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क्रिसमस के दृश्य में हमारा स्थान!

सन्दर्भ : मत्ती 2:1-12 ; लूका 2:8-17

परिचय :- प्रभु यीशु मसीह के जन्म की घटना एक ऐसी घटना है जिसकी योजना “आदि” से बनाई गई थी। इससे पहले कि पृथ्वी और सौरमंडल की उत्पत्ति होती, परमेश्वर ने मनुष्य के उद्धार की योजना बना ली थी। प्रभु यीशु मसीह का जन्म एक ऐसी घटना थी जिसका इंतज़ार लोग हज़ारों वर्षों से कर रहे थे। सैकड़ों वर्षों पूर्व यशायाह और मीका नबियों ने इस बात की भविष्यवाणी कर दी थी।

यशायाह ने लिखा था “इस कारण प्रभु आप ही तुम को एक चिन्ह देगा। सुनो, एक कुमारी गर्भवती होगी और पुत्र जनेगी, और उसका नाम इम्मानुएल रखेगी”(यशायाह 7:14)।
मीका ने भविष्यवाणी की थी “हे बेतलेहेम एप्राता, यदि तू ऐसा छोटा है कि यहूदा के हज़ारों में गिना नहीं जाता तौभी तुझ में से मेरे लिये एक पुरुष निकलेगा,जो इस्राएलियों में प्रभुता करने वाला होगा; और उसका निकलना प्राचीनकाल से, वरन अनादि काल से होता आया है”(मीका 5:2)।
हज़ारों वर्षों से इतिहास में इसकी तैयारियां चल रही थीं।यदि हम पुराने नियम में देखें तो कई महान घटनाएं नज़र आती हैं।
- पृथ्वी पर जल-प्रलय और नूह का बचाया जाना।
- इब्राहीम के विश्वास का कारण जाना जब उसने अपने एकलौते पुत्र इसहाक के बलिदान की तैयारी की।
- मूसा द्वारा इस्त्राएलियों को मिस्र की बंधुवाई से छुड़ाना।
- राजा दाऊद का चुना जाना और उसके पुत्र सुलेमान का राज्य।
ये समस्त घटनाएं मानव इतिहास की सबसे प्रमुखतम घटना की भूमिका थीं। यह ठीक इसी प्रकार से था जैसे हम लोग शादी की तैयारी करते हैं। कार्ड्स छपवाते, कपड़े, भोजन, मेहमानों को ठहराने और उनके स्वागत की तैयारियां करते हैं और तब सम्पन्न होती है विवाह की विधि।
इसी प्रकार सारी महान घटनाएं केवल भूमिका मात्र थी, तैयारी थी उस महानतम घटना की। वातावरण तैयार किया गया, समय की परिपूर्णता आई और फिर प्रभु का जन्म हुआ। आज यदि हम क्रिसमस के द्य्श्य को देखें तो हमें इसकी महानता पता चलती है।
आज हम उन लोगों के विषय में विचार करेंगे जो प्रभु यीशु के जन्म से संबंधित है, उसमें सहभागी हैं, इस महानतम घटना में सम्मिलित हैं।

1. इस महान घटना में ज्योतिषी शामिल हैं :- लिखा है;
“हेरोदेस राजा के दिनों में जब यहूदिया के बैतलहम में यीशु का जन्म हुआ, तो देखो, पूर्व से कई ज्योतिषी यरूशलेम में आकर पूछने लगे”(मत्ती 2:1)।
तीन अलग-अलग ज्योतिषयों ने आकाश में तारा देखा। उस तारे ने उन्हें निर्देशित किया, उसके पीछे-पीछे बैतलहम में आकर बालक के दर्शन किये।
अजीब तारा था यह, जो चलता जाता था, दिशा बताता जा रहा था, उन ज्योतिषियों का मार्गदर्शन करता जा रहा था।
प्रभु यीशु सृष्टिकर्त्ता है उसके द्वारा ही सृष्टि की रचना हुई;
“सब कुछ उसी के द्वारा उत्पन्न हुआ और जो कुछ उत्पन्न हुआ है, उस में से कोई भी वस्तु उसके बिना उत्पन्न न हुई”(यूहन्ना 1:3)।
उसके जन्म के समय तारे ने ज्योतिषियों का मार्गदर्शन किया। अपने जीवन काल में उसने नाव में सफ्रर करते हुए तूफान को डांटा, लहरें शांत हो गई, तूफ्रान थम गया। जब उसे पीड़ा हुई तो सृष्टि पीड़ित हुई; उसे दर्द हुआ तो सृष्टि भी कराही। जब वो क्रूस की दर्दनाक पीड़ा से गुज़र रहा था, वचन में लिखा है कि चारों तरफ अंधियारा छाया रहा, मंदिर का पर्दा ज़ोर की आवाज़ के साथ फट गया, चट्टानें तड़क गयीं, भूकम्प आ गया। वचन हमें बताता है और प्रभु यीशु का यह वायदा है कि वह पुन: बादलों के साथ आने वाला है। लिखा है, मुर्दे जी उठेंगे क्योंकि सृष्टि पर उसका अधिकार है, वह सृष्टि का राजा, सृष्टिकर्त्ता है और जब वह दुनिया में जन्मा तो सृष्टि भी उसके आनन्द में सहभागी हुई, सम्मिलित हुई।
बारह वर्ष की छोटी सी आयु में मंदिर में प्रभु यीशु उपदेशकों के बीच में बैठे, उनकी सुनते और उनसे प्रश्न करते हुए दिखाई देता है(लूका 2:46)। नीकुदेमुस जो यहूदियों का सरदार था, विद्वान व्यक्ति था, रात के समय प्रभु यीशु से नये जीवन के संबंध में चर्चा करता है (यूहन्ना 3:1-21)। पौलुस महान विद्वान गमलीएल के चरणों में बैठकर शिक्षा प्राप्त करता है।
न सिर्फ सृष्टि में संकेत थे बल्कि हज़ारों मील की यात्रा करके ज्ञानी लोग भी प्रभु यीशु के जन्म की घटना में शामिल हुए, उसे दण्डवत किया और भेंटे चढ़ाई। क्रिसमस के इस दृश्य में विद्वानों का शामिल होना इस बात को दर्शाता है कि सुसमाचार ज्ञानवानों के लिए भी है।

2. इस घटना में स्वर्गदूत शामिल हैं :- लिखा है;
“और उस देश में कितने गड़ेरिये थे, जो रात को मैदान में रहकर अपने झुण्ड का पहरा देते थे। और प्रभु का तेज उन के चारों ओर चमका, और वे बहुत डर गए। तब स्वर्गदूत ने उन से कहा, मत डरो; क्योंकि देखो मैं तुम्हें बड़े आनन्द का सुसमाचार सुनाता हूं जो सब लोगों के लिए होगा। कि आज दाऊद के नगर में तुम्हारे लिये एक उद्धारकर्त्ता जन्मा है, और यही मसीह प्रभु है। और इस का तुम्हारे लिये यह पता है, कि तुम एक बालक को कपड़े में लिपटा हुआ और चरनी में पड़ा पाओगे। तक एकाएक उस स्वर्ग दूत के साथ स्वर्गदूतों का दल परमेश्वर की स्तुति करते हुए और यह कहते दिखाई दिया”(लूका 2:8-13)।
स्वर्गदूत जो परमेश्वर के सामने उसकी स्तुति करते हैं, ईश्वर के लोगों की मदद और बचाव करते हैं। प्रभु यीशु के जन्म में ये ईश्वरीय और स्वर्गीय शक्तियां भी आनन्दित थीं, सम्मिलित थीं। स्वर्गदूत मरियम को आकर संदेश देते हैं, गड़ेरियों को आनन्द का सुसमाचार सुनाते, स्तुति और प्रशंसा करते हैं कि एक ऐसे व्यक्ति का जन्म हुआ है जो कि न केवल दुनिया का राजा है बल्कि जिसे स्वर्ग का अधिकार भी दिया गया है। जब प्रभु जी उठा तो स्वर्गदूत ने क़ब्र का पत्थर लुढ़काया। क्रिसमस के इस द्य्श्य में स्वर्गीय पवित्र शक्तियां हमें पूरे आनन्द के साथ सम्मिलित नज़र आती हैं।

3. इस महानतम घटना में साधारण गड़ेरिये शामिल हैं :- बाइबिल में हम पाते हैं कि मूसा मरूस्थल में रहा करता था, अपने ससुर यित्रो की भेड़ बकरियां चराया करता था। ठीक से बोल तक न पाता था वो, हकलाता था परन्तु परमेश्वर की अद्भुत योजना के अनुसार इस्राएलियों का अगुवा बना। उन दिनों के सबसे छोटे, निम्न जनजातीय परिवार का छोटा सा ग़रीब लड़का, दाऊद एक महान राजा बना।
फिर वे गड़ेरिये हमारे सामने आते हैं जो बहुत सामान्य लोग थे । वचन में लिखा है;
“और उस देश में कितने गड़ेरिये थे, जो रात को मैदान में रहकर अपने झुण्ड का पहरा देते थे। और प्रभु का एक दूत उनके पास आ खड़ा हुआ; और प्रभु का तेज उनके चारों ओर चमका, और वे बहुत डर गए”(लूका 2:8,9)।
अपने परिवारों से दूर रहते हुए भेड़ों की रखवाली कर रहे थे, भेड़ें भी स्वयं उनकी अपनी न थीं। सामान्य बुद्धि वाले, शायद अनपढ़ लोग थे वे। परन्तु स्वर्गदूत उनके पास आया; परमेश्वर की विशेष योजना थी कि इन लोगों तक सुसमाचार पहुंचाया जाए, सांसारिक दृष्टि में छोटे, ग़रीब लोग ही परमेश्वर की दृष्टि में प्रमुख हैं। प्रभु यीशु की सेवकाई में उसकी प्रशंसा का पात्र बनी वह ग़रीब विधवा जिसने दो दमड़ियां जो कि उसकी सम्पूर्ण कमाई थीं, दान में दे दीं। उसके चेले होने का, साथी होने का गौरव ग़रीब, अनपढ़ मछुवों ने पाया।
क्योंकि परमेश्वर के उद्धार की योजना बहुत सीधी और सरल है, जिसके लिए ज़रूरी नहीं कि बहुत पढ़ना पड़े या पढ़ा लिखा होना एक अनिवार्य योग्यता हो। यह योजना तो सबके लिए है और इसी वजह से संसार के सबसे छोटे लोग उस महान प्रभु यीशु के जन्म की घटना में सम्मिलित हुए।
निष्कर्ष :- चरनी में लेटे बालक, यीशु का दर्शन करने के बाद हम पाते हैं कि;
स्वर्गदूत - स्तुति करने के बाद स्वर्ग को चले गये।
गड़ेरिये - आनन्द करते हुए लौट गए।
ज्योतिषी - दूसरी राह पर परमेश्वर के स्वर्गदूत की अगुवाई में चले गये।
परन्तु सबसे प्रमुख बात जो है वह यह कि प्रभु यीशु का जन्म क्रिसमस की समस्त घटनाओं का दृश्य अपूर्ण है; यदि हम वहां नहीं हैं।
- यदि हमने उसको नहीं पहचाना।
- यदि अपने आपको, अपना जीवन उसको नहीं दिया।
यह ऐसी महत्वपूर्ण घटना है, एक ऐसा द्य्श्य है जोहमारे जीवन का दृश्य बदल देगी। यह घटना हमें देगी-
- नई राह, अनन्त जीवन की राह।
- नया आनन्द।
- जीवन में संगीत।
हो सकता है कि सांसारिकता के अंधकार में हमने कई क्रिसमस ऐसे ही बर्बाद कर दिये हों।
परन्तु शायद, यह हमारे जीवनों का अंतिम क्रिसमस हो। यदि हम प्रभु यीशु के साथ नहीं तो हमारा उद्धार संभव नहीं। क्रिसमस की घटना में सृष्टि सम्मिलित है, विद्वान सम्मिलित हैं, स्वर्गदूत भी शामिल हैं परन्तु प्रमुख बात जो है, वह यह कि हमारा उस दृश्य में सम्मिलित होना। इस द्य्श्य में हमारा शामिल होना बहुत ज़रूरी है। यदि प्रभु का जन्म हमारे जीवनों में हुआ है तो हम निश्चित रूप से उस दृश्य में शामिल हैं। यदि नहीं, तो हमारे लिये क्रिसमस अधूरा है। परमेश्वर चाहता है कि हमारा भी स्थान क्रिसमस के दृश्य में हो।
स्वयं से प्रश्न करें कि आज क्रिसमस के इस दृश्य में हम कहां हैं?
मेरी प्रार्थना है कि प्रभु आपको सामर्थ्य और समझ दे कि आप उसकी उद्धार की योजना को पहिचान सकें। तभी क्रिसमस का यह दृश्य आपके जीवनों में पूर्ण होगा; क्रिसमस का यह पर्व आपके जीवनों के लिए सार्थक होगा।