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दिल की बात

किसी व्यक्ति ने डॉ. बिली ग्राहम से पूछा कि आज संसार की सबसे बड़ी समस्या क्या है? वह व्यक्ति यह नहीं जानता था कि डॉ. बिली ग्राहम एक बहुत बड़े प्रचारक हैं। डॉ. बिली ग्राहम ने जवाब दिया कि संसार की सबसे बड़ी समस्या दिल की है। उस व्यक्ति ने कहा दिल की समस्या! कैसी समस्या? यह बात तो मुझे भी मालूम है कि आज भी 70 प्रतिशत लोग हृदय रोग से मरते हैं। डॉ. बिली ग्राहम ने कहा कि मैं सिर्फ़ शारीरिक समस्या की बात नहीं कर रहा हूं परन्तु जो बात है वह यह कि दिल की समस्या सिर्फ हार्ट अटैक तक सीमित नहीं है।
आज सब तरफ दिल की बात हो रही है, यह दिल बड़ी अजीब सी चीज़ है। इसका वज़न सिर्फ 300 ग्राम होता है, एक दिन में एक लाख बार धड़कता है यानि चार हज़ार बार एक घंटे में। शरीर में 12 किलो खून रहता है, और चार मिनट में यह 12 किलो खून हृदय से होकर गुजरता है। यह 300 ग्राम वज़न का छोटा सा दिल, मुट्ठी भर का दिल प्रतिदिन 16 हज़ार लीटर खून पम्प करता है। यह हमारा शरीर जिसे परमेश्वर ने बनाया है, इसमें 75 हज़ार मील लम्बी रक्त वाहिनियां हैं और इन 75 हज़ार मील लम्बी रक्त वाहिनियों में रक्त पहुंचाना दिल का काम है। अगर दिल यह काम नहीं करेगा तो दिल धड़कना बन्द हो जाएगा, धड़कने रुक जाएंगी और जीवन समाप्त हो जाएगा।
यहोशू की पुस्तक के पहले अध्याय में तीन बार यह बात आई है कि हियाव बान्ध, तेरा मन कच्चा न हो।
हियाव बान्ध, हियाव बान्ध, हियाव बान्ध ताकि तेरा मन कच्चा न हो। बाइबिल में हार्ट के लिए हृदय या मन शब्द का प्रयोग हुआ है। पुराने नियम में इसके विषय में कहा गया है, भविष्यवक्ताओं ने इसकी बात की है। प्रभु यीशु ने इसकी चर्चा की है, चेलों ने इसकी चर्चा की है। उत्पत्ति से लेकर प्रकाशितवाक्य तक दिल की बात की गई है, हृदय की बात, मन की बात की गई है। यह मन की बात करना क्यों ज़रूरी है? क्योंकि आज भी संसार की सबसे बड़ी आत्मिक समस्या दिल की समस्या ही है क्योंकि यह दिल ही हमारी भावनाओं का केन्द्र है, जीवन का केन्द्र है। इस हृदय से ही प्रेम उत्पन्न होता है, इसी से घृणा उत्पन्न होती है। इसी से विश्वास उत्पन्न होता है, इसी से शंका उत्पन्न होती है। इसी से अपनापन उत्पन्न होता है, इसी से कटुता उमड़ती है। वचन में यह भी लिखा हुआ है - ''मूर्ख ने अपने मन में कहा है, कोई परमेश्वर है ही नहीं।'' (भजन संहिता 14:1)
अमेरिका के एक बहुत प्रमुख बाइबिल कॉलेज में एक प्रश्न पूछा गया कि किस आयु में पुरुष स्त्री पर कुदृष्टि डालना छोड़ देता है? छात्रों ने कहा कि यह तो बड़ी दिक्कत की बात है, किस से इस सवाल का जवाब पूछा जाए। किसी ने कहा कि 86 साल के एक पासबान हैं जिन्होंने पचास वर्ष तक सेवा की, उन्हीं से पूछा जाए। छात्र उस सीनियर पासबान के पास गए और कहा, आपसे एक प्रश्न पूछना है। पासबान ने कहा- पूछो, मेरे पास सब प्रश्नों का जवाब है। छात्रों ने कहा कि हमारे प्रोफेसर ने पूछा है कि कौन सी उम्र में पुरुष स्त्री पर कुदृष्टि डालना छोड़ देता है। प्रश्न सुन कर वह पासबान कुछ विचलित हो गए और कहा कि यह तो ऐसा प्रश्न है जिसका जवाब मुझे भी नहीं मालूम परन्तु एक बात मालूम है और वह यह कि 86 साल की उम्र तक तो वह ऐसा करना नहीं छोड़ता। यह वरिष्ठ पासबान का अंगीकार था क्योंकि वह इस समस्या से जूझ रहे थे।
यह सच बात है और इसी लिए परमेश्वर के वचन में लिखा हुआ है। ''सब से बढ़कर अपने मन की रखवाली कर क्योंकि जीवन का मूल स्रोत वही है।'' (नीतिवचन 4:23)
यह बात हमें प्रतिदिन स्मरण रखना है, चाहे हम युवा हों या प्रौढ़। हमें अपने मन की रखवाली करना है क्योंकि हृदय से ही सारी बातें पैदा होती हैं। व्यभिचार, जलन, क्रोध, बैर, ईर्ष्या, निन्दा, अपशब्द, हत्या, झूठ आदि सब बातें दिल से ही पैदा होती हैं।
बाइबिल हमें बताती है कि हम आत्मा तो हैं परन्तु हम शरीर भी हैं। हरेक मनुष्य को मृत्यु से होकर गुज़रना है। चाहे किसी के पास कितना भी धन हो, कितने बड़े पद पर क्यों न हो, या तो वह मृत्यु को प्राप्त होगा या फिर प्रभु यीशु मसीह का दूसरा आगमन देखेगा।
कुछ वर्षों पूर्व भारत के एक बहुत बड़े उद्योगपति अमेरिका गए थे। जब वह न्यूयॉर्क में थे तो बीमार हुए और उन्हें वहां के सबसे अच्छे अस्पताल ले जाया गया। उनकी बहुत अच्छी तरह से जांच की गई लेकिन डॉक्टर्स को यह मालूम नहीं पड़ सका कि उन्हें क्या समस्या है। कुछ दिन के बाद उनकी मृत्यु हो गई। बाद में पता चला कि उनकी मृत्यु का कारण मलेरिया था। एक अरबपति व्यक्ति की मृत्यु मलेरिया से हो गई!
आज से 100 साल बाद हमारा नाम भी कोई याद नहीं करेगा। हमारी क़ब्र भी कोई देखने नहीं जाएगा। हमारी क़ब्र पर कोई फूल चढ़ाने वाला भी नहीं बचेगा। हमारी क़ब्र के आस-पास जो घास-फूस होगी, उसे भी साफ करने वाला कोई नहीं होगा। यह एक कड़वा सच है। परन्तु जो बात है कि हम सम्पूर्णता से समाप्त नहीं होंगे। हमारा शरीर तो समाप्त हो जाएगा परन्तु आत्मा बच जाएगी। हमारी आत्मा सदैव जीवित रहेगी। हम चाहें या ना चाहें परन्तु हर व्यक्ति की आत्मा सदैव जीवित रहेगी।
जब परमेश्वर मनुष्य को देखता है तो यह नहीं देखता कि उसकी त्वचा का रंग क्या है? परमेश्वर यह नहीं देखता कि उसके कपड़े कैसे हैं, उसके पास कौन सा पद है, कौन सा अधिकार है, कितना पैसा है, कौन सी डिग्री है? परमेष्वर उसकी कद-काठी, उसकी ख़ूबसूरती नहीं देखता। क्योंकि परमेश्वर केवल मनुष्य के हृदय को देखता है।
बाइबिल हमें बताती है कि संसार तो मनुष्य के बाहरी भाग को देखता है परन्तु परमेश्वर हमारे हृदय को देखता है, आत्मा को देखता है, भावनाओं को देखता है। परमेश्वर हमारे हृदय को जांचता है, मन को परखता है, विचारों को देखता है। न्याय के दिन परमेश्वर हमारा ऊपरी व्यक्तित्व देखकर हमारा न्याय नहीं करेगा। परमेश्वर हमारा धन देखकर, हमारी लोकप्रियता देखकर, हमारे कार्य देखकर हमारा न्याय नहीं करेगा परन्तु परमेश्वर हमारा न्याय हमारा हृदय देखकर करेगा।
एक व्यक्ति जिसका नाम स्टीवनोकलोना था, उसे जब गिरफ्तार किया गया और उसकी हत्या करने से पहले जब उस से पूछा गया कि तुम्हारा धन कहां है, तुम्हारा गढ़, तुम्हारा आधार कहां है? उसने अपने हृदय पर हाथ रखा और कहा यही मेरा धन है, यही मेरी सम्पदा है और यही मेरा आधार है। इस जवाब के बाद स्टीवनोकलोना की हत्या कर दी गई।
हेलन केलर जो अन्धी, गूंगी और बहरी थीं। जिनके जीवन की कहानी पर संजय लीला भंसाली ने बहुत प्रसिध्द मूवी 'ब्लैक' बनाई। उस हेलन केलर ने लिखा है - दुनिया की जो सबसे खूबसूरत अैर अर्थपूर्ण चीज़ें हैं उनको देखा और छुआ नहीं जा सकता, उनका अहसास दिल में किया जा सकता है।

The most beautiful things in the world cannot be seen or touched but are just felt in the heart.
सर वाल्टर राइले को उनके विश्वास के कारण मृत्यु दण्ड दिया जाने वाला था। इसके लिए उन्हें एक बैंच पर लिटाया गया क्योंकि उन दिनों जब किसी को मृत्यु दण्ड दिया जाता था तो उस व्यक्ति को बैंच पर लिटा दिया जाता था और ऊपर से एक बहुत तेज़ धारदार तलवार बहुत ज़ोर से नीचे गिरती थी और व्यक्ति का सिर उसके धड़ से अलग हो जाता था। सर वॉल्टर राइले को बैंच पर लिटाने के बाद मृत्यु दण्ड देने वाले अधिकारी ने पूछा कि क्या तुम्हारा सिर सही जगह पर है? उन्होंने उत्तर दिया- यह बात अहमियत नहीं रखती कि हमारा सिर कहां है? जब तक हमारा हृदय सही जगह पर न हो। It matters little my friend how the head lies...Provided the heart is right.

सर वॉल्टर राइले का हृदय सही जगह पर था क्योंकि उनके हृदय में प्रभु यीशु मसीह था। इसी लिए मृत्यु का भय उन्हें नहीं था, हत्या का, शहीद हो जाने का भय नहीं था।
परमेश्वर आज हम से कुछ पूछता है। परमेश्वर यह नहीं पूछता कि हमारी आर्थिक स्थिति कैसी है? हमारे जीवन की सबसे बड़ी समस्या क्या है? परमेश्वर यह नहीं पूछता कि हमारे जीवन में क्या चुनौतियां हैं। परन्तु परमेश्वर हमसे यह प्रश्न पूछता है कि क्या तुम्हारा हृदय सही स्थान पर है? आमोस 4:12ब में लिखा है - ''अपने परमेश्वर के सामने आने के लिए तैयार हो जा!''
यह सबसे बड़ी आज्ञा है कि अपने परमेश्वर से मिलने के लिए तैयार हो जा। क्या हमें निश्चितता है कि यदि हमारी मृत्यु अचानक से हो जाए, कोई दुर्घटना हो जाए, या प्रभु यीशु मसीह का दूसरा आगमन हो जाए तो हम निश्चितता से कह सकते हैं कि मैं परमेश्वर से मिलने के लिए तैयार हूं। अपने हृदय में अपने आप से पूछिये कि क्या आप अपने परमेश्वर से मिलने के लिए तैयार हैं? क्या आपने परमेश्वर से मिलने की तैयारी कर ली है? एक और प्रमुख प्रश्न है जो शायद अटपटा सा लगे और वह यह कि क्या आप ने अपनी मृत्यु की तैयारी कर ली है? क्या आप ने प्रभु यीशु मसीह के दूसरे आगमन की तैयारी कर ली है?
बाइबिल में वर्णित उस धनवान किसान के बारे में सब जानते हैं। वह एक बहुत ही सफल किसान था। उसके खेतों में बहुत अन्न उपजा और उसने उसे रखने के लिए बखारियां बनवाईं। जब अन्न उसमें भी न समाया तो उसने कहा कि मैं इन बखारियों को तोड़कर बड़े गोदाम बनाऊंगा। मेरी ढेर उपज होगी, मेरे पास और अधिक धन होगा और तब मैं कहूंगा; हे मेरे प्राण खा, पी और चैन से रह। तब उसको एक आवाज़ आती है कि हे मूर्ख! आज ही रात तेरा प्राण तुझ से ले लिया जाएगा।
इस किसान को मूर्ख क्यों कहा गया? वह तो बुध्दिमान था, वह तो सफल व्यक्ति था। उसको मूर्ख इसलिए कहा गया क्योंकि उसके जीवन की योजना में उसका सुख शामिल था, उसका पैसा, उसकी सफलता, उसका व्यवसाय शामिल था परन्तु उसके जीवन के चित्र में परमेश्वर नहीं था। उस व्यक्ति ने अपने भविष्य की तैयारी तो कर ली थी, उसने अपनी आने वाली पीढ़ी के उदर-भरण की तैयारी तो कर ली थी परन्तु उस व्यक्ति ने अपनी मृत्यु की तैयारी नहीं की थी।
हृदय के सम्बन्ध में एक और बात है और वह यह कि सारी बुराइयां हृदय से पैदा होती हैं। यिर्मयाह 17:9-10 में लिखा है, ''मन तो सब वस्तुओं से अधिक धोखा देने वाला होता है, उसमें असाध्य रोग लगा है; उसका भेद कौन समझ सकता है? मैं यहोवा मन को खोजता और हृदय को जांचता हूं ताकि प्रत्येक जन को उसकी चाल-चलन के अनुसार अर्थात् उसके कामों का फल दूं।''
हमें कैसे फल मिलेगा? जब यहोवा परमेश्वर हमारे मन को जांचेगा।
नीतिवचन 14:30 में लिखा है, ''परन्तु मन के जलने से हड्डियां भी जल जाती हैं।''
शान्त मन तन का जीवन है। जब दिल में जलन होती है उसका प्रभाव हड्डियों पर पड़ता है और विभिन्न बीमारियां हम आमंत्रित करते हैं।
नीतिवचन 15:13ब में लिखा है, ''परन्तु मन के दु:ख से आत्मा निराश होती है।''
नीतिवचन 17:20, 22 में लिखा है, ''जो मन का टेढ़ा है, उसका कल्याण नहीं होता। परन्तु मन के टूटने से हड्डियां सूख जाती हैं।''
मत्ती 15:8 में प्रभु यीशु मसीह कहते हैं - ''ये लोग होठों से तो मेरा आदर करते हैं, पर उनका मन मुझ से दूर रहता है।''
प्रभु यीशु मसीह कह रहे हैं कि ये लोग चर्च की आराधना में तो शामिल होते हैं, सण्डे स्कूल तो जाते हैं, गीत गाते हैं कि यीशु तुझको सब मैं देता, सब कुछ अर्पण करता हूं। परन्तु जब सन्देश चल रहा होता है तो इनका मन किसी टी.वी. प्रोग्राम की ओर, किसी की वेश-भूषा की ओर, किसी की खूबसूरती देखने की ओर या भोजन की तैयारियों की ओर लगा होता है।
किसी विचारक ने लिखा है कि कम्युनिस्ट विचारधारा के दाता कार्ल मार्क्स और प्रभु यीशु मसीह में यही अन्तर है। कार्ल मार्क्स कहते हैं कि सबको बहुतायत से, समानता से बहुत सा धन दे दो तो संसार की सारी समस्या सुलझ जाएगी। परन्तु प्रभु यीशु मसीह कहते हैं कि जब तक दिल की समस्या नहीं सुलझेगी, कोई समस्या नहीं सुलझेगी। यदि संसार को बदलना है तो पहले व्यक्ति को बदलना होगा। यदि व्यक्ति को बदलना है, तो दिल को बदलना होगा। जब तक दिल नहीं बदलेगा तब तक कलीसिया नहीं बदलेगी, समाज नहीं बदलेगा, संसार नहीं बदलेगा।
हृदय के सम्बन्ध में जो अन्तिम और सबसे प्रमुख बात है वह यह है कि मन को शुध्द करना, मन को तैयार करना, परमेश्वर से मिलने के लिए तैयार होना; हमारे निर्णय की बात है।
लूका 13:3,5 में प्रभु यीशु दो बार कहते हैं ''परन्तु यदि तुम मन न फिराओगे तो तुम सब भी इसी रीति से नष्ट होगे।''
यूहन्ना बपतिस्मा देने वाले का सन्देश भी यही था कि मन फिराओ क्योंकि स्वर्ग का राज्य निकट है। जिस दिन कलीसिया की स्थापना हुई, पतरस उन लोगों के सामने सन्देश दे रहा था जिन्हों ने प्रभु यीशु मसीह को क्रूस पर चढ़ाया था, और लिखा है ''तब सुननेवालों के हृदय छिद गए, और वे पतरस और शेष प्रेरितों से पूछने लगे, ''हे भाइयो, हम क्या करें?'' पतरस ने उनसे कहा, ''मन फिराओ, और तुम में से हर एक अपने अपने पापों की क्षमा के लिये यीशु मसीह के नाम से बपतिस्मा ले; तो तुम पवित्र आत्मा का दान पाओगे।'' (प्रेरितों के काम 2:37-38)
रोमियों 10:9 में लिखा है ''कि यदि तू अपने मुंह से यीशु को प्रभु जानकर अंगीकार करे, और अपने मन से विश्वास करे कि परमेश्वर ने उसे मरे हुओं में से जिलाया, तो तू निश्चय उध्दार पाएगा।'' यह परमेश्वर का वचन है, यह उसकी प्रतिज्ञा है कि यदि तू मन से विश्वास करे, पश्चात्ताप करे तो तू उध्दार पाएगा।
पाप ने हमारे जीवन को, हमारे दिल को, हमारे वर्तमान को, हमारी बुध्दि को भ्रष्ट कर दिया। पाप ने इस संसार को भ्रष्ट कर दिया। पाप ने हमारे भविष्य को भ्रष्ट कर दिया। पाप हमारे अनन्त को प्रभावित करता है।
अगर आप कहते हैं कि मैं तो झूठ बोलता हूं और मुझे कोई अन्तर नहीं पड़ता। मुझे पता भी नहीं चलता कि मैंने कोई ग़लती की है या कोई पाप किया है। मैं अपशब्द बोलता हूं पर मुझे लगता ही नहीं कि मैंने पाप किया है, परमेश्वर की व्यवस्था का विरोध किया है। यदि आप कहते हैं कि मैं अधर्म से धन कमाता हूं और मुझे कोई अन्तर नहीं पड़ता। यदि आप कहते हैं कि मैं अश्लील फिल्में देखता हूं और मुझे कोई अन्तर नहीं पड़ता। यदि आप कहते हैं कि मैं घृणा करता हूं, मेरे हृदय में घमण्ड है, जलन, बैर, दुर्भावना है और मुझे इससे कोई अन्तर नहीं पड़ता, मुझे ऐसा लगता ही नहीं कि मैं कोई पाप कर रहा हूं।
मेरे प्रियो, यदि ऐसा है तो फिर आपका आत्मिक जीवन इन्टेनसिव केयर यूनिट (आई.सी.यू) में जाने लायक है क्योंकि आपका विवेक मर चुका है। ऐसे लोगों के लिए प्रभु यीशु कहता है कि वे लोग ऐसे हैं जो कान होते हुए भी नहीं सुनते। जो आंख के होते हुए भी नहीं देखते। जिनके पास हृदय तो है पर उसमें भावनाएं नहीं हैं, पाप का अहसास नहीं है।
यह शैतान का झूठ है कि अश्लीलता में ही आनन्द है, नशे में ही मज़ा है, ज़िन्दगी का आनन्द लेना है तो अय्याशी करो, अधर्म से धन कमाओ; इसी में सुख है। परन्तु सच तो वह है जो परमेश्वर का वचन कहता है। जो लोग प्रभु यीशु मसीह में हैं वे जानते हैं कि सच्चा आनन्द, सच्ची शान्ति, सच्ची आशा, अनन्त जीवन की निश्चितता, जीवन की सन्तुष्टि और सन्तोष सहित भक्ति बड़ी कमाई है। आनन्द यीशु में है, शान्ति यीशु में है, सबसे बड़ी कमाई यीशु में है क्योंकि यह सबसे बड़ी कमाई अर्थात् अनन्त जीवन का दान उसी ने हमें दिया है।
परन्तु समस्या है कि हमारे जीवनों में घमण्ड है। जब हमारे जीवनों में घमण्ड होगा तब तक पश्चात्ताप कहां से होगा? जब घमण्ड होगा तो विनम्रता कहां से आएगी? जब घमण्ड होगा तो माफी कैसे मांगेंगे? कैसे कहेंगे कि मेरे भाई मैंने तुमसे झूठ बोला, धोखा दिया; मुझे माफ करना।
मेरे प्रियो, परमेश्वर हम में से हर एक के हृदय को देखता है। हमारी भावनाओं, हमारे उद्देश्यों को देखता है। यिर्मयाह 17:10 में जो बात लिखी है वह यही है कि- परमेश्वर हमारे मन को न सिर्फ़ जांचता है बल्कि हमारे हृदयों को खोजता है। वह खोजता है कि कहां मिल जाएगा मुझे वह हृदय जिसमें मेरे लिए प्यार हो, कहां मिल जाएगा वह हृदय जो मुझे स्वीकार करे, कहां मिल जाएगा वह हृदय जो भटका हुआ हो और मेरे पास आ जाए और उसको शरण मिल जाए।
नीतिवचन 21:2 में लिखा है कि- ''यहोवा मन को जांचता है।''
यहोवा न सिर्फ़ हमारे मनों को जांचता है परन्तु हमारे हृदय को प्रभु यीशु के लहू से तौलता है कि हम उसके योग्य हैं कि नहीं। वह जिसने हमारी ख़ातिर दास का स्वरूप धारण कर लिया, अपने चेलों के गन्दे पांव धोए, जो स्वामी था परन्तु दास बन गया, जिसने मुझे और आपको बचाने के लिए अपना लहू बहा दिया; आज वह प्रभु हमें देखता है कि हमने उसका मूल्य समझा है कि नहीं।
कुछ वर्ष पूर्व एक यूथ कैम्प हुआ और उस कैम्प में एक जवान सामने आया। उसका हृदय टूटा हुआ था, वह रो रहा था। वचन ने उसके दिल में काम किया था। उसको इस बात का अहसास हुआ था कि प्रभु यीशु मसीह आज भी हमें मौका देता है। उसे अहसास हुआ था कि नरक का दण्ड क्या होता है। उसे इस बात का अहसास हुआ था कि परमेश्वर ने अपने लोगों के लिए स्वर्ग में वे वस्तुएं तैयार की हैं जो मनुष्य के चित्त में भी नहीं होतीं। उस जवान को इस बात का अहसास हुआ था कि मेरे पाप चाहे लाही रंग के क्यों न हों, परमेश्वर उन पापों को लेकर समुद्र की गहराई में दफ़न कर देता है।
वह व्यक्ति सामने आया, बहुत रो रहा था वह, एक घण्टे तक वह बात भी नहीं कर पाया। वह मुझे पण्डाल के एक कोने में ले गया और मुझसे कहा, मैंने 18 लोगों की हत्या की है, अदालत से तो मैं छूट गया परन्तु मेरा दिल टूटा हुआ है, क्या प्रभु यीशु मसीह मुझे क्षमा करेगा? मैंने उसके लिए प्रार्थना की और आज वह व्यक्ति प्रचार का कार्य कर रहा है। क्यों? क्योंकि प्रभु यीशु मसीह को उसने अपना दिल दिया और यीशु ने उसके दिल को सम्पूर्णता से बदल दिया। प्रभु यीशु ने उसके अनन्त को सम्पूर्णता से बदल दिया। जो नरक के रास्ते पर जा रहा था वह स्वर्ग के रास्ते पर चला गया।
केवल एक ही तरीका है, कोई दूसरा उपाय नहीं। केवल प्रभु यीशु ख्रीष्ट के लहू से हमारे पाप धुल सकते हैं। हम में से कितने लोग ऐसे होंगे जिनके हृदय में बोझ है, ग्लानि है। जिनके हृदय में अनिश्चितता है, जिन्हें नहीं मालूम कि आज यदि हमारी मृत्यु हो जाए, प्रभु यीशु मसीह का दूसरा आगमन हो जाए, तो हम कहां जाएंगे?

अगर ऐसा है तो परमेश्वर आपके हृदय को देख रहा है। वह कह रहा है; आगे बढ़ो, निर्णय करो, हियाव बान्धो, तुम्हारा मन कच्चा न हो, जहां तुम जाओगे मैं तुम्हारे साथ होऊंगा। परन्तु उससे पहले कि तुम जाओ, तुम्हें मेरे पास आना होगा। अपने दिल में मुझे स्थान देना होगा और प्रभु यीशु मसीह के लहू के मूल्य को समझना होगा। अपना हृदय मुझे समर्पित करना होगा।