोग निश्‍चिंत थे, वे सोचते थे कि हम तो बहुत ऊंचाई पर बसे हैं, हम पर कोई आक्रमण नहीं कर सकता। इसी कारण वहां पर किसी प्रकार की शहरपनाह नहीं बनाई गई थी और कोई पहरेदार भी नियुक्‍त नहीं किये गए थे।

सन्‌ 17 ईस्‍वी में वहां पर पहली बार भूकम्‍प आया और बहुत विनाश हुआ, तब वहां के प्रशासक तिबिरियुस ने बहुत राशि खर्च करके पांच साल में सरदीस का पुनर्निर्माण करवाया। नगर को बनाने में इतना अधिक धन लगा कि शासन के कोषागार ख़ाली हो गए।

इस कलीसिया में प्रभु यीशु मसीह एक बहुत चौंकाने वाली बात कहता है, कि तू मरा हुआ है -

“जिसके पास परमेश्‍वर की सात आत्‍माएं और सात तारे हैं, यह कहता है, कि मैं तेरे कामों को जानता हूं, कि तू जीवता तो कहलाता है, पर, है मरा हुआ” (3:1) ।

प्रभु यीशु मसीह जो कलीसिया की आधार शिला है, जो सिरे का पत्‍थर है, जो कलीसियाओं का निर्माता है, संस्‍थापक है और मालिक है; वह कहता है कि तू मरा हुआ है।

संसार के लोग जो कुछ हमारे बारे में कहते हैं, या हम जैसे दिखाई देते हैं, या जैसी हमारी साख है, वह वास्‍तव में हमें सम्‍पूर्णता से वर्णित नहीं कर सकती। परन्‍तु हमारी वास्‍तविकता को प्रभु यीशु मसीह जानता है, वह हमें सम्‍पूर्णता से जानता है।

किसी कलीसिया के लिए यह बड़े दुःख की बात होगी कि प्रभु यीशु यह कह दे कि यह कलीसिया मरी हुई है। किसी व्‍यक्‍ति के लिए यह बड़े दुःख की बात होगी कि प्रभु यीशु मसीह यह कह दे कि आत्‍मिक रूप से यह व्‍यक्‍ति मरा हुआ है। प्रभु यीशु के इस कथन को हमें बड़ी गम्‍भीरता से लेना है। ऐसी तीन बातें हैं जो कलीसिया को मार सकती हैं, और वे ही तीन बातें किसी विश्‍वासी के जीवन को भी समाप्‍त कर सकती हैं और इन्हीं पर हम विचार करेंगे।

इस सन्‍दर्भ में एक उदाहरण दूंगा;

एक कलीसिया के पासबान ने रविवार को आराधना के दौरान लोगों से कहा कि क्‍या आपको मालूम है कि हमारी कलीसिया मर गई है और अंतिम फ्‍यूनरल मैसेज मैं आपको अगले सप्‍ताह दूंगा और अगले रविवार की आराधना हमारी कलीसिया के अंतिम संस्‍कार की आराधना होगी। जब लोगों ने यह सुना तो वे चौंक गए परन्‍तु किसी की कुछ समझ में नहीं आया। वास्‍तव में बात यह थी कि इस कलीसिया में यह पासबान बहुत समय से सेवा कर रहा था और जब उन्‍होंने देखा कि कलीसिया में आत्‍मिक जागृति नहीं आ रही है, सब प्रकार की बुराईयां हो रही हैं तो उन्‍होंने कहा कि कलीसिया मर गई है।

अगले सप्‍ताह जब लोग आराधना के लिए आए तो वहां एक बहुत बड़ा कफन बॉक्‍स रखा हुआ था। पासबान ने कहा कि इससे पहले कि मैं फ्‍यूनरल मैसेज दूं, मैं चाहूंगा कि हर एक व्‍यक्‍ति यहां आकर इस मृतक कलीसिया का अन्तिम दर्शन कर ले। लोग आने लगे और जब उन्‍होंने बॉक्‍स के अन्‍दर देखा तो भीतर एक बहुत बड़ा आईना लगा हुआ था जिसमें उन्‍हें उनका ही प्रतिबिम्‍ब दिखाई देता था। वास्‍तव में जो बात वह पासबान कहना चाहता था वह यह कि कलीसिया इस कारण मरी हुई है क्‍योंकि मैं और आप आत्‍मिकता में मरे हुए हैं।

आज जब परमेश्‍वर हमारे जीवन को देखता है तो क्‍या उसको उसमें आत्‍मिकता दिखाई देती है या फिर वह कहता है कि यह मरा हुआ है? आज जब परमेश्‍वर हमारी कलीसिया को देखता है तो क्‍या कहता है? हो सकता है लोगों की दृष्‍टि में हमारी कलीसिया की साख बहुत अच्‍छी हो।

परन्‍तु जो बात है वह यह कि प्रभु यीशु मसीह मेरे और आपके जीवन को देखता है और जब वह हमारे जीवनों को, हमारी कलीसिया को देखता है तो उसे क्‍या दिखाई देता है?

जब व्‍यक्‍ति गम्‍भीर रूप से अस्‍वस्‍थ हो जाता है और जब अस्‍पताल में उसकी हालत बहुत बिगड़ जाती है, जब लगने लगता है कि इसकी सांस रुक गई है और धड़कन बंद हो गई है, और तब जो अन्‍तिम काम है वह किया जाता है, मेडिकल की भाषा में इसे सी.पी.आर. कहते हैं। सी.पी.आर. में मरणासन्‍न व्‍यक्‍ति को मुख से श्‍वांस दी जाती है, उसके हृदय की मालिश की जाती है, उसके बाद हृदय में इंजेक्‍शन दिया जाता है और इस प्रकार से उसे बचाने का अन्‍तिम प्रयास किया जाता है। कई बार ऐसा सुना गया है कि जिस व्‍यक्‍ति की सांस कुछ समय के लिए बन्‍द हो गई थी, जो कुछ समय तक मरा रहा, उसके बाद जब अन्‍तिम प्रयास किया गया तो फिर से धड़कन आ गई और नब्‍ज़ फिर से चलने लगी। सरदीस की कलीसिया के विषय में भी यही बात है, वह ऐसी ही मरणासन्‍न अवस्‍था में है, जो लगभग मृत हो गई है। ऐसी तीन बातें हैं जो कलीसिया को मार सकती हैं, और वे ही तीन बातें किसी विश्‍वासी के जीवन को भी समाप्‍त कर सकती हैं, इन पर हम विचार करेंगे।

1. जब कर्म बिना विश्‍वास के हो तब कलीसिया मृतक हो जाती है :- हमारे जीवन आत्‍मिक रूप से तब मृतक हो जाते हैं, जब कार्य तो होते हैं परन्‍तु उन कार्यों में विश्‍वास का अभाव होता है। प्रकाशितवाक्‍य 3:1-2 में लिखा है;

“और सरदीस की कलीसिया के दूत को यह लिख, कि, जिस के पास परमेश्‍वर की सात आत्‍माएं और सात तारे हैं, यह कहता है, कि मैं तेरे कामों को जानता हूं, कि तू जीवता तो कहलाता है, पर, है मरा हुआ। जागृत रह, और उन वस्‍तुओं को जो बाकी रह गई हैं, और जो मिटने को थीं, उन्‍हें दृढ़ कर; क्‍योंकि मैं ने तेरे किसी काम को अपने परमेश्‍वर के निकट पूरा नहीं पाया”।

प्रभु यीशु मसीह कहता है तेरा सारा कार्य अधूरा है। कार्य अधूरे क्‍यों हैं? कार्य अच्‍छे तो हैं, बड़े-बड़े तो हैं परन्‍तु अधूरे इसलिए हैं क्‍योंकि उनमें विश्‍वास नहीं है। इस कलीसिया में सब कुछ परम्‍परागत ढंग से चल रहा था, कलीसिया की आराधना होती होगी, लोग गीत गाते होंगे, प्रार्थना करते होंगे और सब प्रकार की परम्‍परागत बातें वहां पर होती होंगी, परन्‍तु उसमें विश्‍वास मौजूद नहीं था। उसमें पवित्र आत्‍मा की सामर्थ्‍य नहीं थी और इसीलिए प्रभु यीशु कहता है कि मैं तेरे किसी कार्य को पूरा नहीं पाता। तेरे कार्य अधूरे हैं क्‍योंकि काम तो हैं, परिश्रम तो है, सजावट है, सुन्‍दरता तो है परन्‍तु वह आत्‍मा कहां है? वह प्रेम कहां है? प्रार्थना कहां है? वह विश्‍वास कहां है?

याकूब 2:19-21 में लिखा है;

“तुझे विश्‍वास है कि एक ही परमेश्‍वर है, तू अच्‍छा करता है, दुष्‍टात्‍मा भी विश्‍वास रखते और थरथराते हैं। पर हे निकम्‍मे मनुष्‍य क्‍या तू यह भी नहीं जानता, कि कर्म बिना विश्‍वास व्‍यर्थ है? जब हमारे पिता इब्राहीम ने अपने पुत्र इसहाक को वेदी पर चढ़ाया, तो क्‍या वह कर्मों से धार्मिक न ठहरा था”।

2 पतरस 3:10-13 में लिखा है; “परन्‍तु प्रभु का दिन चोर की नाईं आ जाएगा, उस दिन आकाश बड़ी हड़हड़ाहट के शब्‍द से जाता रहेगा, और तत्‍व बहुत ही तप्‍त होकर पिघल जाएंगे और पृथ्‍वी और उस पर के काम जल जाएंगे। तो जब कि ये सब वस्‍तुएं, इस रीति से पिघलनेवाली हैं, तो तुम्‍हें पवित्र चालचलन और भक्ति में कैसे मनुष्‍य होना चाहिए। और परमेश्‍वर के उस दिन की बाट किस रीति से जोहना चाहिए और उसके जल्‍द आने के लिये कैसा यत्‍न करना चाहिए; जिस के कारण आकाश आग से पिघल जाएंगे और आकाश के गण बहुत ही तप्‍त होकर गल जाएंगे। पर उस की प्रतिज्ञा के अनुसार हम एक नए आकाश और नई पृथ्‍वी की आस देखते हैं जिन में धार्मिकता वास करेगी”।

जो हमारी धार्मिकता है, जो पवित्रता है, जो हमारा विश्‍वास है; केवल वही बाकी रहेगा। बाकी सब कुछ मिट जाएगा, जो अनन्‍त जीवन का काल है, उसमें धार्मिकता वास करेगी।

मीका 6:6-8 में लिखा है;

“मैं क्‍या लेकर यहोवा के सम्‍मुख आऊं और ऊपर रहनेवाले परमेश्‍वर के साम्‍हने झुकूं? क्‍या मैं होमबलि के लिये एक-एक वर्ष के बछड़े लेकर उसके सम्‍मुख आऊं? क्‍या यहोवा हज़ारों मेढ़ों से, वा तेल की लाखों नदियों से प्रसन्‍न होगा? क्‍या मैं अपने अपराध के प्रायश्‍चित्त में अपने पहिलौठे को व अपने जन्‍माए हुए किसी को दूं? हे मनुष्‍य वह तुझे बता चुका है कि अच्‍छा क्‍या है; और यहोवा तुझ से इसे छोड़ और क्‍या चाहता है, कि तू न्‍याय से काम करे और कृपा से प्रीति रखे, और अपने परमेश्‍वर के साथ नम्रता से चले?”

लूका रचित सुसमाचार 12:16-21 में उस सफल किसान के बारे में लिखा है जिसकी बहुत ज़्‍यादा फसल हुई। वह कहता है अब तो मैं और बड़े गोदाम बनवाऊंगा जिसमें अपने अनाज को रख सकूं और बड़ा व्‍यापार करूंगा। और तब परमेश्‍वर उससे कहता है, हे मूर्ख आज ही रात तेरा प्राण तुझ से ले लिया जायेगा।

बड़े-बड़े काम तो हैं, बड़े-बड़े गोदाम तो हैं परन्‍तु जो बात है वह यह कि इनमें परमेश्‍वर कहां है? तेरे भविष्‍य की योजना में परमेश्‍वर कहां है? तेरे भविष्‍य के कार्यों में तेरा विश्‍वास कहां है? और इसीलिए परमेश्‍वर कहता है - हे मूर्ख! तेरी योजनाओं में परमेश्‍वर के लिये कोई स्‍थान नहीं है क्‍योंकि तेरा कार्य तेरे विश्‍वास की अभिव्‍यक्‍ति नहीं है। जिस तरह से लिखा है कि तुम मुझसे अलग रह कर कुछ भी नहीं कर सकते (यूहन्‍ना 15:5)। यह बड़ी अजीब-सी बात है, बहुत से लोग हैं जो बड़ी-बड़ी इमारतें बना देते हैं, ऐसे लोग हैं जो बहुत नाम कमा लेते हैं परन्‍तु प्रमुख बात यह है कि तुम मुझ से अलग रहकर कुछ सार्थक नहीं कर सकते। तुम मुझ से अलग रहकर कोई ऐसा कार्य नहीं कर सकते जो परमेश्‍वर की दृष्‍टि में सार्थक हो, उसकी दृष्‍टि में महत्‍वपूर्ण हो। हमारे जो कार्य हैं, वे हमारे विश्‍वास की अभिव्‍यक्‍ति होना चाहिए नहीं तो वे अधूरे ही गिने जाएंगे।

2. जब आराधना बिना पवित्रता के हो तब कलीसिया मृतक हो जाती है:- प्रकाशितवाक्‍य 3:4 में प्रभु यीशु मसीह कहता है; “पर हां, सरदीस में तेरे यहां कुछ ऐसे लोग हैं, जिन्‍हों ने अपने अपने वस्‍त्र अशुद्ध नहीं किए, वे श्‍वेत वस्‍त्र पहिने हुए मेरे साथ घूमेंगे क्‍योंकि वे इस योग्‍य हैं”।

प्रभु यीशु मसीह कहता है कि तेरे यहां कुछ ऐसे लोग हैं जिन्‍होंने श्‍वेत वस्‍त्र धारण किए हैं, जिन्‍होंने अपने वस्‍त्र अशुद्ध नहीं किए, इसका अर्थ यह है कि कलीसिया में कुछ विश्‍वासी लोग भी थे। परन्‍तु अधिकांश जो हैं वे तो भ्रष्‍ट हैं, उनके वस्‍त्र मैले हो गए, उनके काम दिखावे के हैं। कुछ लोग तो विश्‍वासी थे परन्‍तु अधिकांश लोगों के जीवनों में वह पवित्रता, धार्मिकता नहीं थी। वह विश्‍वास नहीं था, वह प्रभु यीशु मसीह की गवाही नहीं थी और इसीलिए वह कहता है कि यह कलीसिया मर गई है। न सिर्फ़ तुझमें अधूरापन है क्‍योंकि तेरे कार्य अधूरे हैं वरन्‌ उसके साथ तुझमें दोहरापन भी है। तुम आराधना करते तो हो, तुम प्रार्थना करते तो हो, तुम गीत तो गाते हो, तुम वचन का सन्‍देश तो देते हो, परन्‍तु वास्‍तव में तुम्‍हारे वस्‍त्र मैले हैं। अभी तक तुमने उन वस्‍त्रों को मेम्‍ने के लहू से धोया नहीं है और इसलिए तुम्‍हारी कलीसिया मरी हुई है।

यशायाह नबी की पुस्‍तक 1:13-17 में लिखा है;

“तुम जब अपने मुंह दिखाने के लिए आते हो, तब यह कौन चाहता है कि तुम मेरे आंगनों को पावों से रौंदो”।

यह बड़ा कटु वाक्‍य है कि तुम जब अपने मुंह दिखाने के लिए आते हो, तब यह कौन चाहता है कि तुम मेरे आंगनों को पावों से रौंदो। तुम सिर्फ़ मुंह दिखाने के लिए आते हो, जबकि तुम्‍हारा हृदय शुद्ध नहीं है, तुम्‍हारे हृदय में प्रेम नहीं है, तुम्‍हारे हृदय में क्षमा नहीं है।

यशायाह नबी आगे लिखता है;

“व्‍यर्थ अन्‍नबलि फिर मत लाओ; धूप से मुझे घृणा है। नये चांद और विश्रामदिन का मानना, और सभाओं का प्रचार करना, यह मुझे बुरा लगता है”।

तुम्‍हारे यहां जो प्रचारक हैं उनका प्रचार भी स्‍वीकार्य नहीं है, तुम्‍हारा प्रचार करना भी बुरा लगता है।

“महासभा के साथ ही साथ अनर्थ काम करना मुझ से सहा नहीं जाता। तुम्‍हारे नये चांदों और नियत पर्वों के मानने से मैं जी से बैर रखता हूं; वे सब मुझे बोझ जान पड़ते हैं, मैं उनको सहते सहते उकता गया हूं”।

परमेश्‍वर कहता है, मैं तुम्‍हारे पर्वों से बैर रखता हूं और उनको सहते सहते उकता गया हूं।

“जब तुम मेरी ओर हाथ फैलाओ, तब मैं तुम से मुख फेर लूंगा; तुम कितनी ही प्रार्थना क्‍यों न करो, तौभी मैं तुम्‍हारी न सुनूंगा; क्‍योंकि तुम्‍हारे हाथ खून से भरे हैं। अपने को धोकर पवित्र करो, मेरी आंखों के साम्‍हने से अपने बुरे कामों को दूर करो; भविष्‍य में बुराई करना छोड़ दो, भलाई करना सीखो; यत्‍न से न्‍याय करो, उपद्रवी को सुधारो; अनाथ का न्‍याय चुकाओ, विधवा का मुकदमा लड़ो”।

यह सभी कार्य करो तभी मैं तुम्‍हें आशीष दूंगा; केवल पर्वों को मनाने से कुछ नहीं होता, सिर्फ़ प्रचार करने से कुछ नहीं होता।

सपन्‍याह 3:3-4 में लिखा है;

“उसके हाकिम गरजनेवाले सिंह ठहरे; उसके न्‍यायी सांझ को आहेर करने वाले हुंडार हैं जो बिहान के लिये कुछ नहीं छोड़ते। उसके भविष्यवक्ता व्‍यर्थ बकनेवाले और विश्‍वासघाती हैं, उसके याजकों ने पवित्रस्‍थान को अशुद्ध किया और व्‍यवस्‍था में खींच-खांच की है”।

1 कुरिन्‍थियों 5:1-2 में लिखा है;

“यहां तक सुनने में आता है, कि तुम में व्‍यभिचार होता है, वरन्‌ ऐसा व्‍यभिचार जो अन्‍यजातियों में भी नहीं होता, कि एक मनुष्‍य अपने पिता की पत्‍नी को रखता है और तुम शोक तो नहीं करते, जिससे ऐसा काम करनेवाला तुम्‍हारे बीच में से निकाला जाता, परन्‍तु घमण्‍ड करते हो”।

1 कुरिन्‍थियों 10:21-22 में लिखा है;

“तुम प्रभु के कटोरे और दुष्‍टात्‍माओं के कटोरे दोनों में से नहीं पी सकते! तुम प्रभु की मेज़ और दुष्‍टात्‍माओं की मेज़ दोनों के साझी नहीं हो सकते। क्‍या हम प्रभु को रिस दिलाते हैं? क्‍या हम उस से शक्‍तिमान हैं?”

यदि हम आराधना बिना पवित्रता के करते हैं, बिना मेम्‍ने के लहू से अपने वस्‍त्र को धोये, हम अपने आपको मसीही कहते हैं; यदि हमने नये जन्‍म का अनुभव नहीं किया है तो यह बड़ी त्रासदी की बात है।

प्रभु यीशु मसीह कहता है तुम जीवते तो कहलाते हो पर हो मरे हुए। मैं तुझे जानता हूं; जैसा संसार जानता है वैसा नहीं पर मैं तेरे दिल को जानता हूं। मैं तेरे विचारों को जानता हूं, इसीलिए वह कहता है कि “तू जीवता तो कहलाता है पर है; मरा हुआ”।

3. जब जीवन बिना सही उद्‌देश्‍य के हो तब कलीसिया मृतक हो जाती है:- प्रकाशितवाक्‍य 3:5 में लिखा है; “जो जय पाए, उसे इसी प्रकार श्‍वेत वस्‍त्र पहिनाया जाएगा, और मैं उसका नाम जीवन की पुस्‍तक में से किसी रीति से न काटूंगा, पर उसका नाम अपने पिता और उसके स्‍वर्गदूतों के साम्‍हने मान लूंगा”।

यहां पर एक बात है कि क्‍या हमारे जीवन का यह उद्‌देश्‍य है कि जब हम इस संसार से जाएं तो हमारा नाम जीवन की पुस्‍तक में हो। यहां प्रभु यीशु मसीह कहता है - जो जय पाए, उसे इसी प्रकार श्‍वेत वस्‍त्र पहिनाया जाएगा, और मैं उसका नाम जीवन की पुस्‍तक में से किसी रीति से न काटूंगा। कई लोग यह विश्‍वास करते हैं कि यदि आप एक बार बचा लिए गए तो फिर पाप में गिरने की कोई सम्‍भावना नहीं है। परन्‍तु प्रभु यीशु मसीह यहां कहता है कि ‘जीवन की पुस्‍तक में से नाम नहीं काटूंगा’, जिसका अर्थ यह है कि जीवन की पुस्‍तक में से हमारा नाम काटा जा सकता है (रोमियों 11:19-24)।

यह सोचना ग़लत है कि हमारा नाम यदि एक बार लिख गया तो वह हमेशा के लिए हो गया, अब चाहे कैसे भी पाप करो हमारा नाम जीवन की पुस्‍तक में बना रहेगा।

संसार के इतिहास में, संगमरमर के पत्‍थरों पर, संसार की किताबों में हमारा नाम न लिखा हो तो कोई बात नहीं क्‍योंकि अनन्‍त जीवन इस संसार से उस पार अनन्‍त का है और वही प्रमुख है। क्‍या हमारा नाम जीवन की पुस्‍तक में लिखा हुआ है?

मत्‍ती रचित सुसमाचार 7:22-23 में लिखा है;

“उस दिन बहुतेरे मुझ से कहेंगे; हे प्रभु, हे प्रभु क्‍या हम ने तेरे नाम से भविष्‍यवाणी नहीं की, और तेरे नाम से दुष्‍टात्‍माओं को नहीं निकाला, और तेरे नाम से बहुत अचम्‍भे के काम नहीं किए? तब मैं उन से खुलकर कह दूंगा कि मैं ने तुम को कभी नहीं जाना, हे कुकर्म करनेवालो, मेरे पास से चले जाओ”।

बहुत से लोग कहेंगे हमने तेरे नाम से प्रचार किया, हम तो पासबान रहे, हम तो प्रचारक रहे। हमने तो प्रार्थना करके दुष्‍टात्‍माओं को निकाला, हमने तो बड़े सामर्थ्‍य के काम किये परन्‍तु प्रभु यीशु कहता है कि जीवन की पुस्‍तक में तुम्‍हारा नाम नहीं है।

लूका रचित सुसमाचार 10:20 में लिखा है;

“तौभी इस से आनन्‍दित मत हो, कि आत्‍मा तुम्‍हारे वश में हैं, परन्‍तु इस से आनन्‍दित हो कि तुम्‍हारे नाम स्‍वर्ग पर लिखे हैं”।

कई लोग कहते हैं आत्‍मा हमारे वश में है, हमें आत्‍मा की भरपूरी मिली है, पवित्र आत्‍मा की भरपूरी मिली है, परमेश्‍वर का धन्‍यवाद हो।

परन्‍तु जिस प्रमुख बात पर हमारा सम्‍पूर्ण अनन्‍त निर्भर है वह केवल एक प्रश्‍न है कि तुम ने पाप की समस्‍या का क्‍या किया? इस पाप की समस्‍या का जो समाधान परमेश्‍वर ने हमारे लिये किया है कि उसने अपने पुत्र प्रभु यीशु मसीह को इस संसार में भेज दिया, क्‍या तुम ने उसको स्‍वीकार किया है? केवल दो श्रेणियां हैं; भेड़ों और बकरियों की श्रेणियां। और इसलिए प्रभु यीशु मसीह कहता है कि ‘यदि मनुष्‍य सारे जगत को प्राप्‍त करे और अपनी आत्‍मा की हानि उठाए तो उसे क्‍या लाभ?’

निष्‍कर्ष :- सरदीस की कलीसिया के नाम यह केवल नकारात्‍मक पत्र नहीं है परन्‍तु हर कलीसिया के समान इस पत्र में भी एक आशा है। हमारा प्रभु यीश मसीह अवसर देने वाला है और इसीलिए वह तीसरे पद में कहता है;

“सो चेत कर, कि तू ने किस रीति से शिक्षा प्राप्‍त की और सुनी थी, और उस में बना रह, और मन फिरा : और यदि तू जागृत न रहेगा तो मैं चोर की नाईं आ जाऊंगा और तू कदापि न जान सकेगा, कि मैं किस घड़ी तुझ पर आ पडूंगा”।

हम पाप करते जाते हैं और हमेशा कोई ना कोई कारण निकालकर सोचते हैं कि हम बच गए; परन्‍तु जब व्‍यक्‍ति में चेतना आ जाती है, तब वह पाप के प्रति जागरूक हो जाता है। जो जागृत हो जाए उसे श्‍वेत वस्‍त्र पहनाया जायेगा।

प्रकाशितवाक्‍य 7:13-14 में लिखा है;

“इस पर प्राचीनों में से एक ने मुझ से कहा; ये श्‍वेत वस्‍त्र पहिने हुए कौन हैं? और कहां से आए हैं? मैं ने उस से कहा, हे स्‍वामी, तू ही जानता है : उस ने मुझ से कहा; ये वे हैं, जो उस बड़े क्‍लेश में से निकलकर आए हैं, इन्‍हों ने अपने अपने वस्‍त्र मेम्‍ने के लोहू में धोकर श्‍वेत किए हैं”।

जिन्‍होंने अपने वस्‍त्रों को मेम्‍ने के लोहू से धोकर श्‍वेत किया है। जब हम जाग गये हैं, जब हम चेत गये, जब हम ने पश्‍चात्ताप किया है, जब हमने मन फिराया है, जब हमने विश्‍वास किया है, जब हमने आत्‍मा को स्‍वीकार किया है तो यह उसकी प्रतिज्ञा है, 15 वें-17वें पद में लिखा है;

“इसी कारण वे परमेश्‍वर के सिंहासन के साम्‍हने हैं, और उसके मन्‍दिर में दिन रात उस की सेवा करते है; और जो सिंहासन पर बैठा है, वह उन के ऊपर अपना तम्‍बू तानेगा। वे फिर भूखे और प्‍यासे न होंगे : और न उन पर धूप, न कोई तपन पड़ेगी। क्‍योंकि मेम्‍ना जो सिंहासन के बीच में है, उन की रखवाली करेगा; और उन्‍हें जीवन रूपी जल के सोतों के पास ले जाया करेगा और परमेश्‍वर उन की आंखों से सब आंसू पोछ डालेगा”।

अमेरिका की सीनेट में यह प्रार्थना एक पासबान ने की और जब प्रार्थना समाप्‍त हुई तो उसने देखा कि सीनेट में से आधे से ज़्‍यादा लोग वहां से जा चुके थे। वह प्रार्थना कुछ इस प्रकार थी;

हे प्रभु आज हम तेरे सामने आते हैं कि तुझ से माफ़ी मांगें। हम जानते हैं कि तेरा वचन कहता है कि शापित हैं वे जो बुरे को भला और भले को बुरा कहते हैं। हे प्रभु हम तुझसे माफ़ी चाहते हैं क्‍योंकि हमने ऐसा ही कहा है। हे प्रभु हमने अपने विश्‍वास से समझौता कर लिया है और हे प्रभु कितनी बार हम लोगों के सामने, संसार के सामने ठोकर का कारण बने हैं। हे प्रभु हम तुझसे क्षमा चाहते हैं क्‍योंकि हमने ऐसा पाप किया है। हे प्रभु हमने ज़रूरतमंदो की अनदेखी की है और उसे व्‍यस्‍तता की संज्ञा देकर झूठ बोला है। हे प्रभु हम तेरे पास आते हैं कि तू हमें क्षमा करे। हे प्रभु हम तुझसे क्षमा चाहते हैं क्‍योंकि हम अपने बच्‍चों के लिये ग़लत उदाहरण बने हैं और हमने उनके जीवन में ग़लत मापदण्‍ड स्‍थापित किये हैं। हे प्रभु हम तेरे पास आते हैं कि तू हमें क्षमा करे। हे प्रभु हमने अपनी सुविधा के लिये गर्भस्‍थ शिशुओं की हत्‍या की है और हम अपने हाथों को खून से रंगा हुआ देखते हैं। हां प्रभु, हम गर्भपात के निर्णय में शामिल रहे हैं और अपनी सुविधा के लिये ऐसा किया है, हमारे हाथ खून से रंगे हैं। हे प्रभु हम तेरे पास आते हैं कि तू हमें क्षमा करे। हे प्रभु हमने अपने जीवन में ये दोहरे मापदण्‍ड अपनाये हैं।

हे प्रभु जो कुछ हमने कहा है उसे किया नहीं। और हे प्रभु हम अपनी कलीसिया के लिये शर्म का कारण ठहरे और हे प्रभु हम तेरे पास आये हैं कि तू हमें क्षमा करे। हे प्रभु तू आज हमारे हृदयों को शुद्ध कर। हे प्रभु आज हमें अपने पुत्र प्रभु यीशु मसीह के लोहू से साफ कर दे। हे प्रभु हम तेरे पास आते हैं कि तू हमें क्षमा करे।

आइये, हम भी अपने लिए यही प्रार्थना करें, यही पश्‍चात्ताप करें।