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प्रभु यीशु मसीह इस संसार में क्यों आए

हम में से किसी न किसी ने यह प्रश्न किया होगा कि प्रभु यीशु मसीह इस संसार में क्यों आए? क्यों क्रिसमस मनाया जाता है? क्या आवश्यकता थी प्रभु यीशु मसीह की? इस संसार में बहुत से शासक हुए, इस संसार में बहुत से अगुवे हुए, बहुत से राजा हुए, बहुत से महाराजा हुए, बहुत से सेनापति हुए, बहुत से महापुरुष हुए, बहुत से देवी और देवता हुए, बहुत से शिक्षक हुए, बहुत से गुरु हुए, बहुत से सन्त हुए। तो क्या प्रभु यीशु मसीह इन सब गुरुओं, सब सन्तों और इन सब राजाओं में से एक है? क्यों प्रभु यीशु मसीह इस संसार में आए? क्यों प्रभु यीशु मसीह अद्वितीय है?

किसी विद्वान ने प्रभु यीशु के विषय में लिखा है कि वह एक छोटे से गांव के गौशाले में पैदा हुआ। उसकी माता एक साधारण परिवार की महिला थी। लोग जिसे उसका पिता कहते थे वह एक बढ़ई मात्र था। जीवन के प्रथम 30 साल उसने एक गांव में गुज़ारे। वहां उसने अपने पिता की कार्यशाला में काम किया। जीवन के अन्तिम तीन साल वह एक प्रचारक रहा। उसने कभी कोई पुस्तक नहीं लिखी। वह कभी कॉलेज नहीं गया। उसका न तो कोई परिवार था, न ही कोई मकान। वह कभी किसी बड़े शहर में नहीं रहा। अपने गांव की सीमा से 125 मील से अधिक दूर उसने कभी यात्रा नहीं की। उसका कोई कार्यालय नहीं था। उसने कभी कोई इमारत नहीं बनवायी। उसके प्रचार और उसकी बातों से जनता उसके खिलाफ हो गयी। उसके मित्रों ने उसका साथ छोड़ दिया। उसे अदालत ले जाया गया। उस पर झूठा मुकद्दमा चलाया गया। उसे दो कुकर्मियों के बीच क्रूस पर मृत्युदण्ड दे दिया गया। उसकी यदि कोई जायदाद थी तो वह थी वस्त्र की मात्र एक जोड़ी जिसे क्रूस के नीचे सिपाहियों ने चिट्ठी डालकर बांट लिया। मृत्यु के बाद उसे रखा भी गया तो किसी दूसरे व्यक्ति की क़ब्र में।
फिर करीब 2000 वर्ष आए और चले गए। किन्तु आज भी वह व्यक्ति यीशु मानव इतिहास का केन्द्र बना हुआ है। जितनी सेनाओं ने आज तक युद्ध किए, जितने राजाओं ने आज तक राज्य किए, जितने संसद के सत्र आज तक संसार में हुए, जितने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री अब तक हुए, उन सबसे कहीं बढ़कर इस अकेले व्यक्ति यीशु ने संसार के लोगों को सबसे अधिक प्रभावित किया है। आज संसार में सबसे अधिक लोग उसके अनुयायी हैं। आइये, इसी बात पर हम विचार करेंगे कि प्रभु यीशु मसीह इस संसार में क्यों आए? इस सन्दर्भ में मैं आपसे 3 बातें कहूंगा।

1. प्रभु यीशु मसीह इस संसार में उद्धार देने के लिए आया :- यीशु मसीह के जन्म के पूर्व स्वर्गदूतों ने पृथ्वी पर आकर सन्देश दिया जिसका वर्णन मत्ती रचित सुसमाचार 1:21 में किया गया है, ''और तू उसका नाम यीशु रखना क्योंकि वह लोगों का उनके पापों से उद्धार करेगा।'' लूका रचित सुसमाचार 2 अध्याय में हम पाते हैं कि स्वर्गदूत चरवाहों से कहते हैं, मैं तुम्हें बड़े आनन्द का सुसमाचार सुनाता हूं जो सब लोगों के लिए होगा क्योंकि तुम्हारे लिए दाऊद के नगर में एक उद्धारकर्ता जन्मा है। सम्पूर्ण मानव जाति को आवश्यकता है उद्धार की और उद्धार तभी सम्भव है जब पापों की क्षमा हो। संसार के हर व्यक्ति ने पाप किया है और इसके कारण परमेश्वर जो महापवित्र है और मनुष्य के बीच अलगाव हो गया है। मानव जाति की, सारे संसार की सबसे बड़ी समस्या कैंसर और एड्स नहीं परन्तु पाप है जो हमारी आत्मा को अनन्त विनाश की ओर, नरक की ओर ले जाता है क्योंकि रोग तो मनुष्य के शरीर को प्रभावित करता है पर पाप आत्मा को अनन्त विनाश की दिशा में ले जाता है। क्योंकि हम सब ने पाप किया है और हमें परमेश्वर की क्षमा की आवश्यकता है। इसी लिए परमेश्वर ने इस संसार में एक उद्धारकर्ता को भेजा। किसी ने कहा है, यदि संसार में तकनीकी की आवश्यकता होती तो परमेश्वर किसी वैज्ञानिक को भेजता। यदि संसार की मूलभूत आवश्यकता ज्ञान प्राप्त करना होता तो परमेश्वर किसी शिक्षक या विद्वान को भेजता। अगर इस संसार की सबसे बड़ी आवश्यकता धन और सम्पदा होती तो परमेश्वर किसी अर्थशास्त्री को भेजता। यदि इस संसार की सबसे बड़ी आवश्यकता शारीरिक चंगाई की होती तो परमेश्वर किसी चिकित्सक को भेजता। परन्तु परमेश्वर ने एक उद्धारकर्ता को भेजा है। जो हमको क्षमा दे सकता है, क्योंकि इस संसार को इस उद्धारकर्ता की आवश्यकता है। किसी भी संस्कृति में, दर्शन शास्त्र के किन्हीं भी अध्यायों में कोई और उद्धारकर्ता इस संसार में नहीं आया। यह क्षमा बाज़ारों में बिकाऊ नहीं होती। यह क्षमा हम अध्ययन के द्वारा अपनी डिग्री से प्राप्त नहीं कर सकते। यह क्षमा हम नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने के द्वारा प्राप्त नहीं कर सकते। क्षमा केवल प्रभु यीशु मसीह को हमारे हृदय में ग्रहण करने से प्राप्त होती है। एक पासबान किसी मेट्रो ट्रेन में यात्रा कर रहे थे जिसमें बहुत भीड़ थी। अपने पास उन्होंने एक युवती को देखा जो आंसुओं से रो रही थी और बहुत विचलित थी। पासबान ने उससे पूछा कि बेटी तुम्हें क्या हो गया - उस युवती ने उन्हें बताया कि वह जीवन से हार चुकी है और उसके पास आत्महत्या के अलावा कोई रास्ता नहीं। वह युवती आत्महत्या करने जा रही थी। उस पासबान ने उस से कहा - बेटी, क्या तुमने यीशु मसीह के आशा भरे वचनों को पढ़ा है? उस युवती ने कहा - ऐसा क्या दे सकता है तुम्हारा यीशु जो कोई और नहीं दे सकता? पासबान ने उत्तर दिया - यीशु तुम्हें सम्पूर्ण क्षमा और अनन्त जीवन दे सकते हैं जो तुम्हें संसार में नहीं मिल सकता। यीशु के द्वारा हर विश्वास करने वाले को इस जीवन में सम्पूर्ण क्षमा और मृत्यु के पार अनन्त जीवन की निश्चितता प्राप्त होती है।

2. प्रभु यीशु मसीह इस संसार को शान्ति देने के लिए आया :- प्रभु यीशु मसीह इस संसार को मानसिक शान्ति देने आया। किसी चिकित्सक ने लिखा है कि आज इस संसार में 65 प्रतिशत जो मानसिक रोगी हैं वे मानसिक तनाव के शिकार हैं। आज फार्मेसी में वही दवाइयां सबसे ज्यादा बिकती हैं जो तनाव से सम्बन्धित हैं, मानसिक रोगों से सम्बन्धित हैं। मनुष्य के हृदय में घुटन है, मनुष्य के हृदय में दबी हुई समस्या है, मनुष्य को मानसिक यंत्रणा से होकर गुज़रना होता है। सारे संसार में शान्ति की आवश्यकता है और इस शान्ति के नाम पर आतंकवाद होता है, इस शान्ति के नाम पर युध्द होते हैं। लूका 2:14 में प्रभु यीशु मसीह के आगमन के सम्बन्ध में लिखा है - ''कि पृथ्वी पर मनुष्यों में शान्ति हो।'' यशायाह 9:6 में लिखा है - ''उसका नाम शान्ति का राजकुमार रखा जाएगा।'' यूहन्ना 14:27 में प्रभु यीशु मसीह कहते हैं - ''मैं अपनी शान्ति तुम्हें देता हूं।'' फिलिप्पियों 4:7 में लिखा है - ''तब परमेश्वर की शान्ति जो हमारी समझ से परे है तुम्हारे हृदय और तुम्हारे विचारों को यीशु में सुरक्षित रखेगी।'' यह जो शान्ति है वह नशे में नहीं है, यह जो शान्ति है वह ग़लत सम्बन्धों में नहीं है, यह जो शान्ति है, यह समस्याओं को भूलने में नहीं है। यह मानसिक शान्ति तब प्राप्त होती है जब हमारा परमेश्वर के साथ सही सम्बन्ध होता है, जब परमेश्वर के साथ हमारा मेल होता है, जब हम परमेश्वर के पुत्र और पुत्री बन जाते हैं और यह केवल प्रभु यीशु मसीह में सम्भव है।

3. प्रभु यीशु मसीह इस संसार में मृत्यु को पराजित करने के लिए आया :- कोई और कभी मृत्यु को पराजित नहीं कर पाया, कोई दूसरा कभी अनन्त जीवन देने का दावा नहीं कर सका। बाइबिल में लिखा है कि मृत्यु हमारा अन्तिम शत्रु है। बाइबिल हमको बताती है कि मृत्यु एक सत्य है जिसमें से होकर हमको गुज़रना है। मृत्यु से हम बच नहीं सकते। मनुष्य जन्म को तो टाल सकता है पर मृत्यु को टाल नहीं सकता। हम में से जितने लोग यह सन्देश पढ़ रहे हैं शायद सन् 2050 तक बहुत थोड़े ही यहां बच रहेंगे। सन् 2150 तक तो कोई जीवित नहीं बचेगा। क्योंकि बाइबिल में लिखा है कि हमारा जीवन भाप के समान है, छाया के समान है, और ओस की बूंद के समान है। परन्तु इस प्रभु यीशु मसीह में हमको मृत्यु में विजय प्राप्त होती है। प्रभु यीशु मसीह ने कहा - ''सो अब जो प्रभु यीशु में हैं, उन पर दण्ड की आज्ञा नहीं''। बाइबिल में लिखा है कि, जो कोई उस पर विश्वास करे वह नाश न हो परन्तु अनन्त जीवन पाए। केवल प्रभु यीशु मसीह में होकर हम मृत्यु पर विजय प्राप्त कर सकते हैं। मृत्यु का भय हमारे हृदयों में जा सकता है। क्योंकि प्रभु यीशु ने मृत्यु को परास्त किया और आज भी वे जीवित हैं। एक घटना है। मेरे मित्र के पिता की मृत्यु हो गई। जब उनके सूटकेस और अलमारी को खोला गया तो उसमें बहुत सी गिफ्ट्स पैक रखी हुई मिलीं। जब उनको गिफ्ट्स दी जाती थीं तो वह बहुत खुश होते थे। इसीलिए बच्चे उनको क्रिसमस पर और उनके जन्म दिन पर ढेरों गिफ्ट्स देते थे। परन्तु जो बात थी वह यह कि जो गिफ्ट्स दी गईं थीं वे सजाने के लिए नहीं दी गई थीं वह गिफ्ट्स इसलिए दी गई थीं कि वो उनका उपयोग करते। प्रियो, प्रभु यीशु मसीह हमारे लिए सजावट की वस्तु नहीं है। एक परम्परा को पूरा करने की बात नहीं है। परन्तु यह प्रभु यीशु मसीह है जिसको हमें अपने जीवन में उतारना है, जिसको हमें जीना है, जिसको लेकर इस संसार के पार जाना है। क्योंकि यही प्रभु यीशु मसीह है जो हमको क्षमा करता है, यही प्रभु यीशु मसीह है जो हमको शान्ति देता है, और यही प्रभु यीशु मसीह है जो मृत्यु के बाद हमको अनन्त का जीवन दे सकता है। मुम्बई में हुए भयानक आतंकवादी हमलों पर विचार करें - होटल पर आक्रमण, अस्पताल पर आक्रमण, पुलिस स्टेशन पर आक्रमण। जो स्थान संसार की दृष्टि में सबसे सुरक्षित होना चाहिये - वहीं हमला हुआ - लाशों के ढेर लग गए - जो लोग उस अस्पताल में - उन होटलों में थे उन्होंने कभी कल्पना भी न की होगी कि उनकी मृत्यु इतनी निकट है। हम नहीं जानते कि कल क्या होगा - हमारा जीवन इस संसार की होटलों, यात्रा के साधनों यहां तक कि अपने अस्पतालों में भी असुरक्षित है। हमें प्रभु यीशु मसीह आत्मा की सुरक्षा देने आया। क्या हम उस सुरक्षा को, उस शान्ति को, उस उद्धार को प्राप्त करना चाहते हैं? यह क्रिसमस इसीलिये सार्थक हो सकता है कि हम अपने जीवनों में, अपने दिल में यीशु को स्थान दें और निर्भीकता, निडरता, विश्वास और शान्ति से जीवन में अनन्त जीवन की ओर बढ़ते जावें। यही यीशु की राह है - संसार के हर व्यक्ति को यीशु का निमंत्रण है और क्रिसमस का यही उपहार है। परमेश्वर आपको यीशु मसीह के द्वारा अनन्त की आशीषें प्रदान करे। अक्सर हमारा ध्यान सिर्फ़ देखे हुए सच की ओर अटक जाता है और परमेश्वर के लिए, प्रभु यीशु मसीह के लिए हमारे दिल में कोई स्थान नहीं होता। परन्तु परमेश्वर हमको मौका देता है कि हम अपने हृदयों में उसको स्थान दें। जब क्रिसमस आता है तो मानो प्रभु यीशु मसीह एक बार फिर से हमारे परिवार के दरवाज़ों को, हमारे दिलों के दरवाज़ों को खटखटाता है। परन्तु भीतर इतना शोर है कि हमको उसके खटखटाने का शब्द सुनाई नहीं देता। जब क्रिसमस आता है तो मैं आपसे यही कहना चाहता हूं कि प्रभु यीशु मसीह के खटखटाने का शब्द हम सुनें। इस उत्सव को बड़े आनन्द से मनाएं परन्तु प्रभु यीशु मसीह को अपने हृदयों में स्थान दें। ऐसा न हो कि हम उस सराय के मालिक के समान हों जो उसकी निकटता में तो हैं पर उसमें न रहें। उसके पास तो हैं पर उसके दर्शन से वंचित रह जाएं। परमेश्वर हम सभी को आशीष दे कि हम परमेश्वर के सच को पहचानें, उसे अपने जीवनों में ग्रहण करें, उसको अपनी आत्मा में उतारें और उसके बताए हुए मार्ग पर चलें।